धोनी के कारण इन 5 दिग्गज़ो का अंतरराष्ट्रीय करियर जल्द हो गया खत्म

Dhoni Shortened Career of these Cricketers: महेंद्र सिंह धोनी सिर्फ भारतीय क्रिकेट में ही नहीं बल्कि विश्वक्रिकेट के लिए भी एक बहुत बड़ा नाम है, क्योंकि इस विकेटकीपर बल्लेबाज़ ने अपनी कप्तानी में भारतीय टीम को तीन आईसीसी ट्राफी जिताने के साथ टेस्ट व वनडे आईसीसी रैंकिंग में पहले स्थान पर काबिज़ किया था।

लेकिन पिछले 2 सालों में धोनी के करियर में काफी सारे उतार-चढाव देखने को मिले हैं और हाल में ही खत्म हुए आईसीसी वनडे विश्वकप के बाद उनके प्रदर्शन को देखते हुए लगातार संन्यास लेने का दबाव बनाया जा रहा है, क्योंकि अगले विश्वकप में वह भारतीय टीम का हिस्सा नहीं होंगे ये बात सभी को पता है। इससे पहले धोनी के कारण कई ऐसे विकेटकीपर भारतीय टीम में जगह नहीं बना सके क्योंकि धोनी उनमें से सबसे उपयुक्त थे, लेकिन कई और भी खिलाड़ियों का धोनी के कप्तान रहते हुए अंतरराष्ट्रीय कहा जा सकता है, कि जल्दी खत्म हो गया।

देखिए उन 5 खिलाड़ियों के बारे में जिनका करियर धोनी के कारण पहले खत्म हो गयाः

#1 वीरेंद्र सहवाग Dhoni Shortened Career of these Cricketers

धोनी की कप्तानी के शुरूआती समय में वीरेंद्र सहवाग उनके लिए एक ऐसे हथियार थे, जो विरोधी टीम को जल्द दबाव में ला सकते थे। जिस तरीके से सहवाग बल्लेबाज़ी में ओपनिंग करते हुए तेज़ी से रन बनाते थे किसी भी फार्मेट में उसे रोकना सामने वाली टीम के आसान काम नहीं था। भले ही हर बार सहवाग बड़ी पारियां खेल पाने में ना सक्षम हों लेकिन वह टीम के लिए बाकी काम को काफी आसान जरूर बना देते थे।

2011 के आईसीसी विश्वकप तक वीरेंद्र सहवाग के लिए सबकुछ अच्छा चल रहा था, लेकिन उसके बाद भारत के इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरे में सहवाग उस तरीके से अपना असर नहीं छोड़ सके जिससे उनके करियर को लेकर सारे सवाल उठने लगे।

सहवाग ने विश्वकप 2011 के बाद तीनों फार्मेट में मिलाकर 50 पारियां खेली जिसमें वह 30 के औसत से 1486 रन ही बना सके और साफ तौर पर पता चल रहा था, कि उनकी तकनीक में खामी आ रही है, जिसके बाद उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और फिर सहवाग की टीम में वापसी संभव नहीं हो सकी।

#2 गौतम गंभीर | Dhoni Shortened Career of these CricketersDhoni Shortened Career of these Cricketers

वीरेंद्र सहवाग के साथ लम्बे समय तक ओपनिंग करने वाले गौतम गंभीर का करियर एक समय धोनी की ही कप्तानी में काफी उठान पर था। 2008 से 2009 में गंभीर को रोक पाना किसी भी टीम के लिए आसान काम नहीं दिखा रहा था और इस कारण गंभीर उस समय के टेस्ट में नंबर 1 बल्लेबाज़ बन गए थे।

गंभीर का 2011 के विश्वकप फाइनल मैच में खेली गयी पारी को उतनी तवज्जो नहीं मिलती है, जितना उसे मिलना चाहिए और बाकी खिलाड़ियों की तरह गंभीर के करियर में बुरा दौर आया और 2012 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हुई वनडे सीरीज़ में धोनी ने रोटेशन पॉलीसी के तहत सचिन, सहवाग और गंभीर में से किसी 2 को अंतिम एकादश में शामिल करने का फैसला लिया।

गौतम गंभीर ने 2011 के विश्वकप के बाद सभी फार्मेट में मिलाकर 83 पारियां खेली जिसमें कुछ विराट कोहली की टेस्ट कप्तानी में भी लेकिन वह 30 के औसत से 2386 रन ही बना सके और इस कारण उन्हें टीम से बाहर करने का फैसला किया गया जिसके पीछे आज भी काफी लोगो का ये मानना है, कि धोनी अपनी टीम में गंभीर को नहीं चाहते थे।

