भारत के ग्रीको रोमन रेसलर खिलाड़ी हरदीप सिंह जो 98 किलोग्राम कैटेगरी में होने वाले इवेंट में हिस्सा लेते हैं। हरदीप सिंह ने एक रेसलर के तौर पर काफी कम समय में अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे हैं।
शुरूआती जीवन
हरियाणा से आने वाले हरदीप सिंह भारत के पहले ऐसे रेसलर खिलाड़ी बने जिन्होंने ग्रीको रोमन ओलंपिक में जीत हासिल की उनसे पहले मुकेश खत्री ने साल 2004 में ऐसा किया था। साल 2013 में हरदीप सिंह ने कॉमनवेल्थ चैंपियन बनने के अलावा साल 2016 में एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में उपविजेता भी रहे थे।
निजी जीवन
हरदीप सिंह का जन्म 20 दिसम्बर 1990 हरियाणा के जींद डिस्ट्रिक में दहोला गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। हरदीप जब स्कूल जाते थे, तो उन्होंने उस समय से ही कुश्ती खेलना शुरू कर दिया था, जिसके बाद उनके कोच ने हरदीप के अंदर प्रतिभा देखने के बाद स्पोर्ट्स स्कूल में दाखिला दिला दिया जिससे वह बेसिक चीज़ो को सुधार सके। हरदीप ने 3 साल तक स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के रीजनल सेंटर में ट्रेनिंग की, जिसके बाद उनके खेल को देखते हुए उन्हें दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम भेज दिया गया जहां पर वह अपनी कुश्ती की तकनीक को और अधिक बेहतर कर सके।
इसके अलावा हरदीप सिंह इस समय भारतीय रेलवे में भी कार्यरत हैं। यह बेहद अचम्भे की बात है, कि एक हरदीप ने शुरू में फ्रीस्टाइल रेसलिंग की शुरूआत की थी करने के बाद खुद को ग्रीको रोमन स्टाइल में लेकर आये, जिसमें उन्होंने साल 2009 में जूनियर नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लिया।
प्रोफेशनल लाइफ
साल 2013
वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप साल 2013 में हरदीप सिंह के लिए निराशा भरा रहा था, क्योंकि इस इवेंट के 16 वें राउंड में उन्हें मोलदावास मारिन काजैक से 3-1 के स्कोर से मात मिली थी। इसके बाद नवंबर के महिने में हरदीप ने रेलवे स्पोर्ट्स प्रमोशन बोर्ड की तरफ से खेलते हुए कोलकाता में हुए 58 वें सीनियर नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप में 98 किलोग्राम कैटेगरी ग्रीको रोमन में गोल्ड मेडल जीता।
इसके अलावा साल 2013 में ही हरदीप ने कॉमनवेल्थ रेसलिंग चैंपियनशिप में साउथ अफ्रीका के जूलियन लबुशाने को 96 किलोग्राम ग्रीको रोमन कैटेगरी में हराते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम पर किया था। इसी इवेंट में हरदीप ने 96 किलोग्रीम कैटेगरी में फ्रीस्टाइल में कांस्य पदक जीता था।
साल 2014
अप्रैल 2014 में हरदीप सिंह ने एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लिया जिसमें उन्होंने पहले राउंड में उजबेकिस्तान के जहोंगीर तुरदीव को 3-1 से हराया, लेकिन इसके बाद हरदीप को अगले राउंड में यरुलन इसकोव से हार का सामना करना पड़ा। लेकिन रैंपेज में हरदीप ने कांस्य पदक को जरूर अपने नाम पर किया, जिसमें उन्होंने चाइना के डी जाएयो को 4-0 से हराकर 5 वां स्थान हासिल किया था।
साल 2015
इस साल की शुरूआती हरदीप सिंह ने काफी सकारात्मक तरीके से करते हुए 35 वें नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल जीता। उसके बाद वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में हरदीप ने शुरूआत तो काफी अच्छी की थी, लेकिन बाद में उन्हें हारकर बाहर होना पड़ा था। इस हार के बाद भी हरदीप ने साल का अंत शानदार तरीके से करते हुए 60 वें सीनियर नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल को अपने नाम पर किया था।
साल 2016
एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में 98 किलोग्राम कैटेगरी में मेहदी अलीयारी से फाइनल में हारने के बाद सिल्वर मेडल को अपने नाम पर किया था। इसके अलावा इसी साल हुई एशियन रेसलिंग ओलंपिक क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट में 98 किलोग्राम कैटेगरी में भी हिस्सा लेते हुए कजाकिस्तान के मरगुलान असीमबेकोव को सेमीफाइनल में हराया था। हरदीप को फाइनल में हार का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने ओलंपिक में अपनी जगह को पक्का कर लिया था और यह साल 2004 के ओलंपिक के बाद किसी भारतीय रेसलर का ग्रीको रोमन में क्वालीफाइ करने वाले खिलाड़ी थे।
अचीवमेंट
निजी जानकारी
विवाद
हरदीप सिंह का अपने खेल के प्रति पूरा ध्यान रहता है और इस खिलाड़ी अभी तक अपनी उपलब्धियों को लेकर सुर्खियां बटोरी हैं। हरदीप सिंह किसी भी तरह के विवाद से अपने करियर में दूर ही रहे हैं।
नेटवर्थ
हरदीप सिंह की नेटवर्थ को लेकर किसी भी तरह की कोई जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
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