विश्वकप 2019 आईसीसी क्रिकेट वर्ल्डकप की शुरुआत 30 मई से इंग्लैण्ड और वेल्स में होगी. सभी क्रिकेट खेलने वाले देशों ने अपनी कमर कस ली है. टीमों का ऐलान भी हो चुका है. बस इंतजार है तो महाकुंभ शुरू होने का. लेकिंन महाकुंभ शुरू होने से पहले आपको बताते हैं भारत द्वारा खेले गए पहले विश्वकप यानि 1975से जुड़ी कुछ अनसुनी कहानियां रिकॉर्ड्स और भी बहुत कुछ.
विश्वकप का पहला संस्करण वर्ष 1975 में खेला गया था. यह विश्वकप प्रीडेंशियल वर्ल्डकप के रुप में जाना जाता है. क्योंकि इस विश्वकप को स्पॉन्सर प्रीडेंशयल नाम की एक कम्पनी ने किया था.प्रीडेंशयल कम्पनी एक फाइनेनशियल कम्पनी है जिसकी स्थापना 1848 में इंग्लैंड में की गई थी.
विश्वकप का पहला मैच 7 जून 1975 को लंदन में, भारत व इंग्लैंड के बीच खेला गया था. यह टूर्नामेंट सिर्फ 14 दिनों तक चला जिसमें 15 मैच खेले गए. विश्वकप के पहले मैच में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था. यह फैसला इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने सही साबित किया और 60 ओवरों में 334 रनों का विशाल लक्ष्य भारत के सामने रख दिया. इस मैच में डीएल अमीस ने 147 गेंदों में 137 रनों की पारी खेली थी. जिसमें उन्होंने 18 चौके लगाए थे.
अब बात करते हैं भारतीय गेंदबाजी की, विश्वकप इतिहास की पहली गेंद मदनलाल द्वारा फेंकी गई थी. और इस मैच में भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे श्रीनिवास वेकटाराघवन ने सबसे अच्छी गेंदबाजी की थी. उन्होंने इस मैच में 12 ओवरों में 41 रन दिए थे. मगर वे एक भी विकेट लेने में कामयाब नहीं हो पाए थे. भारत ने जो इंग्लैंड के 4 विकेट लिए थे उसमें से 2 विकेट सईयद अबिद अली ने व 1-1 विकेट मदनलाल व मोईंदर अमरनाथ ने लिया था. यहाँ तक तो सब ठीक चल रहा था. मगर इसके बाद जो हुआ वह इतिहास के पन्नों में ज्यादा मशहूर हैं बल्कि यह छोड़कर कि यह विश्वकप इतिहास का पहला मैच था.
यह मैच सबसे ज्यादा सुनील गवास्कर की वजह से जाना जाता है. क्योंकि उन्होंने इस मैच में 334 रनों के पहाड़ जैसे लक्ष्य का पीछा करते हुए उन्होंने 174 गेंदे खेली व मात्र 36 रन बनाए. और वो भी नाबाद. इतनी धीरे बल्लेबाजी करने के बाद उनकी क्रिकेट जगत में बहुत आलोचना हुई. और मैच खत्म होने के बाद भारतीय मैनेजर जी.एस रामचन्द्र ने कहा, सुनील गावस्कर को लगा कि इंग्लैण्ड ने जो टार्गेट बनाया है 334 रनों का वह हम शायद नहीं बना सकते हैं तो मैच प्रैक्टिस ही कर लेते हैं जो आगे काम आएगी.
यह मैच भारत ने 202 रनों से गवां दिया था.
इस मैच के बाद भारत ने अपना दूसरा मैच 11 जून को ईस्ट अफ्रीका के खिलाफ लीड्स शहर के हैडंग्ले क्रिकेट मैदान में खेला गया था. जो इस सीजन का का छठवां मैच था. भारत ने इस मैच में धमाकेदार वापसी करते हुए 10 विकेट से जीत हासिल की. पिछले मैच में जो खिलाड़ी धीमे बल्लेबाजी करने की वजह से विलेन बन गया था. वो खिलाड़ी इस मैच का हीरो बना.
ईस्ट अफ्रीका ने इस मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया व भारत को एक बार फिर रनों का पीछा करना था मगर इस बार भारतीय गेंदबाजों ने कमाल की गेंदाबाजी कर ईस्ट अफ्रीका को मात्र 120 रनों पर ऑल आउट कर दिया. मैच में सबसे ज्यादा विकेट मदन लाल ने लिए जिन्होंने मैच में सिर्फ 15 रन खर्च करते हुए 3 विकेट लिए.
