भारत के जाने-पहचाने बॉक्सिंग खिलाड़ी जय भगवान जिन्होंने कॉमनवेल्थ में गोल्ड मेडल जीतने के साथ अर्जुन अवार्ड भी मिल चुका है। 2 बार ओलंपिक में पदक ना जीत पाने की निराशा के बावजूद जय भगवान लगातार अपने खेल में सुधार करते रहे। साल 2004 के एथेंस ओलंपिक और 2008 के बिजिंग ओलंपिक में अपनी जगह ना पक्की ना करने के बाद साल 2012 के लंदन ओलंपिक के लिए जय भगवान ने अपनी जगह को पक्का कर लिया था।
शुरूआती जीवन
13 साल की उम्र में जय भगवान को ट्रैक सूट पहनना काफी पसंद था और इसी कारण उन्होंने बॉक्सिंग रिंग में उतरने का भी फैसला लिया। हिसार से आने वाले जय भगवान अपने मकान मालिक के बेटे प्रीतम ठाकुर से काफी प्रभावित थे। प्रीतम जो सेंट्रल फोर्स के एक बॉक्सर खिलाड़ी हैं उनकी तरह ही जय भगवान ने भी खेलना शुरू किया।
अपने परिवार की आर्थिक हालात में सुधार और फ्री ट्रैक सूट पाने के लिए जय भगवान ने बॉक्सिंग में करियर बनाने का फैसला लिया जिससे सरकारी नौकरी भी मिल सके। जय भगवान बचपन से ही काफी हैल्दी थे और उनकी मां भी अपने बेटे की डाइट को लेकर काफी सतर्क रहती थी। जय ने हिसार में महाबीर स्टेडियम में बॉक्सिंग की ट्रेनिंग लेना शुरू की और उसके बाद उन्होंने अपने जीवन में पीछे मुड़कर नहीं देखा।
निजी जीवन
11 मई 1985 को हरियाणा के हिसार में जय भगवान का जन्म हुआ था। जय के पिता का नाम राजपाल सिंह और मां का नाम बीरमती सिंह है। जय का जन्म 2 बहनों के बाद हुआ था, तो उस कारण वह अपनी मां के काफी दुलारे थे। जय एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं और उनके पिता हरियाणा के पीडब्लूडी विभाग में नौकरी करते थे।
बच्चों की हर इच्छा को जय के पिता पूरा करने की पूरी कोशिश करते रहे और अपने बेटे के पैशन को देखते हुए पूरा परिवार शहर से गांव में जाकर रहने लगा जिससे उनके दूध की जरूरतों को पूरा किया जा सके, लेकिन जल्द ही जय को पंजाब पुलिस में नौकरी मिल गयी और परिवार के आर्थिक हालात में सुधार देखने को मिला।
पहले पंजाब पुलिस में कांस्टेबल की नौकरी करने के बाद जय मौजूदा समय में रेलवे में टिकट परिक्षक के पद पर तैनात हैं। फिलहाल अभी जय ने अपने बॉक्सिंग के सपने को नहीं छोड़ा है। 34 साल के बॉक्सर जय भगवान ने 30 नवंबर 2012 में डॉक्टर मीलू लांबा से शादी की।
प्रोफेशनल जीवन
एशियन चैंपियनशिप में 60 किलोग्राम लाइटवेट डिसीप्लिन बॉक्सिंग में 2 मेडल जीतने जय भगवान ने जीते हैं, वहीं साल 2010 में नई दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स जय ने कांस्य पदक को अपने नाम पर किया था। साल 2011 में बाकू में हुए वर्ल्ड एमेचर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में जय ने क्वाटरफाइनल तक का सफर तय किया था।
गुरबक्श सिंह के अंडर में ट्रेनिंग करने वाले जय भगवान ने साल 2012 के लंदन ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाइ किया था। जय ने लंदन ओलंपिक में शानदार शुरूआत की थी, लेकिन कजाकिस्तान के बॉक्सर खिलाड़ी से हारने के बाद उन्होंने 16 वें स्थान पर खत्म किया था।
अवार्ड
बॉक्सिंग में शानदार योगदान देने के लिए साल 2014 में अर्जुन पुरस्कार मिला।
अचीवमेंट
नई दिल्ली में हुए साल 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में लाइटवेट कैटेगरी में कांस्य पदक जीता।
निजी जानकारी
विवाद
अपने शानदार खेल, अचीवमेंट और प्रदर्शन के अलावा यह बॉक्सर खिलाड़ी कुछ विवादों के कारण भी सुर्खियों में रहा है, जिसमें जब जय ने हिसार डिस्ट्रिक में स्थित अमपुर मंडी में 1 व्यापारी से 1 लाख रूपये की रिश्वत ली थी। इसके बाद उन्हें अपनी पुलिस की नौकरी से भी उस समय निलंबित कर दिया गया था, जब जय ने सिरसा में एक होटल मैनेजर के साथ छेड़छाड़ की थी।
नेटवर्थ
जय भगवान की नेटवर्थ को लेकर बात करी जाए तो उसको लेकर किसी भी तरह की कोई जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
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