One Day Cricket ke Khatarnak Khiladi: Cricket जब शुरू हुआ था, तो उस समय इसे सिर्फ एक फार्मेट में ही खेला जाता था, लेकिन वक्त बढ़ने के साथ इसमें बदलाव भी देखने को मिला और Cricket को रंगीन कपड़ो में भी खेला जाने लगा। 70 के दशक में इसको लेकर पहला कदम कैरी पेकर ने उठाया था, वह ऑस्ट्रेलिया के बड़े बिजनेसमैन थे, जिन्होंने इस खेल में भी अपना बिजनेस देखा जिस कारण वनडे Cricket का उदय हुआ।
काफी कम ही लोगो को इस बात का विश्वास होगा कि, टेस्ट Cricket 60 और 70 के दशक में काफी पसंद किया जाता था, जिस कारण वनडे Cricket के सफल होने के काफी कम ही चांस दिख रहा था, लेकिन चीज़ो में काफी तेज़ी के साथ बदलाव आया और वनडे Cricket ने धीरे-धीरे खुद के पांव जमाने शुरू कर दिए।
यह फार्मेट आते ही एक दिन में भले ही सफल नहीं हो सकता था, लेकिन जैसे-जैसे वनडे Cricket आगे बढ़ा तो काफी सारे ऐसे खिलाड़ी निकलकर सामने आये जिन्होंने अपने दम पर इस फार्मेट को सफल बनाने में अहम भूमिका अदा करने लगे। आज हम आपको 10 ऐसे खिलाड़ियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंन वनडे Cricket को एक अलग मुकाम देने में अहम भूमिका अदा की।
#10 महेंद्र सिंह धोनी | Mahendra Singh Dhoni
करियर:
मैच – 350, रन – 10773, औसत – 50.58, सर्वोच्च स्कोर – 183 नाबाद, शतक – 10, अर्धशतक – 73
जब भी भारतीय टीम मुश्किल में दिखाई देती थी, तो भारत के पूर्व राष्ट्रपति ड़ॉ एपीजे अब्दुल कलाम अपने दोस्त एसपी सिंह से कहते थे, कि चिंता मत करो अभी कप्तान धोनी आकर सबकुछ सही कर देंगे। धोनी ने खुद की पहचान दबाव के समय में भी शांत रहते हुए टीम को मुश्किल भरे हालात से निकाले के रूप में बनाकर रखी हुई थी। महेंद्र सिंह की कहानी हमेशा उनका बल्ला बताता है, जिसे देश ही नहीं बल्कि विदेशी जमीन पर कोई भी Cricket फैन कभी भी नहीं भूल सकता है।
नंबर 5 पर बल्लेबाज़ी करते हुए धोनी ने अपने वनडे करियर में लगभग 10000 से भी उपर रन बना चुके हैं। अपने 6 साल की कप्तानी में धोनी ने भारत को तीन आईसीसी टूर्नामेंट जितावाए जिसमें सबसे बड़ा योगदान धोनी की कप्तानी में जो देखने को मिला वह भारतीय टीम फील्डिंग में एक अलग ही टीम मैदान में दिखने लगी। अपनी कप्तानी में धोनी ने कुछ कड़े कदम जरूर उठाये जिसको लेकर उन्हें आलोचना का शिकार जरूर होना पड़ा लेकिन वह फिर भी अपने फैसले पर डटे रहे, जो बाद में टीम के लिए काफी उपयोगी भी साबित हुए।
38 साल के धोनी भले ही अब अपने करियर के अंत पर हो लेकिन विकेट के पीछे जिस तरह से अभी भी वह तेज़ी दिखाते हैं, उसे कई युवा विकेटकीपर भी उनसे काफी पीछे दिखते हैं। धोनी के संन्यास के बाद भारतीय टीम को ही नहीं बल्कि Cricket जगत को भी एक बड़ा नुकसान होगा जिसे लम्बे समय तक भर पाना सभी के लिए मुश्किल भरा होने वाला है।
