1983 की जीत के बाद भारत द्वारा खेले गए 1987 व 1992 के विश्वकप पर एक नज़र

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1987 विश्वकप-

1987 व1992 के विश्वकप:-1987 विश्वकप पहली बार इंग्लैंड के बाहर खेला जा रहा था. इससे पहले खेले गए तीनों विश्वकप यानि 1975, 1979 और 1983 तीनों इग्लैंड की सरज़मी पर खेले गए थे. सरजमी बदली तो साथ ही साथ उनके स्पांसर भी बदल गए. जहाँ अभी तक प्रीडेंशियल नामक एक कम्पनी विश्वकप को स्पांसर कर रही थी तो वहीं इस बार रिलायंस इण्डस्ट्रीज ने यह जिम्मा लिया.

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गौरतलब है कि एक तो यह विश्वकप पहली बार इंग्लैंड के बाहर हो रहा था साथ ही साथ इसे एक साथ दो मुल्क यानि भारत और पाकिस्तान इस विश्वकप की मेजबानी कर रहे थे. अब अगर एक साथ दो आर्च राइवल एक साथ मेजबानी करेंगे तो मैच का मज़ा दुगना नहीं तिगुना हो जाता है. इस विश्वकप की एक और यह खास बात थी की यह विश्वकप पहली बार 60 ओवरों का न होकर 50 ओवरों का था इससे पहले खेले गए तीनों विश्वकप 60 ओवरों के थे.

अब आपको बताते है की इस विश्वकप में भारत की कैसी जर्नी रही भारत ने कितने मैच खेले किससे हारे किससे जीते और भी बहुत सारे किस्से. इतिहास के पन्नों में से आज हम आपको सबसे पहले बताएंगे कि रिलायंस विश्व कप मे भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया के बीच का मैच.

विश्व कप के ग्रुप ए के तीसरे मुकाबले में भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें आमने-सामने थीं. यह मुकाबला 9 अक्टूबर 1987 को एम ए चिदंबरम स्टेडियम में कपिल देव की कप्तानी में खेला जा रहा था. भारत ने इस मैच में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था. ऑस्ट्रेलिया की तरफ से सलामी बल्लेबाजी के लिए आए डीसी बून और जीआर मार्श. दोनों ने आते ही तेजी से बल्लेबाजी करनी शुरू की और तेज गति से रन बनाने लगे देखते ही देखते दोनों ने अपनी टीम का स्कोर 50 रनों के पार पहुंचा दिया. मार्श ने अपना अर्धशतक ठोक डाला और टीम का स्कोर 100 के पार पहुंचा दिया. भारतीय टीम के कंधे पर गिर चुके थे. भारत को पहले विकेट की तलाश थी. और वो तलाश रवि शास्त्री ने पहला विकेट लेकर पूरी की. मैच की पहली पारी 270 पर 6 विकटों पर समाप्त हुई. अब बल्लेबाजी करने की बारी थी मेजबान टीम भारत की. टीम में सलामी बल्लेबाज के रुप में गावस्कर और श्रीकांत मैदान पर उतरे और दोनों ने 50 रनों की सलामी साझेदारी निभाई. इस साझेदारी के बाद टीम मजबूत स्थिति में नज़र आ रही थी. इस मजबूत स्थिति में बल्लेबाजी अब बल्लेबाजी करने उतरे थे डेब्यू टांट खिलाड़ी नवजोत सिंह सिद्धू.

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सिद्धू ने अपनी डेब्यू पारी में ही 50 रन बना दिए. यहाँ तक तो अभी तक सब टीम के पक्ष में ही जा रहा था. टीम ने 200 रनों का आकंडा भी छू लिया सिर्फ 2 विकेटों के नुकसान पर. मगर फिर 203 के कुल स्कोर पर सिद्धू आउट हो गए और भारतीय पारी लडखड़ा गई और 269 के कुल स्कोर पर भारतीय टीम ऑल आउट हो गई. व भारत ने अपना यह मैच मात्र 1 रन से गंवा दिया.

इस प्रकार भारत की इस विश्वकप में शुरुआत हुई पहला मैच गंवाकर. मगर….. इस हार से भारत ने सबक लिया और इसके बाद भारत ने न्यूजीलैंड को 2 बार, जिम्बांवे को 2 बार और ऑस्ट्रेलिया को 1 बार हराकर ग्रुप को टॉप पर समाप्त किया. इस प्रकार भारत में ग्रुप ए में कुल 6 मैच खेले जिसमें से 5 में जीत हासिल की व सिर्फ 1 मैच 1 रन से गंवा दिया था.

वहीं ग्रुप बी में पाकिस्तान का भी भारत जैसा ही हाल था वो भी अपने ग्रुप में 6 मैचों में से 5 मैच जीती थी व सिर्फ 1 मैच वेस्टइंडीज के खिलाफ हारी थी व उसने भी अपने ग्रुप में पहला स्थान कायम रखा था. आपको बता दे कि ग्रुप ए के सारे मैच भारत की धरती पर खेले जा रहे थे व ग्रुप बी के सारे मैच पाकिस्तान की सरजमी पर.

ग्रुप स्टेज के मैचों के बाद अब बारी थी सेमीफाइनल और फाइनल की. सेमीफाइनल का पहला मैच 4 नवम्बर को ऑस्ट्रेलिया व पाकिस्तान के बीच खेला पाकिस्तान की सरजमी पर खेला जाना था. व चौथे विश्वकप का दूसरा सेमीफाइनल मैच भारत और इंग्लैंड के बीच भारत के मैदान पर खेला जाना था अब स्थिति यह थी की जो भी टीम यह सेमीफाइनल मैच जीतेगी वह सीधे फाइनल मैच कोलकाता के ईडन गार्डंस में खेलेगी.