अब भारतीय टीम को बल्लेबाजी करने आना था पिछले मैच का दबाव लेकर भारतीय सलामी बल्लेबाजों की जोड़ी मैदान पर उतरी. मगर इस बार उनको इतना बड़ा रन चेज़ नहीं करना था.
सुनील गावस्कर के साथ इस बार मैदान में इकनाथ सोलकर की जगह फारुख इंजीनियर बल्लेबाजी करने उतरे जिनको पिछले मैच में बल्लेबाजी नहीं मिली थी.
इस मैच को भारत ने बिना विकेट खोए 29.5 गेंदो में ही जीत लिया मैच के अन्त में भारत का स्कोर 123 रन था वो भी बिना विकेट खोए. मैच में सुनील गावस्कर ने 75 की स्ट्राइक रेट से 86 गेंदों में 65 रनों की पारी खेली व फारुख इंजीनियर ने 93 गेंदों पर 54 रन बनाए.
इस मैच के बाद भारत टूर्नामेंट में 1 मैच जीत चुका था व 1 गवां चुका था. भारत अब टूर्नामेंट का अपना तीसरा मैच खेलने मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफोर्ड मैदान पर पहुंचा जहाँ उसका मुकाबला न्यूजीलैंड के साथ खेला जाना था. अगर बात न्यूजीलैंड की करे तो उनकी स्थिति भी भारत जैसी ही थी. वह भी टूर्नामेंट में अब तक एक मैच जीती थी व एक मैच गंवा चुकी थी.
अब टूर्नामेंट की स्थिति यह हो चुकी थी कि इन दोनों टीमों में से जो भी यह मैच जीतेगा वह सेमीफाइनल में जगह बना लेगा. और इस करो व मरो मुकाबले में न्यूजीलैंड ने बाजी मार ली और भारत का पहले विश्वकप का सफर यहीं समाप्त हो गया.
इस मैच में पहली बार भारत पहले बल्लेबाजी करने उतरी व स्कोर बोर्ड में 230 रनों का लक्ष्य रखा. जिसे न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों ने 58.2 गेंद खेलकर ही बना लिया. इस मैच के हीरो रहे न्यजीलैंड के ओपनर बल्लेबाज ग्लेन टर्नर. जिन्होंने 177 गेंद खेलकर 114 रनों की नाबाद पारी खेली.
विश्वकप 1979
1975 में भारतीय टीम द्वारा औसत प्रदर्शन करने के बाद सबकी नज़रे अब दूसरे विश्वकप यानि 1979 के विश्वकप पर टिकी हुई थी. पहले विश्वकप में भारतीय टीम के लिए कप्तानी करने वाले कप्तान श्रीनिवास वैकेटाराघवन ने इस बार भी टीम की कमान अपने हाथों में ले रखी थी.
पिछली वर्ष की तरह इस वर्ष भी भारत को सीज़न का पहला मैच खेलना था. दिन था 9 जून 1979. मैच खेला जा रहा था, बर्मिघम में.
भारत के खिलाफ इस सीजन का पहला मैच गत चैम्पियन वेस्टइंडीज खेल रही थी. इस मैच में वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय लिया. और वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज रॉबर्टस ने इस फैसले को सही साबित करते हुए भारत के सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर का विकेट ले लिया. गावस्कर के आउट होने के बाद टीम लडखड़ा गई मगर चौथे नम्बर पर उतरे बल्लेबाज गुंडप्पा विश्वनाथ ने 74 रनों की पारी खेलकर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचा दिया. इस मैच में भारत ने 53.1 ओवर खेले और मैच में कुल 190 रन बनाए. मैच में वेस्टइंडीज के सलामी बल्लेबाज गॉर्डैन ग्रीनेज ने शतक लगाकर मैच को एकतरफा बना दिया. वेस्टइंडीज की टीम ने 51.3 ओवर खेलकर ही इस लक्ष्य को 3 विकेट के नुकसान पर जीत लिया.
टूर्नामेंट का पहला मैच गंवाने के बाद टीम को अपना दूसरा मैच खेलना था न्यूजीलैंड के खिलाफ. आपको बता दे कि 1975 में ‘करो या मरो’ मुकाबले में न्यूजीलैंड ने भारत को हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया था. मगर उस बात को हुए 4 साल बीत चुके थे. ऐसा लग रहा था कि इस बार भारत न्यूजीलैंड को हराकर अपनी पिछली हार का बदला ले लेंगे. लेकिंन भारत ऐसा करने में नाकाम रहा और यह मैच 8 विकेट से गंवा दिया.
