कैसे बनायें कबड्डी में अपना करियर ?

कबड्डी खेल की जानकारी | How to Make Career in Kabaddi

यह अब बहुत पुरानी बात हो गयी है कि खेलने में समय व्यर्थ जाता है ,और सिर्फ पढने से ही कोई करियर बन सकता है .आज के वक़्त में खेल के क्षेत्र में मिलनें वाले धन और सम्मान के कारण प्रत्येक खिलाडी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भाग लेना चाहता है, परन्तु उस स्तर तक पहुंचनें के लिए  बहुत मेंहनत और लगन की जरुरत है . हर खेल पूर्ण अभ्यास और लगन मांगता है. कुछ किस्मत का साथ भी जरुरी है .पर यदि मन में खिलाड़ी बनने की ठान ली तो कोई रोक नहीं सकता है , खेल का नाम सोचो तो क्रिकेट ,फ़ुटबाल ,हाकी ,बेडमिन्टन आदि ही नाम दिमाग पर और जुबान पर आते . पर इनसे हट कर भी कुछ खेल है जो अब बहुत पसंद किये जाते हैं अब इसके बारे कुछ जानते हैं।

भारत सरकार की खेलो इण्डिया योजना’ के माध्यम से लोगो की रूचि खेल की तरफ बढ़ी है, खेल के क्षेत्र में सिर्फ खिलाड़ी के रूप में ही नहीं बल्कि इससे सम्बंधित अन्य क्षेत्रो में अपना बेहतर करियर बनाया जा सकता है . इसी तरह के खेलों में “कबड्डी “का नाम भी खेल में इज्जत के साथ लिया जाता है यह Kabaddi का खेल पूर्णतया भारतीय खेल  है ,या कहा जाए तो भारत ही इस खेल का जन्मदाता है तो गलत नहीं होगा।

हमारे भारतीय परिवेश में यह खेल देश के विभिन्न प्रांतो में खेला जा रहा है, कबड्डी नाम का प्रयोग प्राय: उत्तर भारत में किया जाता है, इस खेल को दक्षिण में चेडुगुडु और पूर्व में हु तू तू के नाम से भी जानते हैं। यह एक ऐसा खेल है जिसमें रेसलिंग , राग्बी दोनों खेलों का मिश्रण है ,आज के युवा वर्ग में यह खेल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. एशियाई स्तर पर पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, चीन, जापान, कोरिया आदि देशों में इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है. इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण यह है कि बिना किसी उपकरणों यानी इसके लिए कोई साधन की आवश्यकता नहीं होती है .खिलाड़ी ही इस खेल के साधन भी है और खेलने वाले भी

एक समय ऐसा भी था जब यह खेल Kabaddi बहुत कम लोकप्रिय था। यह सिर्फ देश स्तर पर या राज्य स्तर पर खेला जाता था ,पर  प्रो कबड्डी लीग आने से इसकी लोकप्रियता में इजाफा हुआ और ख़ास बात यह रही कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली प्रतिभाओं को भी इससे लाभ हुआ। आज भारत में इस खेल के करोड़ों फैन्स हैं और प्रो कबड्डी लीग की वजह से ऐसा हुआ है। प्रो कबड्डी में जाने का सपना हर एक युवा का है

और उसे पूरा करने की जुगत में भी खिलाड़ी जुटे रहते हैं। सबसे पहले फिटनेस और खेल का ज्ञान अति आवश्यक है। स्कूल प्रतियोगिताओं में कबड्डी होती है। इसके अलावा स्पोर्ट्स स्कूल्स भी इस खेल को प्राथमिकता आजकल देते हैं। वहां से निखरने के बाद ही खिलाड़ी आगे का सफर तय करने के लिए Pro Kabaddi तक पहुंचते हैं। शुरुआत स्कूली खेलों से करना सही होता है। 