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मगर सेमीफाइनल में भारत और पाकिस्तान दोनों अपने प्रतिद्वंदी टीमों से हार गए. जहाँ भारत को 35 रनों से इंग्लैंड के खिलाफ मुँह की खानी पड़ी तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान को 18 रनों से हार का सामना करना पड़ा.

अब दोनों मेजबान टीमें विश्वकप से बाहर हो चुकी थी. और विश्वकप फाइनल ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड को आपस में भिंडना था. यह मैच ऑस्ट्रेलिया ने 7 विकेट से जीतकर पहली बार विश्वकप अपनी झोली में डाल लिया था. यह विश्वकप ऑस्ट्रेलिया स्टीव वॉ की कप्तानी में खेल रही थी.

1992 विश्वकप-

1987 व1992 के विश्वकप:- रंग बिरंगे कपड़ों के साथ खेला जाने वाला पहला विश्वकप. विश्वकप में मिली अपार सफलताओं के बाद क्रिकेट में बदलाव आने शुरु हो चुके थे. जैसे इस विश्वकप की खास बात ये थी की यह विश्वकप पहली बार सफेद कपड़ों की बजाय रंगीन कपड़ों में खेला जा रहा था व इसी विश्वकप से खिलाड़ियों के खेल पर खास नजर रखी जा रही थी की कौन सा खिलाड़ी कैसे मैच खेल रहा है उसको मद्देनजर रखते हुए मैन ऑफ द टूर्नामेंट या कह लीजिए मैन ऑफ द सीरीज देने की शुरुआत हुई थी.

इस टूर्नामेंट के स्पॉन्सर थे बेंसन एण्ड हैज़िस. बेंसन एण्ड हैज़िस ब्रिटिश का एक सिगरेट ब्रांड है जिसने 1992 में विश्वकप टीम को स्पॉन्सर किया था. यह विश्वकप 1987 की तरह ही दो देशों द्वारा मेजबान किया जा रहा था. इस बार मेजबानी का कार्यभार संभाला ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने.

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इस विश्वकप में कुल 9 टीमों ने भाग लिया था जिसमें से टॉप4 टीमों को सेमीफाइल का टिकट मिलना था वहीं बाकी 5 टीमों को सफर आखिरी की 5 टीम होने के कारण वहीं समाप्त होना था. ऐसे में हर टीम को 8 मैच खेलने थे. मतलब प्रत्येक टीम को एक दूसरे के खिलाफ खेलने का मौका मिलना था.

इस विश्वकप में भारत ने अपना पहला मैच 22 फरवरी को पर्थ में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था. इस बार भारतीय टीम की कमान संभाल रहे थे भारतीय टीम के उभरते सितारे मोहम्मद अजरद्दीन॑. अजरद्दीन की टीम विश्वकप का अपना पहला टॉस हारकर पहले गेंदबाजी करने मैदान पर उतरे. इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 236 रन बनाए और भारत को 237 रनों का लक्ष्य दिया. भारत की तरफ से टॉप 3 गेंदबाजों ने दो-दो विकेट अपने नाम किए. जिसमें श्रीकांत, प्रभाकर व कपिल देव शामिल थे.

अब भारत को बल्लेबाजी करनी थी. आपको बता दे कि, 17 सालों के विश्वकप इतिहास में भारत पहली बार सुनील गवास्कर के बिना मैदान पर बल्लेबाजी की शुरुआत करने उतरा था. इससे पहले खेले गए 1975, 1979, 1983 और 1987 में भारत की तरफ से हमेशा सुनील गवास्कर ही भारतीय टीम की शुरुआत करने आते थे.

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लक्ष्य का पीछा करने उतरी पूरी भारतीय टीम कुल 228 रनों के कुल योग पर ऑल-आउट हो गई. और भारत विश्वकप का अपना पहला मैच कुल 9 रनोें के अन्तर से गंवा दिया था.  अब पहला मैच इतने करीबी अन्तर के बाद हारने के बाद भारत को उम्मीद थी की वह आगे अच्छा करेगी. मगर इस विश्वकप में भारत का दूसरा मैच लंका के खिलाफ बिना रिजल्ट का रहा अब भारत को अपना तीसरा मैच खेलना था गत-विजेता ऑस्ट्रेलिया के साथ. मगर भारत को यहाँ भी सिर्फ 1 रन से मुंह की खानी पड़ी. ऐसे मेंं भारत का शुरुआती 4 टीमों मेंं जगह बनाना मुश्किल होता जा रहा था. 3 मैचोंं में से 2 मैचों मेंं हार के बाद अब भारत को खेलना था पाकिस्तान के खिलाफ. पाकिस्तान के सामने आते ही टीम के खेलने का तरीका और जोश मानो सातवें आसमान पर चला गया. भारत ने यहाँ अच्छा खेल दिखाकर मैच 43 रन से अपने पाले में कर लिया. इस मैच के बाद भारत ने एक और मैच जिम्बावे के खिलाफ जीता 53 रनों से मगर इसके बाद खेले गये 3 मुकाबले विंडीज, न्यूजीलैंड और साउथ अफीका के खिलाफ हारकर विश्वकप से बाहर होना पड़ा और इस प्रकार इस टूर्नामेंट में 8 मुकाबलों में से भारत ने सिर्फ 2 मैचों में जीत हासिल की व 5 मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा.

धन्यवाद !

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