महाराष्ट्र के नासिक शहर से आने वाली भारत की लम्बी दूरी की महिला धावक कविता तुंगर, जिन्होंने साल 2010 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में 10000 मीटर की रेस में कांस्य पदक अपने नाम पर किया था, इसके अलावा 2010 में ही हुए एशियन गेम्स में भी 10000 मीटर इवेंट में भी सिल्वर पदक जीता था।
शुरूआती जीवन
कविता का शुरूआती जीवन काफी कठिनाइयों में बीता है और उन्हें अपने सपने को पूरा करने के लिए काफी कड़ी मेहनत करनी पड़ी है। कविता का नाम उन एथलीटो में शामिल होता हैं, जिनका परिवार आर्थिक रूप से अधिक मजबूत नहीं था। आर्थिक तौर पर कमजोर होने के बावजूद 34 साल की इस एथलीट ने इसी को अपना करियर बनाने का सपना देखा।
जिसके बाद उन्होंने अपने स्कूल के दिनों से 20 किलोमीटर नंगे पॉंव ही ट्रेनिंग करना शुरू किया 14 दिनों की इस ट्रेनिंग के बाद ही 16 साल की कविता ने अपना पहला नेशनल सिल्वर मेडल जीत लिया। कविता का एक बड़ा और एक छोटा भाई है, जिसके लिए कविता ने अपने परिवार को आर्थिक तौर पर मजबूत करने के लिए इस करियर को चुना।
निजी जीवन
इस प्रतिभाशाली एथलीट का जन्म 5 मई 1985 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के स्वरपदा गांव में हुआ था। एक पिछले परिवार में जन्म लेनी वाली कविता को एथलेटिक में करियर बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी। नासिक में रनिंग करना एक खेल के तौर पर नहीं था, बल्कि वहां के लोगों को पानी लाने के लिए भी घंटो भागना पड़ता था।
वहां इसी वातावरण की वजह से कविता के अंदर एक एथलेटिक को जन्म दे गया। कविता की दिलचस्पी लम्बी दूरी की रनिंग करने में हैं, क्योंकि इसमें ट्रेनिंग के लिए अधिक खर्चा नहीं करना पड़ता है। कविता का परिवार आर्थिक तौर पर उतना मजबूत नहीं था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए सारी परेशानियों को पार किया।
साल 2011 में नासिक में रावत ने एकलव्य एथलेटिक्स एंड स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट शुरू किया जिससे वह आने वाले युवा एथलेटिक खिलाड़ियों को लिए एक सुविधा मुहैया करा सके जिसमें वह उन बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे भी देती हैं। साल 2014 में कविता ने महेश तुंगर जो महाराष्ट्र पॉवर कॉरपोरेशन में एक काम करते हैं, उनसे शादी की।
प्रोफेशनल लाइफ
कविता उस समय ख़बरो में आयी जब उन्होंने साल 2009 में ग्वांजाउ में हुए एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया था। इस जीत के बाद साल 2010 में नयी दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में कविता ने 10000 मीटर रेस में कांस्य पदक भी जीता। कविता की यह जीत मिल्खा सिंह के साल 1958 के कॉमनवेल्थ गेम्स में अकेले ट्रैक इवेंट में पदक जीतने के बाद पहली खिलाड़ी बनी थी।
साल 2010 में ग्वांजाउ में हुए एशियन गेम्स में 10000 मीटर रेस में 31 मिनट 51 सेकेंड में रेस को पूरा करके सिल्वर पदक जीता था, इसी इवेंट में भारत की प्रीजा श्रीधरन ने गोल्ड मेडल जीता था जिससे भारत को 2 पदक एक ही इवेंट में जीतने की सफलता प्राप्त हुई थी।
इसके बाद साल 2011 में रावत ने 5000 मीटर और 10000 मीटर में नेशनल गेम्स में हिस्सा लेते हुए दोनों ही इवेंट में रिकॉर्ड बनाया था। साल 2012 में कविता को अर्जुना अवार्ड मिला था, तो वहीं साल 2015 में उन्हें सुवरनारत्ना अवार्ड दिया गया था।
अवार्ड्स
अचीवमेंट
एशियन गेम्स
कॉमनवेल्थ गेम्स
साल 2010 में नयी दिल्ली में हुए गेम्स में 10000 मीटर इवेंट में कांस्य पदक जीता।
निजी जानकारी
विवाद
एथलीट कविता रावत उस समय खबरो में आयी थी, जब उन्होंने अपनी साथी रनर खिलाड़ी ओपी. जैशा के शिकायत इंडियन ऑफीशियल से की थी, जिसको लेकर उन्होंने पूरी तरह से इंकार कर दिया था। जैशा ने इस बात को कहा था, कि रियो ओलंपिक के दौरान महिला मैराथन इवेंट के दौरान ऑफीशियल्स को किसी भी प्रकार की कोई चिंता ही नहीं थी, जिसके बाद रावत ने एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया से सभी जरूरी चीजे मुहैया कराने के लिए कहा था। इसके अलावा रावत किसी भी तरह के विवाद में नहीं देखी गयी हैं।
नेटवर्थ
कविता रावत की नेटवर्थ को लेकर बात करी जाए तो वह लगभग 1 मिलियन डॉलर के आसपास हो सकती है।
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