साल 2007 में जब जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज ने इंडियन क्रिकेट लीग की शुरुआत की थी, तो उस समय भारतीय क्रिकेट बोर्ड इस लीग से खुश नहीं था और ना ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद जिस कारण बीसीसीआई ने सबसे पहले अपने घरेलू टूर्नामेंट की प्राइज मनी को बढ़ाया और इसके साथ ही उन्होंने आईसीएल में खेलने के लिए जाने वाले खिलाड़ियों पर आजीवन प्रतिबंध करने का फैसला किया क्योंकि यह बीसीसीआई की एक विरोधी लीग के तौर पर थी।
कैसी पड़ी नींव
13 सितंबर 2007 को बीसीसीआई ने अपनी फ्रेंचाइज़ी बेस्ड टी20 लीग का ऐलान किया जिसका नाम इंडियन प्रीमियर लीग रखा गया और इसका पहला सीज़न अप्रैल 2008 में खेले जाने का फैसला किया गया। नई दिल्ली में इस लीग की शानदार ओपनिंग सेरेनमी रखी गयी और इसे शुरुआत करने के पीछे उस समय बीसीसीआई के वाइस प्रेसीडेंट ललित मोदी का विचार था।
इस लीग की शुरुआत करना आसान काम नहीं था, जिसको लेकर 7 लोगों की आईपीएल गवर्निंग काउंसिल बनाई गयी जिसमें कुछ पूर्व खिलाड़ियों को शामिल किया गया साथ नियमों को लेकर भी सबकुछ तय किया गया। इस लीग का फार्मेट इंग्लैंड में खेली जानी वाली प्रीमियर लीग और यूनाइटेड स्टेट्स में खेली जाने वाली एनबीए लीग की ही तरह था।
इसके साथ ही हर टीम को खरीदने के लिए 24 जनवरी 2008 को एक नीलामी प्रक्रिया हुई जिसमें एक फ्रेंचाइज़ी का बेस प्राइज 400 मिलियन डॉलर रखी गयी और आखिर में बैंगलोर, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, जयपुर, कोलकाता, मोहली और मुम्बई की टीमों को खरीदा गया। जिसके बाद टीमों के नाम तय कर दिए गए।
इस समय 8 टीमें IPL में खेलती हैं, जिन्हें बाकी टीमों से अपने घर और उनके मैदान पर एक-एक मैच खेलना होता है। टूर्नामेंट का शुरुआती फार्मेट राउंड रॉबिन हैं। लीग स्टेज के मैच खत्म होने के बाद टॉप की 4 टीमें प्लेऑफ के लिए क्वालीफाइ करती हैं, जिसमें पहले 2 स्थान पर रहने वाली टीमें पहले क्वालीफायर में एक-दूसरे के खिलाफ खेलने उतरती हैं, जिसमें एक टीम जीत हासिल करके सीधे फाइनल में पहुंच जाती हैं।
वहीं हारने वाली टीम को दूसरे क्वालीफायर में फाइनल में पहुंचने का एक और मौका मिलता हैं, जिसमें लीग स्टेज में तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीम एलीमिनेटर मैच में एक-दूसरे से भिड़ती हैं और जो टीम जीत हासिल करती है, उसे दूसरे क्वालीफायर में पहले क्वालीफायर में हारने वाली टीम के साथ खेलना होता है। दूसरे क्वालीफायर मैच में जीत हासिल करने वाली टीम फाइनल में अपनी जगह बनाती हैं, जहां पर उसका मुकाबला पहले क्वालीफायर में जीत हासिल करने वाली टीम के साथ होता है और जो टीम इस मैच में जीत हासिल करती है, वह उस सीज़न की विजेता टीम बनकर उभरती हैं।
खिलाड़ियों का वेतन और टीम कैसी बनती हैं
एक टीम किसी 3 तरीके से अपनी टीम में किसी खिलाड़ी को शामिल कर सकती हैं, जिसमें नीलामी प्रक्रिया के दौरान, दूसरी टीमों से उनके किसी खिलाड़ी को अपनी टीम ट्रेड के जरिए लेकर या फिर किसी खिलाड़ी की रिप्लेसमेंट के तौर पर वह किसी दूसरे खिलाड़ी को टीम का हिस्सा बना सकते हैं। जो खिलाड़ी नीलामी प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, उन्हें उनके बेस प्राइस से खरीदने के लिए नीलामी प्रक्रिया को शुरु किया जाता है।
