भारत के जाने पहचाने शूटर खिलाड़ी गुरप्रीत सिंह ने साल 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर सुर्खियों में आये थे। गुरप्रीत सिंह ने शूटिंग में देश के लिए कई मेडल जीतने के साथ साल 2016 के ओलंपिक खेल में भी हिस्सा लिया था।
शुरूआती जीवन
एक पिछड़े गांव से आने वाले गुरप्रीत सिंह ने शूटिंग में आगे बढ़ने के लिए काफी संघर्ष किया है, जिसके बाद उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया है। संक्षेप में बात की जाए तो गुरप्रीत सिंह ने काफी त्याग के बाद अपने जीवन में एक सफल शूटर खिलाड़ी बन सके।
निजी जीवन
गुरप्रीत सिंह का जन्म 19 दिसम्बर 1987 के पंजाब के तरन तारन डिस्ट्रिक में हुआ था। गुरप्रीत का जिस गांव में जन्म हुआ था, वहां पर अधिकतर लोग भारतीय आर्मी में थे, यहां तक की उनके गांव का नाम ही फौजियों का मुहल्ला कहा जाता था। गुरप्रीत के तीन चाचा जहां आर्मी में हैं, वहीं उनके पिता आर्मी से रिटायर हो चुके हैं और इसी कारण गुरप्रीत भी आर्मी में जाना चाहते थे, जिसके बाद उन्होंने अपनी शूटिंग का अभ्यास शुरू किया।
परिवार में कोई भी गुरप्रीत के इस खेल से परिचित नहीं था, क्योंकि उनके परिवार और गांव के लोगों को सिर्फ क्रिकेट के खेल से परिचित थे, जिस कारण शुरू में गुरप्रीत अपने परिवार को मनाने में काफी समस्या का सामना करना पड़ा, जिस कारण उन्हें काफी त्याग का भी सामना करना पड़ा। गुरप्रीत काफी कम अपने घर और गांव आते थे, जहां बाकी के आर्मी जवान अपने छुट्टियों पर अपने गांव वापस आते थे, तो गुरप्रीत अपने परिवार से 10 महिने तक दूर रहते थे, जिसके बाद जल्द ही गुरप्रीत के परिवान ने उनका साथ देने का फैसला लिया।
प्रोफेशनल जीवन
साल 2004 में गुरप्रीत सिंह ने वर्ल्ड शूटिंग में पहली बार कदम रखा और इससे पहले उन्हें इस खेल के बारे में पहले कुछ नहीं पता था। पुणे में गुरप्रीत ने अपने तैयारी को शुरू किया जहां पर नयी प्रतिभा को तराशने का काम होता है, जिसके बाद उन्होंने गुरप्रीत को पर्सनल स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करते देखने के बाद ट्रेनिंग सिस्टम का हिस्सा बनने के लिए कहा। साल 2004 में गुरप्रीत ने पहली बाद गन से ट्रेनिंग सेंटर में शूट किया जिसके बारे में उन्हें पहले कुछ भी नहीं पता था और गुरप्रीत ने एकदम सही निशाना लगाया जिसके बाद आर्मी के इस जवान ने एक प्रोफेशनल शूटर बनने का फैसला लिया।
शुरूआती समय में गुरप्रीत के लिए गन को समझना आसान नहीं था। जिसमें उन्होंने 9 एमएम की फ्री पिस्टल से शुरूआत करते हुए अच्छा किया। इंटर स्टेट सर्विसेज में खेलने केे बाद गुरप्रीत का चयन आर्मी मार्कसमैन में हो गया जहां पर उन्हें अपने हथियार के साथ खेलने का मौका मिला।
साल 2015 में वर्ल्डकप शुरू होने के बाद गुरप्रीत काफी बेसब्री के साथ ओलंपिक का इंतजार करने लगे। साल 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स में अच्छा प्रदर्शन ना करने की वजह से गुरप्रीत का आत्मविश्वास भी काफी कम हो गया था, जिसके बाद उन्होंने साल 2011 और 2012 में तैयारी करके 2013 में शानदार वापसी की और एशियन गेम्स के साथ वर्ल्ड चैंपियनशिप हिस्सा लेने के साथ गोल्ड मेडल जीता।
अचीवमेंट
निजी जानकारी
विवाद
गुरप्रीत सिंह अभी तक अपने शूटिंग के करियर में किसी भी तरह के विवादों से काफी दूर रहे हैं। गुरप्रीत का पूरा ध्यान उनके करियर पर है और देश के लिए अगले ओलंपिक में पदक जीतने की तरफ अपना पूरा ध्यान लगा रहे हैं।
नेटवर्थ
गुरप्रीत सिंह की नेटवर्थ को लेकर बात करी जाए तो इस बारे में अभी तक किसी भी तरह की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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