2000 के बाद से क्रिकेट खेलने वाले हर देश ने अपनी अंडर 19 क्रिकेट को लेकर भी खासा ध्यान देने लगे और भारत जहां क्रिकेट के हर एक इवेंट को पूरी तरह से एंजॉय किया जाता है और इसी कारण युवा खिलाड़ी इस स्टेज़ का लाभ भी उठाना चाहते हैं। भारत में जिस तरीके से क्रिकेट का पूरा स्ट्रक्चर तैयार किया गया है उसकी तारीफ हर जगह होती है और इसी कारण आईसीसी अंडर19 विश्वकप जो 12 बार हुआ उसे भारतीय टीम ने 4 बार जीता है।
अंडर19 में खेलने वाले कुछ भारतीय खिलाड़ियों ने बाद में प्रमुख टीम के लिए भी शानदार खेल दिखाते हुए एक दिग्गज़ खिलाड़ी बने और इसमें युवराज़ सिंह, वीरेंद्र सहवाग और विराट कोहली जैसे नाम शामिल हैं। इन खिलाड़ियों ने अपने अंडर 19 के प्रदर्शन को ही आगे लेकर जाने का काम किया और इन्हीं में से कुछ खिलाड़ी ऐसे थे, जिन्होंने अंडर19 में साथ खेलने के अलावा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी एक साथ खेला।
यहां पर देखिए भारतीय टीम के उन 5 खिलाड़ियों की जोडियों के बारे में जिन्होंने अंडर19 विश्वकप के बाद भारतीय टीम के लिए भी एक साथ खेला।
#1 अंबाती रायडू और शिखर धवन (2004) | Ambati Rayudu and Shikhar Dhawan (2004)
साल 2004 में खेलने वाली भारतीय अंडर19 टीम में खेलने वाले खिलाड़ियों में से बाद में सबसे अधिक 7 ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टीम के लिए खेलते हुए नजर आये थे। बांग्लादेश में खेले गए इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने सेमीफाइनल तक शानदार प्रदर्शन किया था, जहां पर उन्हें सेमीफाइनल में पाकिस्तान के हाथो हार कर बाहर होना पड़ा था। इस अंडर19 विश्वकप में शिखर धवन ने सबसे अधिक ध्यान खीचा था, जिन्होंने 7 पारियों में तीन शतक लगाने के साथ 84 के औसत से 505 रन बनाकर पूरे टूर्नामेंट में सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी थे।
इसी टीम के दूसरे खिलाड़ियों को लेकर बात करी तो उसमें अंबाती रायुडू, सुरेश रैना, दिनेश कार्तिक, आरपी सिंह, रोबिन उथप्पा शामिल थे। रायडू और चेन्नई सुपर किंग्स में उनके साथ खिलाड़ी सुरेश रैना के लिए भी टूर्नामेंट अच्छा रहा था, जिसमें दोनों ने 237 और 247 रन बनाये थे। इन सभी खिलाड़ियों में से दिनेश कार्तिक को सबसे पहले 2004 में वनडे में डेब्यू करने का मौका मिला और इसके एक साल के बाद रैना और आरपी सिंह को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिला।
उपरी क्रम में उस समय काफी मजबूती होने के कारण धवन को लम्बा इंतजार करना पड़ा और साल 2010 में उन्हें अपना पहले वनडे खेलने का मौका मिला लेकिन 2013 की चैंपियंस ट्राफी में किए गए शानदार प्रदर्शन के बाद इस खिलाड़ी ने पीछे मुडकर नहीं देखा। 2013 और 2017 में खेली गए चैपिंयंस ट्राफी में धवन टूर्नामेंट में सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ थे। वहीं अंबाती रायडू को भी इससे लम्बा इंतजार करना पड़ा अपना पहला वनडे खेलने के लिए। साल 2013 में उन्हें जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे सीरीज़ में डेब्यू करने का मौका मिला। इन सभी खिलाड़िंयो में सिर्फ धवन की ही जगह वनडे में अभी तक पक्की है, जबकि आरपी सिंह और रायडू ने संन्यास ले लिया तो वहीं रैना, कार्तिक और उथप्पा टीम से बाहर चल रहे हैं।
#2 विराट कोहली और अभिनव मुकुंद (2008) | Virat Kohli and Abhinav Mukund (2008)
2008 में आईसीसी अंडर19 विश्वकप में भारतीय टीम युवा विराट कोहली की कप्तानी में खेलते हुए इस खिताब पर दूसरी बार कब्ज़ा किया था। इस टीम में भी कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी शामिल थे और कोहली ने 47 के औसत से 235 रन बनाने के साथ टूर्नामेंट में तीसरे सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ थे।
विराट कोहली आज के समय में एक सुपरस्टार की तरह बन चुक हैं और तीनों ही फार्मेट में कमान की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। कोहली अभी तक अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 11000 से अधिक रन वनडे में और 6000 से अधिक रन टेस्ट में बना चुके हैं और बल्लेबाज़ी करते हुए हर रिकॉर्ड को इस तरह से तोड़ रहे जैसे वह उनके बायें हाथ का खेल हो।
