आखिर, खेलों की शुरुआत कहां से हुई? ओलंपिक कब से शुरु हुआ? खेलों या ओलंपिक का फायदा क्या था? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके उत्तर मिलना मुश्किल है. मगर जानना तो था ही. कहां और क्यों शुरु हुआ. इस पहेली को सुलझाने के लिए हमने किताबें पढ़ी, न्यूज़ खंगाली, आर्टिकल्स पढ़े. इसकी पूरी रिसर्च के बाद कुछ-कुछ बाते समझ आईं.
प्राचीन काल में शांति के समय योद्धाओं के बीच प्रतिस्पर्धा के साथ खेलों का विकास हुआ. दौड़, मुक्केबाजी, कुश्ती और रथों की दौड़ सैनिक प्रशिक्षण का हिस्सा हुआ करते थे. इनमें से सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले योद्धा प्रतिस्पर्धी खेलों में अपना दमखम दिखाते थे. प्राचीन ओलंपिक खेलों का आयोजन 1200 साल पूर्व योद्धा-खिलाड़ियों के बीच हुआ था. हालांकि ओलंपिक का पहला आधिकारिक आयोजन 776 ईसा पूर्व में हुआ था, जबकि आखिरी बार इसका आयोजन 394 ईस्वी में हुआ.
पहले आधुनिक ओलंपिक खेल यूनान की राजधानी एथेंस में 1896 में आयोजित किए गए. तमाम सुविधाओं की कमी, आयोजन की मेजबानी की समस्या और खिलाड़ियों की कम भागीदारी-इन सभी समस्याओं के बावजूद धीरे-धीरे ओलंपिक अपने मक़सद में क़ामयाब होता गया.
एथेंस ओलंपिक खेलों में सिर्फ़ 14 देशों के 200 लोगों ने 43 मुक़ाबलों में हिस्सा लिया. 1896 के बाद पेरिस को ओलंपिक की मेजबानी का इंतज़ार नहीं करना पड़ा और उसे 1900 में मौक़ा मिल ही गया. पेरिस में महिला खिलाड़ियों की संख्या सिर्फ़ 20 थी. पेरिस में ओलंपिक आयोजित तो हुए लेकिन वहाँ एथेंस जैसा उत्साह देखने को नहीं मिला. 1904 के सेंट लुई ओलंपिक के बाद अमेरिकी खिलाड़ियों का दबदबा ट्रैक एंड फ़ील्ड मुक़ाबलों में बढ़ता गया. शुरुआत में तो ट्रैक एंड फ़ील्ड मुक़ाबलों में सिर्फ़ अमेरिकी खिलाड़ी ही भाग लेते थे.
लंदन में पहली बार ओलंपिक आयोजित हुए 1908 में. पहली बार खिलाड़ियों ने अपने देश के झंडे के साथ स्टेडियम में मार्च पास्ट किया. लेकिन इसी ओलंपिक में अमेरिकी खिलाड़ियों ने जजों पर आरोप लगाया कि वे अपने देश का पक्ष ले रहे हैं. 1912 में स्टॉकहोम में ओलंपिक हुए और फिर विश्व युद्ध की छाया भी इन खेलों पर पड़ी. विश्व युद्ध के बाद एंटवर्प ओलंपिक 1920 में आयोजित हुआ.
दूसरे विश्व युद्ध के पहले बर्लिन में 1936 में ओलंपिक आयोजित हुआ था. इस समय तक ओलंपिक में हिस्सेदारी बढ़ गई थी. सम्मान बढ़ गया था. लेकिन विश्व राजनीति का असर भी खेलों पर देखने को मिला. विरोध हुए और बँटी हुई दुनिया का असर खेल के मैदान पर भी पड़ा.
ओलंपिक में भारत का प्रदर्शन–
ओलंपिक में भारत ने सबसे पहले 1900 में, एकमात्र खिलाड़ी नार्मन प्रिजार्ड (एंग्लो इंडियन) के साथ भाग लिया, जिसने एथलेटिक्स में दो रजत पदक जीते थे. 1920 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में देश ने पहली बार एक टीम भेजी और उसके बाद से हर ग्रीष्मकालीन खेलों में भाग लिया है. 1964 से शीतकालीन ओलंपिक खेलों में भी भारत ने कई बार भाग लिया है 2016 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक शुरु होने तक भारत के खाते में कुल 26 पदक थे, जो कि सभी ग्रीष्मकालीन खेलों में जीते गए, शीतकालीन खेलों में पदक जीतने में भारत को अभी तक सफलता नहीं मिली है. 1920 और 1980 तक एक लंबे समय तक ओलंपि में भारत की राष्ट्रीय हॉकी टीम का दबदबा बना रहा. इस बीच हुए हुए 1 खेलों में से भारत ने 11 पदक जीते जिनमें 8 स्वर्ण पदक थे और 1928-1956 तक छह स्वर्ण पदक लगातार जीते थे.
पिछले दो शीतकालीन ओलंपिक (2012 व 2016) में भारत के कुल खिलाड़ी–
2012 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में 83 सदस्यीय भारतीय दल ने भारत की अगुवाई की थी जिसने भारत के लिए कुल 6 पदक जीते थे. व 2016 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में 118 सदस्यीय टीम प्रतिस्पर्धा में शामिल थे.
2020 ओलंपिक की कैसी हैं तैयारियां–
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने 2020 में जापान की राजधानी टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए 5 नए खेलों को जोड़ा है. जिसमें बेसबॉल, सॉफ्टबॉल, कराटे, स्केटबोर्ड और सर्फिंग हैं. वर्ष 2008 बीजिंग ओलंपिक में भी बेसबॉल और सॉफ्टबॉल को शामिल किया गया था और इस बार फिर इस खेल को ओलंपिक खेलों का हिस्सा बनाया गया है.
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