#9 एडम गिलक्रिस्ट | Adam Gilchrist
करियर:
मैच – 287, रन – 9619, औसत – 35.89, स्ट्राइक रेट – 96.94, शतक – 16, अर्धशतक – 55
क्लास और आक्रामकता का एक भरपूर मिश्रण इस खिलाड़ी में देखने को मिलता था, ऑस्ट्रेलिया टीम के लिए लगातार तीन विश्वकप 1999 से 2007 के बीच जिताने में एडम गिलक्रिस्ट ने काफी अहम योगदान दिया था। गिलक्रिस्ट ने खुद की पहचान बड़े मैच के खिलाड़ी के रूप में बनायी हुई थी और उन्होंने तीनों ही विश्वकप के फाइनल मैच में 50 रनों से अधिक पारी खेली थी, जो विश्वकप के इतिहास में अभी तक ऐसा करने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं।
अपने खेल के दौरान गिलक्रिस्ट किसी भी तरह की दया अपने बल्ले से गेंदबाज़ो के खिलाफ नहीं दिखाते थे और इसी कारण पूरे करियर में उनका स्ट्राइक रेट 96.94 का रहा जो वनडे Cricket में 9000 से अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ियों में एबी डीविलयर्स के बाद दूसरा सबसे शानदार हैं।
विकेट की पीछे भी गिलक्रिस्ट काफी कारगर दिखते थे और एक विकेटकीपर के तौर पर तीनों ही फार्मेट में कुल 905 डिसमिसल गिलक्रिस्ट ने किए हैं, जिस कारण वह काफी लोगों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं थे।
#8 जैक कैलिस | Jacques Kallis
करियर:
मैच – 328, रन – 11579, औसत – 44.36, शतक – 17, अर्धशतक – 86, विकेट – 276, गेंदबाज़ी औसत – 31.79
One Day Cricket ke Khatarnak Khiladi: दक्षिण अफ्रीका टीम के लिए लम्बे समय तक एक मजबूत स्तंभ के रूप में रहने वाले ऑल टाइम महान ऑलराउंडरो की लिस्ट में शामिल जैक कैलिस को वनडे Cricket के महान खिलाड़ियों में से एक माना जाता है, जब से कैलिस ने अंतरराष्ट्रीय Cricket से संन्यास लिया है, उसके बाद से अभी तक अफ्रीका टीम उनकी जगह को भर नहीं सकी है।
ब्रायन लारा, राहुल द्रविड की तरह ही कैलिस भी अपने पूरे करियर में एकबार भी विश्वकप नहीं जीत सके लेकिन ऐसे खिलाड़ियों को अपने करियर को बताने के लिए किसी टाइटल की जरूरत नहीं होती है। आज के समय में काफी लोगो ने सर गैरी सोबर्स को भले ही खेलते हुए नहीं देखा हो लेकिन यदि वह दायें हाथ के बल्लेबाज़ी होते तो कैलिस की तरह ही बल्लेबाज़ी करते होते।
साल 2014 में कैलिस ने अपनी शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर को विराम देने का फैसला लिया और भले ही उनकी जगह को अभी तक ना भरा जा सका हो लेकिन लेकिन खेल अपने समय के साथ आगे बढ़ता गया।
#7 सनथ जयसूर्या | Sanath Jayasuriya
करियर:
मैच – 445, रन – 13430, बल्लेबाज़ी – 32.36, स्ट्राइक रेट – 91.20, सर्वोच्च स्कोर – 189, शतक – 28, अर्धशतक – 68, विकेट – 329, गेंदबाज़ी औसत – 36.75