आइये जाने कैसे बनाए इस में करियर

Career in Kabaddi

How to Make Career in Kabaddi :- इस खेल का जन्म भारत में ही हुआ था ,पहले यह ग्रामीण क्षेत्र पर ही खेला जाता था पर अब यह खेल लोकप्रिय होता जा रहा है . प्रो कबड्डी आने से कई युवा अब इस में करियर बनाने की सोचने लगे हैं आइये जाने कैसे बनाए इस में करियर यह खेल सीखने के लिए आपको पहले अपना मन बनाना होगा इसके बाद स्कुल से ही इसकी शुरुआत होती है इस के बाद इस खेल के सारे स्किल्स और नियम समझना बहुत जरुरी है।

खेल की पूरी जानकारी समझ कर ही आप इस खेल को समझ सकते हैं. किसी भी खेल में शरीरिक और मानसिक फिटनेस होनी बहुत जरुरी है ,स्कूल में इस खेल को सही ढंग से खेलने के बाद पहले तहसील स्तर पर ,अपने आपको साबित करना ,फिर जिले स्तर पर खेल के स्तर को बढ़ाना उसके बाद राज्य स्तर पर खेल कर एक Kabaddi खिलाड़ी प्रो कबड्डी टीम को नजर आता है ,यहाँ तक का सफ़र आसान नहीं है ,खुद की योग्यता के साथ अच्छे कोच का मिलना भी जरुरी है ,जो अपने सीखने वाले खिलाड़ी को सही मार्गदर्शन दे सके . हर स्कूल में इस खेल की शुरुआत होती है .आप यदि इस खेल में रूचि रखते हैं तो यही से इस करियर की शुरुआत होगी .फिर यहीं से आपको Pro Kabaddi लीग में स्थान मिल सकता है।

प्रो कबड्डी में भविष्य में आने वाले खिलाड़ियों के लिए ‘फ्यूचर कबड्डी हीरोज‘ नामक एक कार्यक्रम शुरू हुआ है जिसमें प्रो कबड्डी में आने वाले खिलाड़ियों को तराशने का काम किया जाता है। भारतीय कबड्डी फेडरेशन (AKFI) और मशाल स्पोर्ट्स ने 2017 में इसकी शुरुआत की। इसमें राज्य Kabaddi फेडरेशन भी जोड़े गए ताकि भविष्य में 18 से 22 साल तक के आने वाली कई युवाओं को आगे आने का मौका दिया जाए। चयनित खिलाड़ियों को उचित मापदंड और प्रो कबड्डी की उम्मीदों के अनुरूप ट्रेनिंग देने का कार्य किया जाता है। इसमें सभी तरह के प्रोफेशनल दाव-पेच सिखाए जाते हैं।

कठोर शॉर्ट लिस्ट प्रक्रिया के बाद फैज 2 के लिए 200 से 220 खिलाड़ियों को चुना जाता है। इसके बाद फैज 3 के लिए 80 से 100 खिलाड़ियों को एक महीने की कड़ी ट्रेनिंग के लिए चुना जाता है और नीलामी में ड्राफ्ट का हिस्सा बनाया जाता है। नीलामी के दौरान स्पोर्ट्स के विशेषज्ञ और विभिन्न कोच और मालिक मौजूद रहते हैं। तकनीक और अनुभव के साथ फुर्ती और फिटनेस देखकर खिलाड़ियों की बोली लगती है और उन्हें खरीदा जाता है।

Pro Kabaddi Career

टूर्नामेंट शुरू होने से पहले भी ट्रेनिंग के लिए समय रहता है। उसमें प्रोफेशनल एक्सपर्ट और कोच की मौजूदगी में अभ्यास कराया जाता है तथा सभी तरह की तैयारियों के बाद खिलाड़ियों को प्रो कबड्डी के मैदान में उतारा जाता है। कोई युवा प्रो कबड्डी में जाने की इच्छा रखता है तो बताई गई प्रक्रिया का पालन कर एक कबड्डी खिलाड़ी बन सकता है।

किसी भी खेल को सही ढंग से खेलने के लिए सही डाईट और पूर्ण अभ्यास का होना जरुरी है . बचपन से ही यदि लगन है तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है. Kabaddi के इस खेल में हर टीम में 12 खिलाड़ी होते हैं लेकिन पाले में 7 खिलाड़ी खेलते हैं, 5 खिलाड़ी सुरक्षित होते हैं जिन्हें विशेष परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के दलों में प्रत्येक दल में 7 खिलाड़ी होते हैं।