#3 युवराज़ सिंह Dhoni Shortened Career of these Cricketers

युवराज़ सिंह जो भारतीय टीम को 28 साल के बाद दुबारा विश्वविजेता बनाने में सबसे बड़े अहम खिलाड़ी थे, उनके करियर को खत्म किये जाने के पीछे धोनी का सबसे बड़ा हाथ बताया जाता हैं, जिसमें युवराज के पिता योगराज़ सिंह लगातार इस मामले में बयान देते रहे हैं जिसमें उनके अनुसार धोनी की गंदी राजनीति के कारण युवराज का करियर इस तरह से खत्म हो गया।

युवी को 2011 के विश्वकप में शानदार प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ दी सीरीज़ का खिताब दिया गया था, लेकिन उसके बाद इस खिलाड़ी के जीवन में सबसे खराब पन्ना आया और कैंसर की बीमारी से पीडित होने के कारण युवराज़ को लम्बे समय के लिए टीम से बाहर होना पड़ा और काफी लोगो ने ये भी मान लिया था, अब यह मैच विनर फिर से मैदान में खेलते हुए शायद ही दिखे।

लेकिन युवी को हमेशा एक फाइटर के रूप में माना जाता है, और उन्होंने मैदान पर वापसी की, जिसके बाद प्रदर्शन के आधार पर उनको कई बार टीम से अंदर बाहर होना पड़ा। 2011 के विश्वकप के बाद युवी ने सभी फार्मेट में भारत के लिए 52 पारियां खेली जिसमें उन्होंने 24 के औसत से 1106 रन बनायें और इसमें से 6 पारियों में नाबाद रहने के साथ 7 अर्धशतक भी शामिल हैं वहीं गेंदबाज़ी से भी 23 विकेट हासिल किए लेकिन फिटनेस के कारण युवी को शामिल करना काफी कठिन फैसला दिखाई दे रहा था, जिसके बाद इस खिलाड़ी को टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

#4 हरभजन सिंह Harbhajan Singh

लगभग एक दशक तक ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह भारतीय टीम के प्रमुख स्पिनर गेंदबाज़ बने रहे थे और उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में अनिल कुंबले के साथ जोड़ी बनाकर भारतीय टीम को घरेलू हालात में काफी मैच में जीत दिलाई है, लेकिन हरभजन सिंह को अपने करियर के दौरान काफी सारे उतार-चढाव देखने को मिले हैं।

हरभजन के लिए 2011 विश्वकप के बाद टीम में जगह बनाना आसान काम नहीं था, क्योंकि उस समय रविचंद्रन अश्विन और प्रज्ञान ओझा से उन्हें लगातार चुनौती मिल रही थी, वहीं उस समय रवींद्र जडेजा भी एक स्पिनर के रूप में अपनी जगह टीम में बनाने की कोशिश कर रहे थे।

भज्जी को उपर लगातार अच्छे प्रदर्शन का दबाव था और वह इस कारण उम्मीद में खरा नहीं उतर पा रहे ते वहीं उनकी दूसरा गेंद में एक्शन को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे थे जिस कारण उनके लिए काफी परेशानी बढ़ चुकी थी। विश्वकप के बाद हरभजन ने सभी फार्मेट की 36 पारियों में 47 विकेट ही हासिल कर सके और इस दौरान वह एकबार भी 5 विकेट एक पारी में हासिल नहीं कर सके थे।

#5 दिनेश कार्तिक | Dhoni Shortened Career of these CricketersDinesh Karthik

दिनेश कार्तिक के मामले में कहानी थोड़ा सी विपरीत तरीके से है, तमिलनाडू से आने वाला यह विकेटकीपर बल्लेबाज़ अपनी शुरूआती करियर में एक बड़े स्टार के रूप में देखा जा रहा था और रविचंद्रन अश्विन ने इस बात को एक इंटरव्यू में भी कबूला था, कि वह कार्तिक को शुरूआती दिनों में बल्लेबाज़ी करते हुए देखना पसंद करते थे।

कार्तिक ने अपना अंतरराष्ट्रीय करियर धोनी के पहले शुरू किया था, लेकिन वह बड़े स्तर पर उम्मीदों के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर सके और इस कारण मैनेजमैंट ने धोनी को आजमाने का फैसला लिया और ये कार्तिक के लिए काफी बड़ा फैसला साबित होने वाला था, क्योंकि धोनी ने आने के बाद जिस तरह से अपने कदम टीम में जमायें उसके बाद किसी औऱ की जगह मुमकिन नहीं दिख रही थी।

जिसके बाद सभी फार्मेट में धोनी को विकेटकीपर बल्लेबाज़ के रूप में खिलाया जाने लगा और कार्तिक को इसके बाद टीम में अपनी जगह बनाने के लिए एक बल्लेबाजी में काफी सुधार करना था, क्योंकि वह विकेटकीपर के रूप में जगह नहीं बना सकते थे, जिसके बाद कार्तिक के बल्लेबाज़ के तौर पर जगह तो मिली लेकिन वह इसे पूरी तरह से भुना पाने में नाकाम ही साबित हुए।

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