जब भी सनथ जयसूर्या बल्लेबाज़ी करने के लिए मैदान में उतरते थे, तो ऐसा लगता था, कि कोई सैनिक अपने देश के लिए सीमा पर लड़ने के लिए उतरा हो और बंदूक की जगह पर उसके हाथ में बल्ला होता है, जिससे वह सामने वाली टीम के गेंदबाज़ो के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं साबित होता है। जयसूर्या जिस तरीके की आक्रामक बल्लेबाज़ी करते थे, उससे टीम के बाकी बल्लेबाज़ो से दबाव काफी कम हो जाता था।
वनडे Cricket में शुरूआती ओवरो में तेज़ी के साथ रन बनाने का दौर जयसूर्या ने ही शुरू किया था, जिसके बाद बाकी टीमों ने भी इस पर काफी काम किया। जयसूर्या जिस तरह से खेलते थे, उस समय उनका तोड़ निकालना किसी भी टीम के लिए आसान काम नहीं था।
बल्लेबाज़ी के अलावा जयसूर्या की बायें हाथ की स्पिन गेंदबाज़ी टीम के लिए काफी काम आती थी और इसी कारण वनडे Cricket में जयसूर्या ने 300 से अधिक विकेट अपने नाम पर किए हैं। जयसूर्या के समय टीम ने जहां 1996 का विश्वकप अपने नाम पर किया तो वहीं विश्व Cricket में टीम को अलग पहचान भी मिली जिसे उसके घरेलू हालात में हराना किसी भी बड़ी टीम के लिए आसान काम नहीं दिखता था।
#6 मुथैया मुरलीधरन | Muttiah Muralitharan
करियर:
मैच – 350, विकेट – 534, गेंदबाज़ी औसत – 23.08, 5 विकेट एक मैच में – 10, सबसे शानदार गेंदबाज़ी एक मैच में – 30 रन देकर 7 विकेट
ऑल टाइम लेजेंड में श्रीलंका से आने वाले ऑफ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन का नाम हमेशा शामिल किया जाएगा, जिन्होंने स्पिन गेंदबाज़ी में एक अलग ही मुकाम हासिल किया। 1996 के विश्वकप में अर्जुन रणतुंगा की कप्तानी में पहली बार खेलने वाले युवा मुरलीधरन ने अपने पहले विश्वकप का अंत 7 विकेट के साथ किया जिसमें उनका इकॉनमी रेट 4 से भी कम का था।
अपने पूरे करियर में मुरलीधरन को गेंदबाज़ी एक्शन के कारण काफी विवादो का सामना करना पड़ा, लेकिन इस खिलाड़ी ने कभी हार नहीं मानी और हमेशा एक चैम्पियन खिलाड़ी की तरह वापसी की। मुरलीधरन ने वनडे के साथ टेस्ट Cricket में भी कमाल दिखाया है। साल 2011 में जब इस खिलाड़ी ने अंतरराष्ट्रीय Cricket को अलविदा कहा तो वनडे Cricket में उनके नाम पर 534 विकेट थे।
मुरलीधरन सिर्फ अपनी गेंदबाज़ी के लिए एक अलग खिलाड़ी ही नहीं थे, बल्कि उनका दिमाग जिस तरह से सामने वाले बल्लेबाज़ को पढ़ता था, वह भी उन्हें एक सफल गेंदबाज़ बनाता है। संन्यास लेने के बाद भी मुरलीधरन ने Cricket से जुड़े रहने का फैसला लेते हुए कई टीमों के लिए मेंटर की भी भूमिका अदा कर रहे हैं।
#5 कुमार संगकारा | Kumar Sangakkara
करियर:
मैच – 404, रन – 14235, औसत – 41.98, शतक – 25, अर्धशतक – 93, सर्वोच्च स्कोर – 169
यदि आप बायें हाथ के ऑल टाइम क्लास बल्लेबाज़ो की एक लिस्ट बनायेंगे तो उसमें श्रीलंका टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज़ विकेटकीपर बल्लेबाज़ कुमार संगकारा का नाम जरूर शामिल होगा। अर्जुन रणतुंगा और अरविंद डिसिल्वा जहां पर श्रीलंकन Cricket टीम को छोड़कर गए थे, वहां से संगकारा और महेला जयवर्धने ने मिलकर टीम को और आगे लेकर जाने का काम किया है।
