भारतीय महिला आर्चरी खिलाड़ी बोम्बायला देवी लैशराम देश के लिए कई बार तीरंदाज़ी के खेल में हिस्सा ले चुकी हैं। साल 2007 से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बोम्बायला देवी खेल रही हैं और साल 2009 में शानदार प्रदर्शन की वजह से अंतरराष्ट्रीय आर्चरी रैकिंग में उन्हें 14 वां स्थान मिला था।
शुरूआती जीवन
बोम्बायला देवी लैशराम का जन्म 22 फरवरी 1985 को एक ऐसे परिवार में हुआ था, जिसका भारतीय खेलों से एक पुराना नाता रहा है। 11 साल की उम्र में बोम्बायला ने इम्फाल में स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया जाकर अभ्यास करना शुरू कर दिया था।
पर्सनल लाइफ
बोम्बायला देवी की माता-पिता का स्पोर्ट्स बैकग्राउंड से आते हैं। मां एम. जामिनी देवी पहले एक आर्चरी खिलाड़ी थी और वह इंडियन नेशनल टीम का हिस्सा थी, जिसके बाद उन्होंने टीम को कोचिंग भी दी। वहीं पिता मंगलेम सिंह मणिपुर में हैंडबॉल टीम के कोच के तौर पर कार्यरत हैं।
अपने नाम को लेकर बोम्बायला ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था, कि मुझे पूरी तरह से नहीं पता इसे कैसे बोलते हैं, लेकिन हां मैं बॉम्बे में पैदा नहीं हुई थी। मेरा जन्म इम्फाल में हुआ था और मेरे पिता को बोम्बायला नाम काफी पसंद था, जिस कारण उन्होंने मुझे ये नाम दिया।
बोम्बायला ने अपने शुरूआती जीवन में काफी मेहनत की जिस कारण वह आर्चरी में इस मुकाम पर पहुंच सकी और इसको लेकर उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि, मैं एक समय इस खेल को छोड़ने का विचार कर चुकी थी, क्योंकि ये मेरे लिए काफी व्यस्त करने वाला हो रहा था। उस समय जब मेरा मन ट्रेनिंग करने का नहीं होता था, तो मैं स्कूल से सीधे घर चली जाती थी, लेकिन मेरी मां मुझे वापस ग्राउंड छोड़कर आती थी, जिससे मैं ट्रेनिंग का एक सेशन भी मिस ना करूं और आज मैं उसके लिए अपनी मां का आभार व्यक्त करना चाहती हूं।
प्रोफेशनल लाइफ
साल 2006 में बोम्बायला देवी को पहली बार भारतीय आर्चरी टीम में शामिल किया गया जिसमें उनका पहला अंतरराष्ट्रीय मैच बांग्लादेश के ढ़ाका में होने वाली पहली आर्चरी चैंपियनशिप में था।
इसको लेकर बोम्बायला ने कहा था, कि, मैं काफी दबाव में थी, क्योंकि इससे पहले मैं देश के बाहर नहीं गयी थी और मैं टीम सबसे नयी सदस्य भी थी। इसके बाद साल 2007 में इरान में हुए एशियन आर्चरी ग्रांड प्रिक्स में बोम्बायला देवी ने रिकुर्व इवेंट में अकेले गोल्ड मेडल जीता जिसके बाद उन्होंने इसको लेकर कहा था, कि, यह मेरा सबसे फेवरेट मेडल है, क्योंकि यह मैने खुद जीता था और आज भी जब मेरा आत्मविश्वास नीचे होता है, तो मैं इसी समय को याद करके खुद को उपर उठाने की कोशिश करती हूं।
साल 2007 में जब एशियन आर्चरी चैंपियनशिप में टीम इवेंट में बोम्बायला ने कांस्य पदक जीता था, तो सभी की काफी तारीफ हुई थी। इसके बाद 2008 में हुए बिजिंग ओलंपिक में बोम्बायला को खेलने का मौका मिला लेकिन वहां पर उन्हें टीम इवेंट में चाइना की टीम और एकल इवेंट में पोलेंड की खिलाड़ी से हार का सामना करना पड़ा था। साल 2010 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीता और 2011 में शंघाई में हुए वर्ल्डकप में इटली की खिलाड़ी को हराकर बोम्बायला ने गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद लंदन ओलंपिक और रियो ओलंपिक में बोम्बायला को हार का सामना करना पड़ा था।
बोम्बायला ने एक इंटरव्यू में अपनी सफल होने के तरीके को लेकर बात करते हुए कहा था, कि, मुझे लगता है, कि सफल होने के लिए आपको अपनी टीम के बारे सही तरीके से पता होना चाहिए। ये मतलब नहीं रखता कि कौन किस उम्र का खिलाड़ी टीम में हैं, क्योंकि मैं डोला जो 38 साल की थी उनके साथ काफी सहज थी और साथ ही दीपिका कुमारी जो सिर्फ 24 साल की थी उन्हें साथ भी, जो सबसे महत्तवपूर्ण बात है, वह आप किस तरह से सहज रहते हुए अपना प्रदर्शन करते हैं।
इसके अलावा किसी भी टूर्नामेंट से पहले बोम्बायला किस तरह से तैयारी करती हैं, उसको लेकर भी बोम्बायला ने कहा कि, किसी भी प्रतियोगिता के पहले मैं अपनी मां से बात करती हूं जो मुझे कुछ जरूरी चीज़े बताती हैं और यह कभी पुरानी नहीं होती हैं।
सम्मान
अचीवमेंट
फिजिकल माप
निजी जानकारी
नेटवर्थ
बोम्बायला देवी की नेटवर्थ को लेकर बात करी जाए तो वह लगभग 19 मिलियन डॉलर के आसपास होने की उम्मीद की जा रही है।
विवाद
अभी तक अपने आर्चरी के करियर में बोम्बायला देवी को विवादो से दूर ही देखा गया है।
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