दगंल-2 की कहानी लिखी जा रही है? विनेश फोगाट तो एक कदम आगे निकल गईं

वर्ष 2016 में एक मूवी आई थी दंगल. इस फिल्म में एक पिता अपनी लड़कियों से कुश्ती करवाता था. वो भी गांव में. जहां की मानसिकता ऐसी थी, कि लड़कियां सिर्फ घर के काम-काज करने के लिए बनी हैं. कुश्ती और लड़की का तो कोई मेल ही नहीं था. मगर सबके खिलाफ जाकर उस पिता ने लड़कियों से कुश्ती करवाई. और आगे चल कर वह देश के लिए पदक भी जीतकर लाईं.

यह फिल्म थी. महावीर फोगाट की. और उनकी लड़कियां थी गीता और बबिता फोगाट. जोकि सच्ची की एक घटना पर आधारित थी. यहां तक की कहानी तो सबको पता होगी मगर इसके आगे की कहानी यानि गीता और बबिता के बाद की कहानी अब उनकी बहन विनेश फोगाट लिख रहीं हैं.

विनेश फोगाट. फोगाट बहनों में एक बहन. वर्ष 1994 में इनका जन्म हुआ. शुरू से ही अपनी बहनों को कुश्ती करते देख उनका झुकाव भी कुश्ती की ओर हो गया. जब वह छोटी थी तभी उनके पिता की हत्या हो गई थी और उनकी देखभाल का पूरा जिम्मा आ गया था उनके ताऊ महावीर फोगाट के ऊपर.

Vinesh Phogat

महावीर ने काफी अच्छे से उनकी देखभाल की और कुश्ती में भी उनकी कोचिंग की. देखते ही देखते यह खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को लोहा पूरे विश्व में मनवाने लगी. जब वह 19 वर्ष की थी तब उन्होंने अपना पहला एशियन रैसलिंग चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता. 51 किग्रा वर्ग भार में. जोकि भारत द्वारा आयोजित किए गया था. इस चैम्पियनशिप में इन्होंने जापान और काजाकिस्तान की रेसलर्स को धूल चटाया था. इसी वर्ष में ही कॉमेनवेल्थ रेसलिंग चैम्पियनशिप का आयोजन साउथ अफ्रीका में किया गया. और यहां भी इन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया. और फिर तो इनकी पदको की गाड़ी तो निकल पड़ी.

2013 के बाद आया 2014 कॉमेनवेल्थ गेम्स. जोकि, ग्लास्गो स्काटलैंड में खेला गया. 2013 तक जहां विनेश 51 किग्रा वर्गभार में रेसल कर रहीं थी तो वहीं उन्होंने 2014 कॉमेनवेल्थ गेम्स 48 वर्गभार में खेला. 71 देशों द्वारा आयोजित किए गए इस इवेंट में भारत 5वें स्थान पर रहा. जहां उसने 15 स्वर्ण, 30 रजत व 19 कांस्य पदकों के साथ कुल 64 पदक अपने नाम किया. जिसमें विनेश का भी स्वर्ण पदक शामिल था. इसी वर्ष कॉमेनवेल्थ गेम्स के बाद 2014 एशियन गेम्स में विनेश ने एक और पदक जीता रजत.

ऐसे ही कुछ ही समय में उन्होंने अपना अच्छा नाम बना लिया था. 2014 अभी खत्म ही हुआ था कि 2015 एशियन गेम्स आ गए जोकि रियो 2016 ओलंपिक के लिए क्वालीफाइंग राउंड भी था. यहां इन्होंने सिल्वर मेडल यानि रजत पदक जीता. यहां तक तो सब ठीक चल रहा था. मगर रियो ओलंपिक में लगी चोट ने उनका ओलंपिक पदक को उनसे थोड़ा सा दूर कर दिया. जहां वह अपना क्वार्टर फाइनल मुकाबला सुन यानन के खिलाफ खेली थी. अभी तक किए गए अपने प्रदर्शन में के दम पर उन्हें 2016 में ही अर्जुन पुरस्कार दिया गया था.

दो साल बाद फिर से उन्होंने एक बार वापसी की. मगर अपने पुराने वर्ग भार 48 से थोड़ा अपना भार बढ़ाकर. अब वह 50 वर्गभार में लड़ने लगीं. वर्ग भार बदला था मगर फार्म वही पुरानी थी. 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स जो गोल्ड कोस्ट में खेले गए थे वहां विनेश ने स्वर्ण पदक जीता. फिर 2018 एशियन गेम्स में जापानी रेसलर यूकी को हराकर पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं जिसने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता.

और हाल ही में वह पहली रेसलर बनीं हैं जिन्होंने 2020 टोक्यों ओलंपिक का टिकट कटवाया है.

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