एडम गिलक्रिस्ट ने जिस तरीके से साबित किया था, कि एक विकेटकीपर भी बल्लेबाज़ी में टीम के लिए काफी काम आ सकता है उसी कड़ी को संगकारा ने एक कदम और आगे लेकर जाते हुए टीम के सबसे महत्तवपूर्ण बल्लेबाज़ बनकर उभरे। संगकारा ने श्रीलंका टीम के लिए वनडे, टेस्ट और टी20 तीनों में ही कप्तानी का भार उठाया है औऱ वह वनडे व टेस्ट में श्रीलंका के लिए सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ हैं।
साल 2011 के विश्वकप में संगकारा की कप्तानी में टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया था, लेकिन उन्हें वहां पर भारत से हार का सामना करना पड़ा था। जब भारतीय टीम विश्वकप जीतने की खुशी मना रही थी, तो वहीं पीछे खड़े संगकारा मुस्कुरा रहे थे, जो खिलाड़ी के बड़े कद को दर्शाता है।
करियर:
मैच – 238, रन – 11406, औसत – 59.72, शतक – 42, अर्धशतक – 54, सर्वोच्च स्कोर – 183
One Day Cricket ke Khatarnak Khiladi: वर्तमान युग में वनडे Cricket के महान खिलाड़ियो की गिनती की जाएगी तो उसमें भारतीय टीम के वर्तमान कप्तान विराट कोहली का नाम सबसे पहले आएगा। जिस तरीके से लिमिटेड ओवरो में विराट कोहली रन बनाते हैं, उसे देखकर हर कोई हैरान हो जाता है। अभी भी कोहली के पास 6 से 7 साल का Cricket बचा हुआ है, जिसके बाद वह लिमिटेड ओवरो में सभी को रिकॉर्ड को तोड़कर अपने नाम भी कर सकते हैं।
अपनी बल्लेबाज़ी में विराट जितने रन बाउंड्री से नहीं बनाते है, उससे कहीं अधिक वह दौड़कर बना लेते हैं और अपने 8 साल के करियर में कोहली ने काफी रिकॉर्ड्स को तोड़कर अपने नाम पर कर लिया है।
काफी लोगों का मानना है, कि कोहली जिस आक्रामकता के साथ खेलते हैं, वह उन्हें आगे लेकर जाने में सबसे अधिक योगदान देता है। जिस तरीके से सचिन तेंडुलकर 90 के दशक में अकेले अपने दम पर टीम का भार लेकर चलते थे, ठीक उसी तरह कोहली वर्तमान में करते हुए दिख रहे हैं।
#3 वसीम अकरम | Wasim Akram
करियर:
मैच – 356, विकेट – 502, गेंदबाज़ी औसत – 23.52. सबसे शानदार गेंदबाज़ी – 15 रन देकर 5 विकेट, 5 विकेट एक पारी में – 6 बार, वनडे रन – 3717
एक युवा लम्बे कद का तेज़ गेंदबाज़ जिसे पाकिस्तान 1992 की विश्वकप टीम में इमरान खान के साथ गेंदबाज़ी करनी थी और इस गेंदबाज़ ने उस विश्वकप का अंत सबसे अधिक विकेट हासिल करने वाले गेंदबाज़ के रूप में किया। जब पाकिस्तान ने पहली बार विश्वकप के खिताब को जीता था, तो उसके बाद वसीम अकरम सभी के लिए एक प्रेरणा के स्वरूप बन चुके थे।
अपने पूरे करियर के दौरान वसीम अकरम के साथ उनके जोड़ीदार वकार युनूस की साझेदारी किसी भी विपक्षी बल्लेबाज़ी के लिए खेलना आसान काम नहीं था। अकरम पहले ऐसे गेंदबाज़ थे, जिन्होंने वनडे Cricket में 500 विकेट पहली बार हासिल किए।