कोहली के अलावा इस अंडर19 टीम में उनके साथ रवींद्र जडेजा, मनीष पांडे, सिधार्थ कौल, अभिनव मुकुंद और सौरभ तिवारी शामिल थे। जडेजा ने आगे जाकर अपनी जगह भारतीय टीम में पक्की कर ली लेकिन दूसरे खिलाड़ियों को अधिक मौके भारतीय टीम से खेलने का नहीं मिला।
#3 पार्थिव पटेल और इरफान पठान (2002) | Parthiv Patel and Irfan Pathan (2002)
2002 में खेले गए अंडर19 विश्वकप में भारतीय टीम से खेलने वाले एक और प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों में से एक टीम थी। भले ही टीम इंडिया इस विश्वकप में फाइनल तक ना पहुंची हो लेकिन इरफान पठान और पार्थिव पटेल भी इस टीम का हिस्सा थे।
पार्थिव पटेल ने जब साल 2002 में अपना पहला टेस्ट मैच खेला था, तो वह उस समय डेब्यू करने वाले सबसे युवा विकेटकीपर बल्लेबाज़ थे, लेकिन लम्बे समय तक पटेल टीम में अपनी जगह को पक्का नहीं कर सके और धोनी के टीम में आने के बाद वह एक बैकअप कीपर के तौर पर ही रह गए।
वहीं अंडर19 टीम में पार्थिव के साथी खिलाड़ी इरफान पठान का करियर काफी शानदार रहा और पठान ने साल 2003 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट में डेब्यू किया था। इरफान भारतीय टीम के लिए टेस्ट में हैट्रिक लेने वाले दूसरे गेंदबाज़ बने, इसके अलावा साल 2007 के टी20 विश्वकप के फाइनल में इरफान को प्लेयर ऑफ दी मैच का खिताब भी दिया गया था।
पार्थिव और इरफान के अलावा उस अंडर19 टीम का हिस्सा स्टुअर्ट बिन्नी भी थे लेकिन बिन्नी का करियर उतना अच्छा नहीं रहा क्योंकि उनके ऑलराउंड प्रदर्शन से टीम को उतना लाभ नहीं मिला और जल्द ही इस खिलाड़ी को टीम को बाहर कर दिया गया।
#4 रोहित शर्मा और चेतेश्वर पुजारा (2006) | Rohit Sharma and Cheteshwar Pujara (2006)
2006 के अंडर19 विश्वकप में आने वाले समय के कई बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धमाल मचाने वाले खिलाड़ियो ने पहली बार दस्तक दी थी, जिसमें एरोन फिंच और ओएन मॉर्गन वहीं भारत से चेतेश्वर पुजारा और रोहित शर्मा थे, जिन्होंने सभी का ध्यान अपनी तरफ खीचा था। मौजूदा समय में इन दोनों में से एक लिमिटेड ओवरो में तो एक टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम का प्रमुख खिलाड़ी बन चुका हैं।
पुजारा ने उस टूर्नामेंट में 6 पारियों में बल्लेबाज़ी करते हुए 116 के औसत से 349 रन बनायें थे, तो वहीं रोहित ने 41 के औसत से 205 रन बनायें थे। इसके एक साल के बाद रोहित को दक्षिण अफ्रीका में खेले गए पहले आईसीसी टी20 विश्वकप के लिए भारतीय टीम में चुना गया।
रोहित और पुजारा के अलावा इस अंडर19 टीम का हिस्सा पीयूष चावला और रवींद्र जडेजा भी थे। चावला ने उस टूर्नामेंट में 6 पारियों में 13 विकेट लेकर सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ थे।
#5 युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ (2000) | Yuvraj Singh and Mohammad Kaif (2000)
मोहम्मद कैफ की कप्तानी में भारतीय अंडर19 टीम ने कोलम्बो में खेले गए विश्वकप में पहली बार ट्राफी को अपने नाम पर किया था। इस विश्वकप में युवराज की बल्लेबाज़ी को देखकर सभी काफी प्रभावित हुए थे। युवी ने 33 के औसत से 203 रन बनाने के साथ 12 विकेट भी झटके थे। युवी को उनके इस शानदार प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ दी टूर्नामेंट का खिताब भी मिला था। वहीं बात करे कैफ की तो उन्होंने भी 34 के औसत से 170 रन 8 पारियों में बनाये थे।
युवराज को जल्द ही अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का मौका मिल गया और 2000 में खेली गयी आईसीसी नॉकऑउट टूर्नामेंट में उन्हें केन्या के खिलाफ मैच के लिए टीम में शामिल किया गया लेकिन उस मैच में बल्लेबाज़ी का मौका नहीं मिला जिसके बाद अगले मैच में युवी को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने का मौका मिला था।
युवी ने लिमिटेड ओवरो में लगभग एक दशक तक भारतीय टीम के लिए प्रमुख खिलाड़ी बनकर खेले। वहीं कैफ को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज़ में उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिला। कैफ और युवराज़ की जोड़ी ने लिमिटेड ओवरो में भारतीय टीम के फील्डिंग के स्तर को बदलकर ही रख दिया और दोनों ने ही जिस तरीके से नेटवेस्ट ट्राफी के फाइनल में भारतीय टीम को जीत दिलाई थी वह आज तक सभी के दिलो में जिंदा हैं।
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