काफी कम ही लोग भारत के मशहूर रोविंग खिलाड़ी दत्तु बाबन भोकनाल की असली कहानी को जानते होंगे। भारत के इस रोवर ने कई समस्याओं का सामना करते हुए अपने सपने को पूरा किया, जिसमें उन्हें अपने जीवन में कई असफलताओं को भी देखना पड़ा था, लेकिन यह एथलेटिक खिलाड़ी इन सभी चीज़ो से उबरते हुए खुद को एक शानदार खिलाड़ी के तौर पर स्थापित किया।
शुरूआती जीवन
दत्तु बाबन भोकनाल का जन्म भारत के एक ग्रामीण इलाके में हुआ था। इस एथलेटिक खिलाड़ी को बड़े स्तर तक पहुंचने के लिए काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। 18 साल की उम्र में ही दत्तु के पिता का देहांत हो गया था, जिसके बाद दत्तु भारतीय आर्मी में भर्ती हो गए और उसके बाद ही दत्तु के रोविंग खिलाड़ी बनने का सफर शुरु हुआ।
निजी जीवन
दत्तु बाबन भोकनाल का जन्म 5 अप्रैल 1991 को महाराष्ट्रा के चेंदवाद तालुका के एक छोटे से गांव में हुआ था। दत्तु का परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं था। चेंदवाद गांव के लोगों को साफ पानी की समस्या का से जूझना पड़ता था, जो आज तक वैसी ही है। दत्तु बचपन में पानी की लाइन में लगकर टैंकर से 2 बाल्टी पानी अपने घर के लिए लाने का काम करते थे। इसके अलावा सूखे की वजह से भी परिवार काफी परेशान रहा।
लेकिन गरीबी से लड़ना दत्तु के लिए अधिक मुश्किल काम नहीं था लेकिन जब उनके पिता का देहांत बोन कैंसर की वजह से हुआ तो दत्तु के लिए उससे निकलना आसान नहीं था। पिता के देहांत की वजह से परिवार को और अधिक गंभीर आर्थिक हालातों का सामना करना पड़ा। दत्तु ने इससे निकलने के लिए पेट्रोल पंप पर काम करने के अलावा एक मजदूर के तौर पर भी काम किया। इन सबके बाद दत्तु भारतीय आर्मी में हवलदार के पद पर तैनात हो गए।
आर्मी में भर्ती होने के बाद दत्तु को रोविंग के बारे में सूबेदार कुदरत अली ने बताया। दत्तु अपने परिवार में एकलौते कमाने वाले थे और इस कारण उन्हें अपनी मां के अलावा 2 भाईयों का भी ख्याल रखना था, क्योंकि पिता के कैंसर का इलाज कराने के कारण परिवार के पास कुछ भी बचा नहीं था।
काफी कड़ी मेहनत करने के बाद दत्तु ने साउथ कोरिया में ओलंपिक क्वालिफाइंग इवेंट में सफलता हासिल की, लेकिन उनकी समस्या यहीं पर खत्म नहीं हुई थी क्योंकि उसी समय दत्तु की मां एक दुर्घटना का शिकार हो गयी जिसमें उन्हें सर पर काफी गंभीर चोट लगने की वजह से वह कोमा में चली गयी। इन सबके बावजूद दत्तु ने इवेंट में हिस्सा लेना जारी रखा जिससे वह रियो ओलंपिक के लिए सफलतापूर्व क्वालीफाइ कर गए।
इसके बाद दत्तु ने अपनी मां की हालत की जानकारी लेने के लिए गए लेकिन उनकी स्थिती में किसी भी तरह का कोई सुधार नहीं था। इन सबके बावजूद दत्तु ने खुद को मानसिक तौर पर कमजोर नहीं पड़ने दिया और अपना पूरा ध्यान रोविंग के तरफ ही लगाया।
प्रोफेशनल जीवन
साल 2012 में दत्तु बाबन भोकनाल ने रोविंग की शुरूआत पूणे स्थित बॉम्बे इंजीनियरिंग ग्रुप एंड सेंटर से की, जिसके बाद साल 2013 में दत्तु आर्मी रोविंग नोड चले गए जिससे वह बेहतर ट्रेनिंग कर सके। दत्तु के पहले कोच का नाम कुशरत अली था जिसके बाद उन्हें द्रोणाचार्य और चीफ नेशनल रोविंग कोच इस्माइल बेग ने पूणे के एआरएन में उन्हें ट्रेनिंग दी।
दत्तु बाबन भोकनाल की मदद टारगेट ओलंपिक पोडियम ने की जो ओलंपिक मेडल जीतने की सभावना रखने वाले खिलाड़ियो को आर्थिक मदद देता था। साल 2016 के रियो ओलंपिक से पहले पूणे स्थित एआरएन में नेशनल कैंप लगाया गया था, जिसमें डॉ. रोशन अदकिट्टे एक स्पोर्ट्स फीजियोथेरेपिस्ट थे उन्होंने दत्तु की चोटों से उबरने में काफी मदद की।
रियो ओलंपिक में दत्तु पदक जीतने में कामयाब नहीं हो सके लेकिन उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 13 वां स्थान हासिल किया था। लंदन ओलंपिक के बाद किसी भारतीय रोवर का यह इस इवेंट में सबसे शानदार प्रदर्शन था।
अचीवमेंट
निजी जानकारी
विवाद
अपने करियर में शानदार प्रदर्शन के अलावा भारतीय रोवर खिलाड़ी दत्तु बाबन भोकनाल उस समय सुर्खियों में आये जब उनकी पत्नि ने उनके उपर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। दत्तु की पत्नि जो एक पुलिस कांस्टेबल हैं उन्होंने उनके खिलाफ धारा 498 के तहत शिकायत दर्ज करवायी, जिसके बाद इस मामले को लेकर दत्तु ने भी अपनी तरफ से बयान दर्ज करवाया था।
नेटवर्थ
दत्तु बाबन भोकनाल की नेटवर्थ को लेकर किसी भी तरह की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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