जिन खिलाड़ियों को नीलामी प्रक्रिया के दौरान नहीं खरीदा जाता है, वह रिप्लेसमेंट के तौर पर पूरे सीज़न में उपलब्ध रहते हैं। वहीं ट्रेडिंग विंडो में उस खिलाड़ी की सहमती के तौर पर फ्रेंचाइजी अपनी टीम से उस खिलाड़ी को दूसरी टीम में भेज सकती है। IPL में 3 बार ट्रेडिंग विडों खुलती हैं, जिसमें 2 नीलामी प्रक्रिया के पहले और 1 नीलामी प्रक्रिया के बाद जो सीज़न शुरु होने से पहले तक ही रहती है। कोई भी खिलाड़ी सीज़न के बीच में ट्रेडिंग विंडो के तहत नहीं बदला जा सकता है।
किसी भी खिलाड़ी का एक टीम के साथ सिर्फ 1 साल का अनुबंध होता है, जो फ्रेंचाइज़ी उस खिलाड़ी की अनुमति लेकर 1 से 2 सालों तक बढ़ा सकती है। साल 2014 के सीज़न से खिलाड़ियों को भारतीय रुपयों में खरीदा जाने लगा क्योंकि इससे पहले यूएस डॉलर के तहत पूरी निलामी प्रक्रिया होती थी।
आईपीएल में टेलीविजन टाइमऑउट लिया जाता है, जिस कारण किसी टीम को अपने ओवर खत्म करने के लिए कोई निर्धारित समय सीमा नहीं तय की गयी है, लेकिन यदि अंपायर्स को ऐसा लगता है, कि मैच में कोई एक टीम इसका गलत लाभ उठा रही है, तो वह फाइन लगा सकते हैं। हर टीम को पारी के दौरान 2 मिनट 30 सेकेंड का एक ब्रेक मिलता है, जिसमें 6 से 9 ओवरो के बीच में गेंदबाज़ी करने वाली टीम और 13 से 16 ओवरो के बीच में बल्लेबाज़ी करने वाली टीम इस नियम का लाभ उठा सकती है।
वहीं साल 2018 के सीज़न से IPL में अंपायर डिसीजन रिव्यू सिस्टम का भी उपयोगी किया जाने लगा जिसमें हर टीम को पारी के दौरान 1 मौका मिलता है, जिसमें वह ऑन फील्ड अंपायर के फैसले को चुनौती दे सकते हैं।
IPL प्राइज मनी
साल 2019 में आईपीएल की कुल प्राइज मनी 7.2 मिलियन यूएस डॉलर थी, जिसमें सीज़न की विजेता बनने वाली टीम को 2.9 मिलियन यूएस डॉलर को वहीं उपविजेता को 1.8 मिलियन यूएस डॉलर की प्राइज मनी मिली थी। इसके अलावा तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम को 1.3 मिलियन यूएस डॉलर की प्राइज मनी मिली थी। इसके साथ ही चौथे पायदान पर रहने वाली टीम को भी 87.5 मिलियन रुपये प्राइज मनी के तौर पर मिले थे। इसके अलावा बाकी टीमों के लिए कोई भी प्राइज मनी नहीं मिली वहीं IPL के नियमों को अनुसार प्राइज मनी जीतने वाली टीम को उसकी आधी रकम को अपने खिलाड़ियों में बाटना होता है।
टूर्नामेंट सीज़न और उसके परिणाम
अभी तक कुल 13 टीमें आईपीएल का हिस्सा बन चुकी हैं, जबसे इसका पहला सीज़न खेला गया है। जिसमें मुम्बई इंडियंस की टीम ने 4 बार IPL ट्राफी को जीता है, तो वहीं चेन्नई सुपर किंग्स ने 3 बार इस ट्राफी को जीता है, वहीं कोलकाता नाइट राइडर्स ने 2 बार तो सनराइजर्स हैदराबाद, राजस्थान रॉयल्स और डेक्कन चार्जर्स ने 1-1 बार ट्राफी को जीता है। आईपीएल की इस समय गत विजेता मुम्बई इंडियंस की टीम हैं, जिसने फाइनल मैच में चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ 1 रन से जीत दर्ज करके इस खिताब को अपने नाम पर किया था।
यहां पर देखिए अभी तक के आईपीएल विजेता टीमों की लिस्ट
| साल | विजेता | रनर अप टीम | जगह | कितनी टीमों ने हिस्सा लिया | प्लेयर ऑफ दी मैच | प्लेयर ऑफ दी सीरीज़ |
| 2019 | मुम्बई इंडियंस | चेन्नई सुपर किंग्स | हैदराबाद | 8 | जसप्रीत बुमराह | आंद्रे रसल |
| 2018 | चेन्नई सुपर किंग्स | सनराइजर्स हैदराबाद | मुम्बई | 8 | शेन वॉट्सन | सुनील नारायण |
