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कैप्टन कुल नही दिखेंगे नीली जर्सी मे

साल 2019 का वर्ल्ड कप भारत के लिहाज से बेहद ही बुरा था, सेमिफाइनल मे मिली हार भारत के खिलाडीयों को बुरी तरह तोड दिया था और इसका सबसे ज्यादा असर भारत के कैप्टन कुल पर पडा था और महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट जैसे दुर ही हो चुके थे। हर तरफ चर्चा थी तो धोनी की, साल 2019 से लेकर साल 2020 तक धोनी क्रिकेट के वनडे और टी-20 फॉर्मेट मे नजर नही आ रहे थे। हर श्रृंख्ला से पहले मिडीया से लेकर सोशल मिडीया तक धोनी को लेकर ही बात होती रहती थी, हांलाकी भारतीय टीम धोनी का विकल्प ढुंढने की कोशीश मे लगी हुयी थी लेकिन अपने अंदाज के अनुसार धोनी ने एक बार हर किसी को चौंकाते हुए नीली जर्सी को भी अलविदा कह दिया है।

बात करें धोनी के क्रिकेट सफर की तो साल 2004 मे बांग्लादेश के खिलाफ धोनी को खेलने का मोका मिला था और कहा जाता है की जरुरी नही इंसान अपने हर पहले मोके पर चौका मारे और धोनी के क्रिकेट सफर की शुरुआत भी कुछ इस तरह से ही हुयी थी। बांग्लादेश के खिलाफ खेल रहे धोनी अपने पहले मैच मे खाता भी नही खोल पाये थे और रिआउट हो गये थे लेकिन कहा जाता है की कोई भी व्यक्ति एक ही बार मे लिजेंड नही बन जाता है लिजेंड को तैयार होने मे समय लगता है। इसके बाद धोनी ने अपने 5वें मैच पाकिस्तान के खिलाफ 148 रन की पारी खेलकर खुद को साबित किया और दुनिया भर के क्रिकेट पंडितो को अपने बारे मे बता दिया था।

इसके बाद भारत और क्रिकेट मे एक लिजेंड भी तैयार हो रहा था, ये दौर सचिन का लेकिन इस बिच मे बिहार जैसे राज्य से उठकर एक खिलाडी दुनिया को झुकाने के लिए आगे आ चुका था और हर किसी को अपना फैन बना चुका था। अब भारतीय प्रशंसक सिर्फ सचिन ही नही धोनी को भी मैदान पर खेलते हुए देखना चाहते थे, कहा जाता है की एक हीरा को हीरा बनने के लिए कई कसौटीयों से गुजरना पता है और ऐसा ही कुछ धोनी के साथ भी हुआ था। साल 2007 भारत एकदिवासीय वर्ल्ड कप मे बुरी तरीके से हारने के बाद एक कप्तान के तलाश मे था और ऐसे मे लोगो को धोनी का कंधा सबसे बेहतर और भरोसेमंद लगा। महेंद्र सिंह दोनी के लिए ये one time opportunity की तरह था और धोनी ने इस मोके को दोनो हाथ से लपका।

साल 2007 पहली बार क्रिकेट मे टी-20 वर्ल्ड कप खेला जा रहा था, इस वर्ल्ड कप का आयोजन साउथ अफ्रिका के जमीन पर खेला जा रहा था। धोनी को एक कप्तान के तौर पर खुद को साबित करना था और उनके लिए वर्ल्ड कप सबसे बेहतर मोका मे से एक था, हम ये भी कह सकते है की धोनी और कप्तानी एक दूसरे के लिए ही बने थे और धोनी ने इस बात को साल 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप को भारत के नाम करके साबित किया। अपने 17 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर मे धोनी ने भारत को 2 वर्ल्ड कप और 1 चैपियंस ट्रॉफी जीत को तोहफा दिया, इसके अलावा महेंद्र सिंह धोनी ने कई किर्तीमान स्थापित किया और बढते समय के साथ अपने सामने दुनिया को झुकने पर मजबुर किया।

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