देश की प्रतिभाशाली महिला टेबल टेनिस खिलाड़ी अंकिचा दास जिन्होंने साल 2012 के लंदन ओलंपिक में महिला टेबल टेनिस इवेंट के लिए अपनी जगह को पक्का किया था। 18 साल की उम्र में ही अंकिता ने नेशनल स्टार खिलाड़ी मौउमा दास और पौलोमी घटक को हराकर लंदन ओलंपिक के लिए अपनी जगह को पक्का किया था।
शुरूआती जीवन
अपने कैडेट जीवन से ही अंकिता ने एक सधी शुरूआत की थी। साल 2007 में अंकिता एक नेशनल चैंपियन खिलाड़ी बनकर उभरी जिसमें उन्होंने वर्ल्ड कैडेट चैंपियनशिप में सभी उम्र ग्रुप के खिलाड़ियों को हराते हुए गोल्ड मेडल जीता था। अंकिता के लिए साल 2011 में पहला बड़ा मौका तब आया जब उन्होंने जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वाटरफाइनल में अपनी जगह को पक्का कर लिया था। भले ही अंकिता को कई बड़े टूर्नामेंट में हार का सामना करना पड़ा हो लेकिन हर हार के बाद अंकिता ने और अधिक कड़ी मेहनत करते हुए वापसी की है।
निजी जीवन
वेस्ट बंगाल में सिलीगुड़ी के डार्जलिंग में 17 जुलाई 1993 को अंकिता दास का जन्म हुआ था। अंकिता के पिता का नाम स्वर्गीय असीम कुमार और मां का नाम संगीता दास है। अंकिता अपने माता-पिता की एकलौती संतान हैं। अंकिता के पिता के पिता टिस्टा प्रोजेक्ट में ग्रुप सी फील्ड स्टाफ की नौकरी करते थे। अंकिता पढ़ाई में हमेशा काफी तेज रहीं थी।
जब अंकिता सिर्फ 5 साल की थी, तो पाचन में तकलीफ होने की वजह से उन्हें गंभीर समस्या का भी सामना करना पड़ी था। जिसके बाद डॉक्टर ने उनके पिता असीम को इस बात की सलाह दी कि वह अपनी बेटी को किसी फिजीकल एक्टीविटी में व्यक्त करें जिससे वह तेजी से ठीक हो सके। इसके बाद ही अंकिता ने अपने पिता के मार्गदर्शन में खेलना शुरू किया। एक मेडिकल समस्या से शुरू होने वाली अंकिता की जर्नी आगे जाकर सफलता में बदलती हुई दिखाई दी।
साव 2015 में अंकिता के पिता का देहांत हो गया था और उसी साल अंकिता ने 20 वें कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप गोल्ड मेडल जीतकर 44 साल के बाद पहली भारतीय महिला खिलाड़ी जीतने वाली बनी थी। 22 साल की अंकिता दास ने अपना नाम अभी से इतिहास के पन्नों में दर्ज करवा लिया है। पिता के देहांत के बाद भी अंकिता ने अपने करियर को लगातार आगे बढ़ाना जारी रखा और सूरत में हुए एक टूर्नामेंट में हिस्सा लेते हुए उसमें जीत हासिल की।
प्रोफेशनल जीवन
अपने परिवार में किसी का सपोर्ट ना मिलने के बावजूद पिता के समर्थन से स्पोर्ट्स में आने वाली अंकिता ने काफी कम उम्र में टेबल टेनिस की बारीकियों को सीख लिया था। काफी जल्द ही अंकिता ने अपने करियर में काफी सफलतायें हासिल की। अंकिता के पहले कोच मिस्टर अमित दम जिन्होंने शुरूआती समय में अंकिता को ट्रेनिंग दी। इसके अलावा अकिंता को मंटू घोष और सुब्रतो रॉय ने भी ट्रेनिंग दी है।
अचीवमेंट
लुसोफोनिया गेम्स
एशियन गेम्स
साल 2014 के गेम्स में दूसरे राउंड तक पहुंची थी।
स्टेट एंड नेशनल लेवल प्रदर्शन
इंटनेशनल प्रदर्शन
निजी जानकारी
विवाद
अपने करियर में शानदार सफलता हासिल करने के अलावा अंकिता दास किसी भी तरह के विवाद में अभी तक नहीं दिखी हैं। साल 2012 में जब अंकिता को लंदन ओलंपिक में बाहर होना पड़ा था, तो उस समय जरूर उनके नाम को लेकर काफी चर्चा देखने को मिली थी।
नेटवर्थ
अंकिता दास की अधिकतर कमाई अपने प्रोफेशन से होती है, इस कारण उनकी नेटवर्थ को लेकर किसी भी तरह की कोई जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
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