जब विसडन ने अपनी ऑल टाइम महान खिलाड़ियों की लिस्ट पहली बार जारी की थी, तो उसमें वसीम अकरम को वनडे का सबसे महान गेंदबाज़ बताया गया था। अपने करियर में डायबटीज़ की बिमारी से पीडित होने के बावजूद अकरम हमेशा टीम के लिए एक योद्धा के रूप में ही सामने आये हैं।
#2 रिकी पोंटिंग | Ricky Ponting
करियर:
मैच – 375, रन – 13704, औसत – 42.03, शतक – 30, अर्धशतक – 82, सर्वोच्च स्कोर – 164
एक महान लीडर और तकनीकी रूप से सक्षम बल्लेबाज़ रिकी पोंटिंग ने अपने पूरे करियर में उन सभी चीज़ो को हासिल किया जो एक खिलाड़ी अपना अंतरराष्ट्रीय करियर को शुरू करते हुए सोचता है। विश्वकप में 2 बार पोंटिग की कप्तानी में टीम ने जीत हासिल की।
मार्क टेलर की कप्तानी में अपने करियर की शुरूआत करने वाले तस्मानिया के रिकी पोंटिंग ने स्टीव वॉ की कप्तानी में एक बड़े सुपरस्टार खिलाड़ी के रूप में बन चुके थे। वॉ के संन्यास लेने के बाद पोंटिंग ने टीम को आगे लेकर जाने का जिम्मा संभाला।
जिस आक्रामकता के साथ पोंटिग खेलते थे, उससे विपक्षी टीम पहले से ही दबाव में दिखती थी, भले ही सर डॉन ब्रैडमैन ऑस्ट्रेलिया के सबसे महान खिलाड़ी हो, लेकिन वनडे में पोंटिंग की महानकता को कोई ऑस्ट्रेलियाई कभी छू नहीं सकेगा।
#1 सचिन तेंडुलकर | Sachin Tendulkar
करियर:
मैच – 463, रन – 18426, औसत – 44.83, शतक – 49, अर्धशतक – 96, सर्वोच्च स्कोर – 200, विकेट हासिल किए – 154
One Day Cricket ke Khatarnak Khiladi: यदि किसी ने वनडे Cricket को सही मायने में एक अलग पहचान विश्व स्तर पर दिलाने का काम किया है, तो वह कोई और नहीं मास्टर ब्लास्टर सचिन रमेश तेंडुलकर हैं, जो वनडे Cricket के ऑलटाइम महान बल्लेबाज़ हैं। लगभग 22 सालों तक सचिन ने अकेले अपने कंधो पर पूरी टीम का भार लेकर चले हैं, जिसके बाद 2011 के विश्वकप में भारतीय टीम के जीतने के बाद कोहली ने कहा भी था, कि जो उन्होंने देश के लिए किया है, उसे चुकाने का इससे बेहतर मौका नहीं हो सकता था।
सीधे बल्ले से छक्का मारना, अपर कट थर्ड मैन से उपर और तेज़ गेंदबाज़ो के खिलाफ आगे बढ़कर शॉट खेलना ये सारे शॉट्स सचिन से पहले किसी ने भी Cricket में नहीं खेले थे। सचिन के खेल के कारण ही भारत में बिजनेस करने वाली कंपनियों ने भी इसमें पैसे लगाने लगे।
सचिन एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्हें खेल में उनके योगदान को देखते हुए भारत रत्न से नवाज़ा गया है। सचिन ने ही पहली बार वनडे में 200 रनों की पारी खेली थी, जिसे सोच पाना शायद किसी भी बल्लेबाज़ के लिए आसान काम नहीं था, सभी Cricket फैंस के दिलो में उनकी यादें हमेशा ताज़ा रहने वाली हैं।
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