इस मैच में भारत एक बार फिर पहले बल्लेबाजी करने उतरा मैदान में गावस्कर और अंशुमन गायक्वाड शुरुआती साझेदारी के रुप में उतरे. मगर गायक्वाड कुछ ज्यादा नहीं कर सके और सिर्फ 10 रन बनाकर आउट हो गए. गावस्कर ने एक और धीमी पारी खेली और 144 गेंदों में मात्र 55 रन बनाए.
टीम 55.5 गेंदों में 182 रन बनाकर आउट हो गया. और न्यूजीलैंड को 183 रनों का लक्ष्य दिया. जिसे उन्होंने 57 ओवरों में खेलते हुए ही पा लिया. और इसी के साथ भारत का इस टूर्नामेंट में सफर यहीं समाप्त हो गया.
अब भारत को इस टूर्नामेंट का तीसरा मैच केवल औपचारिक रुप से खेलना था. क्योंकि वह शुरूआती दो मैच हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गए थे.
भारत को यह तीसरा मैच एक एशियाई टीम श्रीलंका के साथ खेलना था. और यह औपचारिक मैच भी भारत ने 47 रनों से गंवा दिया था. गौरतलब है कि इस विश्वकप में भारत एक बार भी 200 रनों का आकंड़ा नहीं पार कर पाया था.
विश्वकप 1983
दो लगातार विश्वकप में करारी हार मिलने के बाद भारत से विश्वकप में अच्छे प्रर्दशन की उम्मीद किसी को नहीं थी. मगर यह कहना गलत नहीं होगा की, इसी विश्वकप के बाद से भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता की बुनियाद रखी गई थी.
यह विश्वकप पिछले दो विश्वकप की तरह इंग्लैंड में ही खेला जा रहा था. 8 टीमों ने ही इस विश्वकप में भी शिरकत की थी.
भारत को इस टूर्नामेंट का पहला मैच गत विजेता वेस्ट-इंडीज के साथ ही खेलना था. जो पिछले दोनों विश्वकप जीत चुकी थी. ऐसे में भारत का पहला मैच ही उन्हें दबाव में ले जाने के लिए काफी था. यह मैच इंग्लैंड के मैनचैस्टर में खेला जा रहा था. मैच में टॉस हुआ और टॉस गत विजेता वेस्टइंडीज के पाले में गिरा. टॉस जीतकर वेस्टइंडीज ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया.
भारतीय टीम से सलामी बल्लेबाजी के रुप में गावस्कर और कांत मैदान पर उतरे. उनके सामने थे होल्डिंग्स, रॉबर्स, मार्शल जैसे गेंदबाज उनके सामने थे. यह मैच भारत ने वेस्टइंडीज को हराकर पूरे विश्व जगत मेंं खलबली मचा दी.
टूर्नामेंट के पहले सेमीफाइनल में मेजबान इंग्लैंड का मुक़ाबला भारत से हुआ. कपिल देव और मोहिंदर अमरनाथ की शानदार गेंदबाज़ी के कारण भारत ने इंग्लैंड को 213 रनों पर ही समेट दिया. जब बल्लेबाज़ी की बारी आई, तो अमरनाथ, यशपाल शर्मा ने शानदार बल्लेबाज़ी कर भारत को 55वें ओवर में ही चार विकेट के नुक़सान पर जीत दिला दी. दूसरे सेमीफाइनल में पाकिस्तान को वेस्टइंडीज ने बुरी तरह हराया. पहले बल्लेबाज़ी करते हुए पाकिस्तान की टीम ने 60 ओवरों में आठ विकेट पर 184 रन बनाए. जवाब में वेस्टइंडीज ने दो विकेट पर ही लक्ष्य हासिल कर लिया. रिचर्ड्स 80 और गोम्स 50 रन पर नाबाद रहे.
फाइनल में वेस्टइंडीज का मुकाबला था भारत से. एक ओर थी दो बार ख़िताब जीतने वाली वेस्टइंडीज की टीम तो दूसरी ओर थी पहले के विश्व कप मैचों में खराब प्रदर्शन करने वाली भारतीय टीम. वेस्टइंडीज ने भारत को सिर्फ़ 183 रनों पर समेट कर शानदार शुरुआत की और जवाब में एक विकेट पर 50 रन भी बना लिए. वेस्टइंडीज समर्थक जीत का जश्न मनाने की तैयारी करने लगे. लेकिन मोहिंदर अरमनाथ और मदन लाल ने शानदार गेंदबाज़ी की वजह से वेस्टइंडीज की पूरी टीम 140 रन बनाकर आउट हो गई और भारत पहली बार विश्व कप का विजेता बना.
गौरतलब है कि पहली बार वेस्टइंडीज को छोड़कर कोई देश विश्व विजेता बना था.
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