यह खेल का मैदान दो हिस्सों में बंटा होता है और यह खेल बीस बीस मिनट के अंतराल पर खेला जाता है , जिसके बीच खिलाड़ियों को पांच मिनट का हाफ- टाइम मिलता है. इस हाफ टाइम के दौरान दोनों दल अपना पाला  बदल लेते हैं. खेल में मैदान से बाहर जाने वाला खिलाड़ी आउट माना जाता है तथा मैच शुरू होने के बाद लॉबी को भी मैदान का हिस्सा ही माना जाता है। मैच में यदि 1 या 2 खिलाड़ी शेष हैं तो कप्तान को अधिकार होता है कि वह सभी खिलाड़ियों को बुला ले लेकिन उतने अंक और 2 अंक अतिरिक्त विपक्षी टीम को मिलते हैं।विपक्षी क्षेत्र में सांस तोड़ने पर रेडर को आउट करार दिया जाता है।  इस खेल में लगातार कबड्डी कबड्डी बोलते रहने होता है ,सांस टूटने पर इस शब्द के रुकने पर खिलाड़ी आउट मान लिया जाता है . इस तरह और भी कई रोचक नियम है जिसे खेलते हुए पालन किया जाता है और इस खेल को रोचक बनाया जाता है . Kabaddiमें करियर बनाने वाले इस खेल को सही ढंग से जान सकें इसलिए करियर बनाने की द्रष्टि से यह जानना भी जरुरी है ,किसी भी खेल के मुख्य नियम ही खेल के इस करियर को रोचक बनाते हैं।

कबड्डी खेलने के लिए इसकी ड्रेस भी सुविधा जनक होती है प्रत्येक खिलाड़ी बनियान व निक्कर पहनता है| साथ में जुराब व कपड़े के जूते भी पहने जाते है| प्रत्येक खिलाड़ी की बनियान पर नंबर अंकित होता है| इसके अलावा किसी भी खिलाड़ी को ऐसी वस्तु पहनने की अनुमति नहीं होती, जो किसी अन्य खिलाड़ी को चोट पहुंचा सके| इस खेल को खेलने के लिए अच्छी प्रोटीन युक्त डाईट का होना भी जरुरी है और अभ्यास का भी लगातार बने रहना जरुरी है।

इस खेल में करियर बनाने के प्रमुख कोचिंग स्थान | Career in Kabaddi

Training

इस खेल को सिखाने के कई कोचिंग संस्थान है ,दिल्ली जयपुर व देश के अन्य भाग में भी पर दिल्ली हरियाणा सीमा पर बसा एक गांव इस खेल को सिखाने के लिए बहुत प्रसिद्ध है .इस गांव का नाम है “निज़ामपुर “जहां पीढ़ियों से कबड्डी खेली जा रही है. इंचियॉन एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाली टीम के सदस्य मंजीत चिल्लर भी इसी गांव में रहते हैं।

दिल्ली और हरियाणा के बहादुरगढ़ की सरहद पर मौजूद गांव निज़ामपुर में इसी के गुर सिखाए जाते हैं.  यहां के जंगलीराम स्टेडियम,में इस खेल को खेलने के गुण सिखाये जाते हैं . अकेले निज़ामपुर में दो एशियाड स्वर्ण पदक विजेता हैं और कम से कम सात खिलाड़ी पीकेएल में खेल रहे हैं. इनके अलावा यहाँ तीन जूनियर और तीन सीनियर एशियाई चैंपियन हैं. पूरे गांव में तक़रीबन सौ युवा और बच्चे Kabaddi की प्रैक्टिस के लिए इस मैदान पर आते हैं।

