भारतीय कुश्ती खिलाड़ी संदीप तोमर जो पुरुषों के 55 किलोग्राम इवेंट में हिस्सा लेते हैं। संदीप उत्तर प्रदेश से आते हैं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदकों को अपने नाम पर किया है। संदीप वह पहले नाम होंगे जब रियो ओलंपिक में भारतीय कुश्ती के खिलाड़ियो के प्रदर्शन को लेकर बात की जाएगी।
शुरूआती जीवन
जब संदीप ने पहली बार मिट्टी अखाड़ा में अपना पहला कदम रखा था, तो उसी समय सभी को इस बात का एहसास हो गया था, कि एक दिन मलकापुर से आने वाला यह खिलाड़ी ओलंपिक में पदक जीतेगा। संदीप जिस गांव से आते हैं, वहां से भारत को अभी तक सबसे अधिक ओलंपिक खेलने वाले खिलाड़ी निकले हैं, बाकी देश के किसी गांव के मुकाबले। अपनी सारी समस्याओं को दरकिनार करते हुए संदीप ने अपने सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की।
निजी जीवन
संदीप तोमर का जन्म 2 अप्रैल 1991 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में मलकापुर गांव में हुआ था। एक ऐसे गांव से आना जहां पर कुश्ती को लेकर काफी रोमांच हो और इसी कारण काफी कम उम्र में ही संदीप ने इस खेल में अपना भविष्य बनाने का सपना देख लिया था। मलकापुर में तीन अखाड़े हैं, जो मिट्टी के हैं और सभी 15 स्केवयर फुट के हैं। दूसरे गांव के लोग भी मलकापुर आकर कुश्ती का अभ्यास करते हैं, जिससे वह भरत केसरी और हिंद केसरी जैसे टाइटल्स जीत सके।
संदीप ने भी यहीं मशहूर अखाड़े में ट्रेनिंग ली। गांव के दूसरे लोगों की तरह संदीप के परिवार का भी कुश्ती से पुराना नाता रहा है। तोमर के बाबा एक हैवीवेट रेसलर थे, तो वहीं उनके पिता एक पूर्व कबड्डी खिलाड़ी के साथ रेसलर रहे थे। अपने पिता और बाबा से प्रेरणा लेते हुए संदीप तोमर ने भी इस खेल में ही आगे बढ़ने का फैसला लिया, लेकिन शुरू में उनके पिता ने उन्हें अखाडा जाने से मना कर दिया था, जिसके बाद संदीप की दिलचस्पी को देखते हुए उन्होंने बाद में इसकी मंजूरी दे दी। तोमर ने घंटो अभ्यास में समय बिताया और अपने पहले दंगल में जीत हासिल करने के बाद उन्हें 14 रुपये पुरस्कार के तौर पर मिले थे और संदीप ने अपनी इस पहली सफलता को अपने पिता को सौंप दिया और इसके बाद उनके पिता ने फिर कभी उन्हें रोकने का प्रयास नहीं किया।
प्रोफेशनल जीवन
12 साल की उम्र में संदीप तोमर ने कुश्ती का अभ्यास शुरू कर दिया था। लोकल अखाडा के मुख्य इकबाल सिंह ने संदीप को शुरूआती ट्रेनिंग देने का काम किया। इकबाल ने उन्हें तैयार करने के साथ कुश्ती की तकनीक के बारे में भी जानकारी देने का काम किया। यहां तक कि वह संदीप को डिस्ट्रिक और स्टेट लेवल पर होने वाले टूर्नामेंट में लेकर भी जाते थे और उस समय काफी रेसलर जहां कबड्डी की तरफ आर्कषित हो रहे थे, तो वहीं इकबाल ने संदीप को कुश्ती में ही आगे बढ़ने की सलाह दी।
साल 2008 में सब जूनियर नेशनल में जीत हासिल करने के बाद संदीप ने मैट पर आगे अभ्यास करने का फैसला लिया। एक प्रयोग की गयी मैट को वह अपने गांव लेकर आये क्योंकि वहां पर सब मिट्टी के ही अखाडे थे। तोमर एक कमरे के अंदर इस मैट को डालकर अभ्यास करने लगे और अभ्यास के बाद वह उसे वहां से हटा देते थे।
जब संदीप की मुलाकात नेवी कोच कुलदीप से हुई तो उनके करियर में एक बड़ा बदलाव आया, क्योंकि संदीप उस समय सीनियर नेशनल मुकाबले को लेकर ट्रेनिंग कर रहे थे। कुलदीप ने संदीप को सलाह देते हुए कहा कि वह 50 किलोग्राम वर्ग की जगह पर 55 किलोग्राम वर्ग में खेले और संदीप ने बिना किसी संदेह के उनकी बात मानी जिसका नतीजा यह हुआ कि संदीप ने गोल्ड मेडल को अपने नाम पर किया।
कुलदीप के अंडर में जबसे संदीप ने ट्रेनिंग करना शुरू किया है, उसके बाद से उनकी तकनीक में काफी सुधार देखने को मिला है जिस कारण वह एक बेहतर रेसलर बनते जा रहे हैं। कुलदीप ने संदीप को नेवी में नौकरी दिलाने में भी काफी अहम रोल अदा किया क्योंकि इस नौकरी के जरिए वह अपनी ट्रेनिंग का पूरा खर्चा उठाने में सक्षम हो सके हैं।
संदीप ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट साल 2012 में रियो में खेला जहां पर उन्होंने विपक्षी खिलाड़ी को हराते हुए पहला स्थान सुनिश्चित किया था। अभी तक संदीप ने 9 अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 57 किलोग्राम वर्ग के इवेंट में हिस्सा लिया है और कभी भी खाली हाथ उनकी घर वापसी नहीं हुई है।
अचीवमेंट
निजी जानकारी
विवाद
संदीप तोमर अभी तक सिर्फ अपने प्रदर्शन को लेकर ही सुर्खियों में रहे हैं। 28 का यह युवा रेसलर खिलाड़ी किसी भी तरह के विवादों से दूर ही देखा गया है।
नेटवर्थ
संदीप तोमर की नेटवर्थ को लेकर किसी भी तरह की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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