| 2017 | मुम्बई इंडियंस | राइजिंग पुणे सुपरजाएंट्स | हैदराबाद | 8 | क्रुणाल पांड्या | बेन स्टोक्स |
| 2016 | सनराईजर्स हैदराबाद | रॉयल चैलेंजर्स बैंगलुरु | बैंगलुरु | 8 | बेन कटिंग | विराट कोहली |
| 2015 | मुम्बई इंडियंस | चेन्नई सुपर किंग्स | कोलकाता | 8 | रोहित शर्मा | आंद्रे रसल |
| 2014 | कोलकाता नाइट राइडर्स | किंग्स इलेवन पंजाब | बैंगलुरु | 8 | मनीष पांडे | ग्लेन मैक्सवेल |
| 2013 | मुम्बई इंडियंस | चेन्नई सुपर किंग्स | कोलकाता | 9 | कायरन पोलार्ड | शेन वॉट्सन |
| 2012 | कोलकाता नाइट राइडर्स | चेन्नई सुपर किंग्स | चेन्नई | 9 | मनविंदर बिस्ला | सुनील नारायण |
| 2011 | चेन्नई सुपर किंग्स | रॉयल चैलेंजर्स बैंगलुरु | चेन्नई | 10 | मुरली विजय | क्रिस गेल |
| 2010 | चेन्नई सुपर किंग्स | मुम्बई इंडियंस | मुम्बई | 8 | सुरेश रैना | सचिन तेंदुलकर |
| 2009 | डेक्कन चार्जर्स | रॉयल चैलेंजर्स बैंगलुरु | जोहान्सबर्ग | 8 | अनिल कुंबले | एडम गिलक्रिस्ट |
| 2008 | राजस्थान रॉयल्स | चेन्नई सुपर किंग्स | मुम्बई | 8 | यूसुफ पठान | शेन वॉट्सन |
IPL अवार्ड्स
हर सीज़न में सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ को ऑरेंज कैप अवार्ड दिया जाता हैं, सीज़न के बीच में जो भी बल्लेबाज़ उस समय लिस्ट में सबसे अधिक रन बनाकर आगे होता है, तो वह मैच के दौरान ऑरेंज कैप पहनकर खेलने उतरता है। फाइनल मैच के बाद उस सीजन में सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी की घोषणा की जाती है और उसे ऑरेंज कैप दी जाती है।
प्रत्येक सीज़न में सबसे अधिक विकेट हासिल करने वाले गेंदबाज़ को पर्पल कैप दी जाती है। वहीं सीज़न के दौरान जो भी गेंदबाज़ सबसे अधिक विकेट लेने के मामले में उस सीज़न में नंबर 1 पर होता है, वह पर्पल कैप पहनकर मैच में खेलने उतरता है। इसके बाद फाइनल मैच खत्म होने के बाद जो भी गेंदबाज़ विकेट लेने की लिस्ट में टॉप पर होता है, उसे पर्पल कैप दी जाती है।
IPL टाइटल स्पोंसर
जब साल 2008 में आईपीएल की शुरुआत हुई थी, तो उस समय देश की सबसे बड़ी रियल इस्टेट डेवलेपर कंपनी डीएलफ टाइटल स्पोंसर थी, जिसने 29 मिलियन यूएस डॉलर की बोली लगाकर 2012 तक के टाइटल स्पोंसरशिप को जीता था। साल 2012 का सीज़न पूरा होने के बाद पेप्सी आईपील का टाइटल स्पोंसर बन गया जिसमें पेप्सी ने 57 मिलियन यूएस डॉलर की बोली लगाकर अगले 5 सीज़न के लिए टाइटल स्पोंसरशिप को अपने नाम पर किया था।
लेकिन अक्टूबर 2015 में पेप्सी कंपनी ने अपने इस अनुंबध को 2 सीज़न के बाद ही खत्म कर दिया जिसके पीछे IPL में फिक्सिंग प्रकरण आना था, जिस कारण कंपनी की छवि धूमिल हुई थी। इसके बाद वीवो ने 27 मिलियन यूएस डॉलर की बोली के साथ स्पोंसरशिप को अपने नाम कर लिया और जून 2017 में वीवो ने अगले 5 साल 2018 से लेकर 2022 तक के टाइटल स्पोंसरशिप को भी 320 मिलियन यूएस डॉलर की बोली लगाकर अपने नाम कर लिया।
यहां पर देखिए अभी तक आईपीएल में टाइटल स्पोंसर के बारे में
| स्पोंसर | समय | स्पोंसरशिप फीस |
|---|---|---|
| डीएलएफ | 2008–2012 | 29 मिलियन यूएस डॉलर |
| पेप्सी | 2013–2015 | 34 मिलियन यूएस डॉलर |
| वीवो | 2016–2017 | 27 मिलियन यूएस डॉलर |
| 2018–2022 | 320 मिलियन यूएस डॉलर |
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