पीकेएल खिलाड़ी मोहित चिल्लर कहते हैं, ”कबड्डी अब हमारे गांव में धर्म बन गई है अधिकतर बच्चे अब इसी में रूचि लेते हैं और इसी में अपना भविष्य देखते हैं .” निज़ामपुर के रहने वाले और अर्जुन पुरस्कार विजेता राकेश कुमार मानते हैं कि जैसे आईपीएल ने क्रिकेट को नई पहचान दी, उसी तरह पीकेएल ने कबड्डी की किस्मत और तस्वीर दोनों बदल दी है.उनके अनुसार , ”अब तक हमारी कबड्डी छिपी हुई थी. हम एशियन गेम्स में जाते थे. दो महीने, एक महीने तक पता चलता था कि हमें गोल्ड मिला है. अब वह प्रतिभा छिपी नहीं है. इस लीग के ज़रिए दुनिया को पता चल गया है कि कबड्डी भी कोई खेल है और जुझारू खेल है, यहाँ  जंगलीराम स्टेडियम में चारों तरफ़ 10 साल से 30-35 साल तक के युवा के पीएल की किसी न किसी टीम की टीशर्ट में दिखाई देते हैं.” गांव के प्रधान धरम सिंह बताते हैं कि  ”हमारे जन्म से पहले से हम यह शौक़ देख रहे हैं. बहुत अच्छे-अच्छे खिलाड़ी हुए हैं यहां और सभी को रोज़गार भी मिलता आया है. सरकारी नौकरी भी मिलती हैं. अब बच्चे इसे ही अपनी पढ़ाई मान रहे हैं.”

हालांकि निज़ामपुर और कबड्डी अब एक दूसरे के पर्याय बन चुके हैं पर कई दिक़्क़तें भी हैं. स्टेडियम का जिम, मैदान में बना प्रैक्टिस ट्रैक सभी खस्ताहाल हैं. ऊपर से स्टेडियम के पास धुआं उगलती फ़ैक्टरी. मगर सबसे बड़ी समस्या है खिलाड़ियों के लिए मैट का अभाव. इसकी ग़ैरमौजूदगी में उन्हें मिट्टी पर खेलना पड़ता है. जिसकी वजह से उनके प्रदर्शन पर इसका सीधा असर पड़ता है. फिलहाल भारतीय रेलवे में कार्यरत Kabaddi कोच और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी वीरेंद्र कुमार के मुताबिक़, ”मिट्टी और मैट में रफ़्तार का फ़र्क़ है, मैट पर रफ़्तार ज़्यादा आती है, तो चोट भी ज़्यादा लगती है. कई बार हमारे खिलाड़ियों को चोट लग जाती है. लेकिन अब क्या करें? सुविधा है नहीं, तो मिट्टी से ही काम चला रहे हैं. इस खेल को अधिक प्रसिद्ध बनाने के लिए सरकार को भी इसकी और ध्यान देना होगा”

academy

पलवल में भी इसका राष्ट्रीय स्तर पर एकादमी खुली है. यह अनूप कुमार कबड्डी के नाम से हैं जिसमे बेहतरीन कोच होंगे अर्जुन अवार्ड विजेता इंडियन कबड्डी टीम के कप्तान अनूप कुमार ने बताया वे जब छोटे थे तभी से गांव में कबड्डी खेलने का उन्हें शौक था. 2005 में सीआरपीएफ में स्पोर्ट्स कोटा से भर्ती हो गए। वर्ष 2006 में उन्हें पहला इंटरनेशनल मैच पाकिस्तान के खिलाफ खेलने का मौका मिला। अनूप कुमार ने कहा कि अब Kabaddi खेल पहले जैसा नहीं है, क्योंकि अब कबड्डी खेल में जहां पैसा है वहीं नाम भी होता है। इसलिए स्वस्थ्य रहने और देश में अपना देश का नाम रोशन करने के लिए ज्यादा से ज्यादा संख्या में युवा कबड्डी खेलें।

ज़ाहिर है कबड्डी में आज नाम है, शोहरत है और पैसा है Kabaddi सीखने के लिए लगन  मेहनत के साथ करियर बनाने के लिए अच्छे कोचिंग संस्थान की भी जरूरत है .इस के अलावा और भी जगह से इस खेल की कोचिंग ली जा सकती है और इस खेल में अपना करियर बनाया जा सकता है।

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