भारतीय सेना के कैप्टन सूबेदार मेजर विजय कुमार शर्मा जिन्हें सभी एक शानदार शूटर खिलाड़ी के तौर पर भी जानते हैं। विजय हिमांचल प्रदेश के हमीरपुर डिस्ट्रिक से आते हैं और उन्होंने शूटिंग में कई टाइटल्स और पदक जीतकर पूरे देश का सम्मान कई बार बढ़ाया है। विजय की सबसे बड़ी उपलब्धी साल 2012 के लंदन ओलंपिक में आयी थी, जब उन्होंने 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल इवेंट में सिल्वर पदक जीता था। 32 साल के विजय कुमार ने अपने शूटिंग करियर कई बड़ी सफलतायें हासिल की हैं।
शुरूआती जीवन
शूटिंग में देश और अपने स्टेट का नाम बढ़ाने वाले विजय कुमार शर्मा आर्मी बैकग्राउंड से आते हैं, जिस कारण उनके खेल में पूरा अनुशासन दिखता है। एक मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाले विजय कुमार शर्मा के माता-पिता और उन्होंने खुद कभी ये नहीं सोचा था, कि वह ओलंपिक में एक दिन पदक जीतेंगे। आर्मी में विजय शूटिंग को लेकर काफी दिलचस्पी रखते थे और जब साल 2003 में विजय ने नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता उस समय उनके पिता को इस बात का एहसास हुआ कि वह इस खेल में बेहतर कर सकते हैं।
निजी जीवन
हिमांचल प्रदेश के हमीरपुर डिस्ट्रिक के हरसौर में 19 अगस्त 1985 को विजय कुमार शर्मा का जन्म हुआ था। विजय के पिता का नाम बंकू राम है, जो आर्मी से भारतीय आर्मी के रिटायर जवान हैं, वहीं उनकी मां का नाम रोशनी देवी है। अपने पिता की गन को लेकर विजय के अंदर बचपन से ही एक दिलचस्पी थी।
साल 2001 में जब विजय भारतीय आर्मी में सिपाही के पद के पर भर्ती हो गए तो उसके बाद उन्होंने शूटिंग की तरफ अपनी दिलचस्पी को बढ़ाया। जिसके बाद साल 2003 में विजय आर्मी निशानेबाज़ी यूनिट में भी शामिल कर लिए गए। साल 2006 में अपनी प्रतिभा के दम पर विजय का प्रमोशन सिपाही से हवलदार की पोस्ट पर हो गए और उसके बाद उसी साल वह नईब सूबेदार के पद पर तैनात कर दिये गए।
15 साल की नौकरी के बाद साल 2017 में विजय ने भारतीय आर्मी से रिटायरमेंट लिया और अब वह फरीदाबाद की मानव रचना यूनीवर्सिटी से बिजनेस एडमिस्ट्रेशन में अपनी बैचलर डिग्री को पूरा कर रहें हैं। इसके अलावा हिमांचल प्रदेश राज्य सरकार ने उन्हें डिप्टी सुपरीटेंडेंट ऑफ पुलिस के पद पर भी तैनात कर दिया।
प्रोफेशन जीवन
कॉमनवेल्थ गेम्स साल 2006 में विजय कुमार शर्मा ने 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल इवेंच में व्यक्तिगत और पेयर्स कैटेगरी में पेम्बा तमांग के साथ गोल्ड मेडल जीता, जिसके बाद इसी साल हुए एशियन गेम्स में भी विजय ने कांस्य पदक भी जीता। जिसके बाद साल 2006 में ही विजय को भारत सरकार की तरफ से अर्जुन पुरस्कार भी दिया गया।
एशियन चैंपियनशिप साल 2007 में विजय ने 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल इवेंट में दूसरी पोजीशन हासिल की, वहीं साल 2009 में बिजिंग में हुए वर्ल्डकप में विजय ने सिल्वर मेडल को अपने नाम पर किया और इसी के बाद उन्हें सूबेदार की पोस्ट पर प्रमोशन दिया गया। साल 2010 में नई दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स विजय कुमार ने तीन गोल्ड मेडल और 1 सिल्वर पदक जीता।
वहीं साल 2012 में विजय कुमार शर्मा ने लंदन ओलंपिक में 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल इवेंट में सिल्वर मेडल जीता। साल 2014 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में विजय कुमार भारतीय दल के ध्वजवाहक थे। वहीं इसी साल हुए एशियन गेम्स में विजय कुमार ने गुरप्रीत सिंह और पेंबा तमांग के साथ मिलकर 25 मीटर सेंटर फायर इवेंट में सिल्वर मेडल जीता।
अवार्ड्स
अचीवमेंट
निजी जानकारी
विवाद
अपने शानदार प्रदर्शन के अलावा शूटर विजय कुमार शर्मा किसी भी तरह के विवादों में कभी पड़ने हुए नहीं देखे गए हैं।
नेटवर्थ
विजय कुमार शर्मा की प्राइमरी इनकम उनकी भारतीय आर्मी में की गयी नौकरी के अलावा अपने शूटिंग के प्रोफेशन से होती है। इसके अलावा विजय को हिमांचल प्रदेश की राज्य सरकार की तरफ से 1 करोड़ का नकद पुरस्कार मिलने के अलावा राजस्थान सरकार से भी 50 लाख का नकद इनाम मिल चुका हैं। वहीं विजय के नेटवर्थ को लेकर फिलहाल अभी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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