भारतीय रिकर्व आर्चरी खिलाड़ी बोम्बल्या देवी जो देश के लिए इंटरनेशनल स्तर पर होने वाले आर्चरी इवेंट में व्यक्तिगत और टीम कॉम्पिटीशन में हिस्सा लेती हैं। बोम्बल्या देवी ने वर्ल्ड आर्चरी चैंपियनशिप में जहां सिल्वर पदक जीता है, तो कई आर्चरी वर्ल्ड में कुल 4 गोल्ड, 5 सिल्वर और 4 कांस्य पदको को अपने नाम पर किया। तीरंदाजी में शानदार प्रदर्शन के लिए बोम्बल्या देवी को अर्जुन पुरस्कार और पद्म श्री अवार्ड दिया जा चुका है।
शुरूआती जीवन
मणिपुर के इम्फाल में 22 जनवरी 1985 को बोम्बल्या देवी का जन्म हुआ था। बोम्बल्या देवी के पिता मंगलम सिंह जहां स्टेट की हैंडबॉल टीम के कोच थे, तो वहीं मां जामिनी देवी लोकल आर्चरी कोच। एक ऐसे परिवार से आना जो खेलों में पहले से ही दिलचस्पी रखता था, इस कारण बोम्बल्या ने शुरू में कई खेलों में अपने हाथ आजमाये, लेकिन 9 साल की उम्र में उनकी मां ने उन्हें आर्चरी के बारे में सिखाना शुरू किया।
शुरू में बोम्बल्या देवी को 10 मीटर की छोटी दूरी से उनकी आर्चरी ट्रेनिंग की शुरूआत हुई और उनकी मां ने उन्हें इस खेल में आगे बढ़ने के लिए काफी कम उम्र सो प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया था। इसके बाद उनकी मां ने अपनी बेटी को इम्फाल में स्थित कुमाऊं लैम्पक स्टेडियम में लेकर गयीं जहां पर बोम्बल्या आर्चरी की बेहतर ट्रेनिंग कर सके। जिसके बाद बोम्बल्या का दिन काफी जल्दी शुरू हो जाता था, क्योंकि वह सुबह ट्रेनिंग करने के बाद स्कूल जाती थी और उसके बाद फिर से शाम को ट्रेनिंग करने जाती थी।
प्रोफेशनल जीवन
तीरंदाजी में कड़ी मेहनत ने बोम्बल्या देवी को स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया में पहुंचा दिया था, जहां पर वह और बेहतर ट्रेनिंग कर सकती थी। बोम्बल्या को टाटा आर्चरी एकेडमी से एफीलेशन मिल गया था। साल 2006 में बोम्बल्या देवी को अपना पहला अंतरराष्ट्रीय कॉम्पिटीशन खेलने को मिला जिलमें पहले एशियन आर्चरी चैंपियनशिप जो बांग्लादेश के ढ़ाका में खेला गया था, उसमें हिस्सा लिया।
इसके बाद अगले साल ईरान में हुए एशियन आर्चरी ग्रांड प्रिक्स में बोम्बल्या देवी ने व्यक्तिगत तौर पर हिस्सा लेते हुए गोल्ड मेडल को अपने नाम पर किया, जिससे बोम्बल्या की राष्ट्रीय टीम में भी जगह पूरी तरह से पक्की हो गयी। साल 2007 में हुए वर्ल्डकप में बोम्बल्या ने अपना पहले विश्वकप पदक कांस्य के तौर पर जीता।
बोम्बल्या देवी के शानदार प्रदर्शन ने भारतीय टीम का दबदबा साल 2010 से 2016 के बीच में कायम रखा जिसमें वर्ल्डकप पदक लगातार जीतने का सिलसिला था। बोम्बल्या के करियर की सबसे बड़ी सफलता साल 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में आयी जब उन्होंने डोला बैनर्जी और दीपिका कुमारी के साथ मिलकर फाइनल में जीत हासिल की।
इसी साल ग्वांझाऊ में हुए एशियन गेम्स में भी टीम इवेंट में कांस्य पदक जीता। इसके बाद साल 2011 में शांघाई में हुए वर्ल्डकप में गोल्ड मेडल जीतने के साथ लंदन ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाइ कर लिया लेकिन ओलंपिक के दूसरे राउंड में उन्हें बाहर होना पड़ा। वहीं टीम इवेंट में डेनमार्क के खिलाफ पहले ही राउंड में हारकर बाहर होना पड़ा।
रियो ओलंपिक के लिए भी बोम्बल्या देवी ने क्वालीफाइ किया था, जिसमें उन्होंने महिला आर्चरी टीम और व्यक्तिगत इवेंट में हिस्सा लिया था, लेकिन व्यक्तिगत इवेंट में बोम्बल्या राउंड 16 तक ही पहुंच सकी।
निजी जानकारी
अवार्ड्स
साल 2012 में बोम्बल्या देवी को तीरंदाजी में शानदार प्रदर्शनक के लिए अर्जुन अवार्ड दिया गया इसके बाद साल 2019 में उन्हें पद्म श्री पुरस्कार मिला जो देश का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान हैं।
नेटवर्थ
बोम्बाल्या देवी की नेटवर्थ को लेकर किसी भी तरह की कोई जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सोशल मीडिया प्रोफाइल
साल 2021 IPL के बाद IPL का पन्ना बढकर 13 पन्नो का हो जायेगा, इसके…
भारत का त्योहार मतलब की IPL एक बार फिर लोगो के बिच में मनोरंजन के…
IPL आज के समय में सबसे ज्यादा पसंदीदा लीग बना हुआ है और इस बात…
साल 2021 का IPL जल्द ही शुरु होने वाला है, 18 फरवरी को हुए ऑक्शन…
हम सभी जानते है की IPL फ्रेंचाइजी को खिलाडीयों को रिटेन और रिलीज के बारे…
हर साल का IPL बिते हुए IPL से ज्यादा मनोरंजक और रोमांचित होता है या…