लंदन ओलंपिक में पहले भारतीय खिलाड़ी जिन्होंने क्वॉलीफाई किया था, वह भारतीय स्टार शूटर खिलाड़ी गगन नारंग थे, जो 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में हिस्सा लेते हैं। गगन ने कभी भी देश को निराश नहीं किया और अपनी कड़ी मेहनत के दम पर हर स्तर पर खिताब जीतने में कामयाब रहे हैं।
इस भारतीय शूटर ने देश के लिए भविष्य के शूटिंग में खिलाड़ियो को तैयार करने की जिम्मेदारी लेते हुए गगन नारंग ने स्पोर्ट्स प्रमोशन फाउंडेशन की शुरूआत की जिससे नयी प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा के लिए तैयार किया जा सके।
शुरूआती जीवन
6 मई 1983 को गगन नारंग का जन्म हुआ था और बचपन से ही वह एयरफोर्स में पायलट बनना चाहते थे। गगन के पिता के अनुसार गगन ने 2 साल की उम्र में बलून पर पिस्टल से सीधा निशाना लगाया था, जिसके बाद उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि वह शूटिंग में काफी कुछ कर सकते है। गगन मौजूदा समय में एयर इंडिया में नौकरी कर रहे हैं, साल 1997 से गगन ने अपनी शूटिंग की जर्नी शुरू की थी, जब उनके पिता ने उन्हें एयर पिस्टल का उपयोग करने की छूट दी थी, इसके बाद गगन ने इसको लेकर अभ्यास करना शुरू किया जिससे सही निशाना लगाया जा सके।
भीमसेन नारंग जो गगन के पिता हैं, उन्हें देश को धन्यवाद देना चाहिए कि उन्होंने भारत को शूटिंग में स्टार खिलाड़ी जिस पर पूरे देश को गर्व है। यह उन्हीं की कड़ी मेहनत का फल है, जो गगन ने शूटिंग में काफी अच्छा किया है।
पर्सनल जीवन
गगन के पिता का नाम भीमसेन नारंग और माता का नाम अमरजीत नारंग है। गगन एक पंजाबी परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जो चेन्नई में रहता हैं। गगन के पिता एयर इंडिया में चीफ मैनेजर के पद पर नियुक्त थे। गगन ने भी अपने जीवन में काफी परेशानियों का सामना किया जिसमें उनके परिवार अपना घर बेचना पड़ा जिससे वह गगन को शूटिंग के लिए राइफल दिलवा सके। लगभग 15 सालों तक गगन और उनके परिवार को किराये के मकान पर रहना पड़ा। गगन हमेशा अपनी इस सफलता का श्रेय अपने परिवार को देते हैं, जिनकी मदद से वह आज इस मुकाम पर पहुंच सके।
गगन कभी प्यार के चक्कर में नहीं पड़े लेकिन इस शूटर को शादी के काफी प्रस्ताव मिले और उनका परिवार भी चाहता था, कि वह जल्द शादी कर ले लेकिन गगन का पूरा ध्यान अपने करियर पर था और इस कारण वह जल्दी शादी नहीं करना चाहते थे। गगन एक लडकी से शादी करना चाहते हैं, जो उनके खराब और अच्छे समय में उनके साथ खड़ी रहे।
प्रोफेशनल लाइफ
काफी कम उम्र में ही गगन ने अपने प्रोफेशनल करियर में सफलता को हासिल कर लिया था। 2003 के एफ्रो एशियन गेम्स में गगन ने शूटिंग में जिस समय गोल्ड मेडल जीता था, उस वक्त वह सिर्फ 20 साल के थे। नयी दिल्ली में हुए साल 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गगन ने अपनी सफलता को एक कदम और आगे बढ़ाते हुए 4 गोल्ड मेडल अपने नाम पर किए जिसमें 10 मीटर एयर राइफल और 50 मीटर एयर राइफल कैटेगरी शामिल थी, जिससे बाद वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए।
29 अगस्त 2011 को गगन को खेल में शानदार योगदान देने के लिए भारत सरकार की तरफ से उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न का पुरस्कार दिया गया। एशियन गेम्स 2010 में गगन ने अकेले और टीम इवेंट में सिल्वर पदक भी जीता था।
शूटिंग के प्रोफेशन में गगन नारंग की अचीवमेंट की लिस्ट काफी लंबी है, राज्यवर्धन राठौर और अभिनव बिंद्रा के बाद गगन नारंग तीसरे ऐसे भारतीय शूटर बने जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये सफलता हासिल की।
अवार्ड्स
अचीवमेंट
ओलंपिक – लंदन में हुए साल 2012 में कांस्य पदक 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग में।
ISSF वर्ल्डकप मेडल टैली
कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप
एशियन गेम्स
निजी जानकारी
फिजिकल इनफॉरमेशन
विवाद
जब गगन को लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड नहीं दिया गया तो वह काफी दुखी हुए थे, और इस तरह से नजरअंदाज़ किए जाने के बाद गगन ने धमकी तौर पर कहा था, कि वह 2010 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा नहीं लेंगे, लेकिन इसके बाद परिवार और फैंस की काफी गुजारिश करने के बाद गगन ने फैसले को बदलते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया।
नेटवर्थ
गगन को अभी तक अपने करियर में कई बार पुरस्कार स्वरूप धनराशी दी गयी जिसके बाद हम आपको कुछ कैश प्राइज के बारे में बता सकते हैं।
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