क्रिकेट के खेल मे गेंद और गेंदबाज एक अचुक पहलु है, और अगर इनसे चुक हो जाती है तो पुरा मैच ही पलट जाता है। ऐसा नही है कि गेंदबाजो से क नही होती है, गेंदबाजो से भी चुक होती है लेकिन किसी किसी मौको पर ऐसा होता है। गेंदबाजी एक ऐसा पहलु है जिसका मददगार पिच भी होता है और मौसम भी मेहरबान होता है। कहते है कि पिच मे अगर नमी है तो तेज गेंदबाजो के लिए मददगार साबित होता है और अगर पिच सुखा होता है तो स्पिन गेंदबाजो को गेंद टर्न कराने मे मदद मिलती है। तेज गेंदबाज के लिए मौसम भी मेहरबान होता है, जब मैदान पर हवा चल रहा होती है तो ऐसे समय मे तेज गेंदबाजो के गेंद कांटा बदलता है।
आज इस आर्टिकल मे आप जानेंगे क्रिकेट गेंद के बारे मे क्रिकेट गेंद का वजन कितना होता है, कितने प्रकार के होते है क्रिकेट गेंद और क्या है हरेक बॉल के लिए खेल प्रारुप।
क्रिकेट गेंद का वजन कितना होता
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचो मे खेले जाने वाले गेंद का वजन करीब 155.9 ग्राम से लेकर 163 ग्राम का होता है और बात परीधी कि करें 22.4 से लेकर 22.9 सेमि का होता है।
रंग और ब्रांड के अनुसार कितने प्रकार के होते है क्रिकेट गेंद
रंगो के अनुसार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मे इस्तेमाल किया जानेवाला गेंद – अंतरराष्ट्रीय खेल मे एक जमाने से हि दो गेंदो का इस्तेमाल किया जा रहा था, वनडे और टी-20 प्रारुप मे सफेद गेंद और डे टेस्ट के लिए लाल गेंद का इस्तेमाल किया जा रहा था और अब के समय मे डे-नाइट टेस्ट भी क्रिकेट के प्रारुप मे जुड गया है, जिसमे एक नयी गेंद(पिंक गेंद) को Introduce किया गया है। इन सभी गेंदो के बारे मे जानेंगे।
आज के समय रंगो के अलावा भी गेंद अलग-अलग ब्रांड के भी होते है। जिसमे से अंतरराष्ट्रीय मैचो मे सबसे ज्यादा Kookaburra के गेंदो का इस्तेमाल किया जाता है और भारतीय टीम SG के गेंदो का इसतेमाल किया जाता है।
Dukes Cricket Ball, Readers Cricket Ball, Gun & Moore Cricket Ball, Kookaburra Cricket Ball, Slazenger Cricket Ball, SG Cricket Ball
क्या है हरेक बॉल के लिए खेल प्रारुप
क्रिकेट के खेल मे तीन से चार अलग-अलग प्रारुपो मे खेल होते है,
पहला है टेस्ट क्रिकेट जिसमे 5 दिनो तक लाल गेंद से मैच खेला जाता है, इसके पिछे का तर्क या है कि टेस्ट मैच मे सभी खिलाडीयो कि जर्सी का रंग व्हाइट होता है और सूर्य कि तेज किरणो मे भी लाल रंग देखा जा सके। भारतीय टीम देश मे टेस्ट मैच खेलने के दौरान SG के गेंदो का इस्तेमाल करती है।
दूसरा है डे-नाइट टेस्ट, हांलाकी क्रिकेट का खेल का ये प्रारुप पुरी तरह से तो शुरु नही हुयी लेकिन क्रिकेट से जुडे हरेक ने देश एक श्रृंखला खेल चुकि है। क्रिकेट के इस प्रारुप मे पिंक गेंद का इस्तमाल किया जाता है। इस गेंद के पिछे का तर्क ये है कि रात के अंधेरो मे फल्ड लाइट के अंदर लाल गेंद सही तरीके से नही दिखती है तो ऐसे मे पिंक गेंद इस चिज के लिए बेहतर विकल्प है।
वैसे क्रिकेट के खेल के दो प्रारुप अभी है लेकिन दोनो(एकदिवसीय मैच और टी-20) ही प्रारुपो मे व्हाइट गेंद का इस्तेमाल किया जाता है। इसके पिछे का तर्क ये है कि खिलाडीयो कि जर्सी अलग-अलग रंगो कि होती है तो ऐसे मे व्हाइट गेंद बेहतर विकल्प है। भारतीय टीम देश मे वनडे और टी-20 मैच खेलने के दौरान Kookaburra के गेंदो का इस्तेमाल करती है।
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