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क्या है क्रिकेट फिल्डिंग के नियम

क्रिकेट के खेल मे गेंद और गेंदबाज एक अचुक पहलु है, और अगर इनसे चुक हो जाती है तो पुरा मैच ही पलट जाता है। ऐसा नही है कि गेंदबाजो से क नही होती है, गेंदबाजो से भी चुक होती है लेकिन किसी किसी मौको पर ऐसा होता है। गेंदबाजी एक ऐसा पहलु है जिसका मददगार पिच भी होता है और मौसम भी मेहरबान होता है। कहते है कि पिच मे अगर नमी है तो तेज गेंदबाजो के लिए मददगार साबित होता है और अगर पिच सुखा होता है तो स्पिन गेंदबाजो को गेंद टर्न कराने मे मदद मिलती है।

तेज गेंदबाज के लिए मौसम भी मेहरबान होता है, जब मैदान पर हवा चल रहा होती है तो ऐसे समय मे तेज गेंदबाजो के गेंद कांटा बदलता है।  एक गेंदबाज हमेशा विकेट के तलाश मे रहता है, कई बार गेंदबाजो को विकेट उनके कुछ बेहतर गेंद से विकेट लेकर जाता है लेकिन कई बार विकेट गेंदबाज का नही फिल्डर का हो जाता है। फिल्डर का होता है क्योकि फिल्डर अपनी सारी मेहनत को लगाकर कैच लेते है और वो कैच मैच को पलटने के लिए कापी होता है। अगर ये कहा जाये गेंदबाज विकेट के लिए फिल्डर पर निर्भर रहता है क्योकि कई बार ऐसे मौके होते है जब फिल्डर कैच लेकर गेंदबाज और टीम को विकेट दिलाते है।

आज इस आर्टिकल मे आप जानेंगे क्रिकेट फिल्डिंग नियमो के बारे मे।

क्षेत्ररक्षण के कुछ ऐसे नियम भी है, जो आम लोगो को पता नही होता है जैसे कि अगर कोई फिल्डर गेंद को रोकने के लिए या फिर कैच लेने के लिए अपने टोपी या हेल्मेट का इस्तेमाल करता है तो दूसरे टीम को 5 रन पेनाल्टी के तौर पर दिया जाता है। ये नियमे आज के समय मे देखने को नही मिलता है क्योकि कोई भी खिलाडी ये गलतीयां नही करता है।

ICC ने क्रिकेट के नियमो को धारा 41 मे विस्तारित करके बताया है, जो इस प्रकार है।

नियम 1-

ICC के द्वारा बनाये गये पहले चार नियम खिलाड़ियों, अंपायरों और स्कोर बनाने वालों के लिए है।

नियम 1: खिलाड़ी. एक क्रिकेट टीम मे एक कप्तान को लेकर ग्यारह खिलाड़ी होते हैं।

नियम 2- खिलाडीयो के लिए विकल्प मैच  मे एक घायल क्षेत्ररक्षक की जगह एक दूसरा खिलाड़ी को लाया जा सकता है। हालांकि एक स्थानापन्न खिलाड़ी बल्लेबाजी, गेंदबाजी, विकेट कीपिंग या कप्तानी की भूमिका नहीं निभा सकता है। ऐसे मे अगर मूल खिलाड़ी ठीक हो गया हो तो वह वापस आ सकता है।  हालांकी पहले के समय मे बल्लेबाज चोटील होने के बाद रनर रख सकता है लेकिन ये नियम भी अब नही है।

नियम 3- अंपायर के लिए खेल मे दो अंपायर होते हैं जो नियमों को लागू करते है और करवाते भी है, सभी जरुरी फैसले लेते हैं और अपने फैसले स्कोर बनाने वालो को प्रेषित करते हैं।

नियम 4- स्कोरर के लिए इस खेल मे दो स्कोरर होते हैं जो अंपायर के संकेतों का पर स्कोरबोर्ड पर स्कोर बनाते है।

उपकरण और पिच की रूपरेखा तैयार करना

नियम 5: गेंद क्रिकेट की गेंद की परिधि 8 13/16 और 9 इंच (22.4 सेमी और 22.9 सेमी) के बीच होती है और इसका वजन 5.5 और 5.75 औंस (155.9 ग्राम और 163 ग्राम) के बीच होता है। एक बार मे केवल एक गेंद का इस्तेमाल किया जाता है जब तक कि यह खो नहीं जाता, जब इसकी जगह इसके सामान घिसावट वाली एक दूसरी गेंद ली जाती है। इसे प्रत्येक पारी की शुरुआत मे भी बदला जाता है और क्षेत्ररक्षण पक्ष के अनुरोध पर भी, जब ओवरों की एक ख़ास संख्या (टेस्ट मैचों मे 80, एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों मे 34) की गेंदबाजी कर लिए जाने के बाद इसकी जगह नयी गेंद ले ली जाती है।

नियम 6- बैट के लिए बैट लंबाई मे 38 इंच (97 सेन्टीमीटर) से अधिक नहीं होता है और इसकी चौडाई 4.25 इंच (10.8 सेन्टीमीटर) से अधिक नही होती है और नही होना चाहिए। बल्ले को पकड़ने वाले हाथ या दस्ताने को बल्ले का हिस्सा माना जाता है।

नियम 7- पिच  के लिए पिच मैदान का एक आयताकार क्षेत्र है जो 22 गज़ (20 मी॰) लंबा और 10 फीट (3.0 मी॰) चौड़ा होता है। मैदान के अधिकारी पिच का चयन करते हैं और इसे तैयार करते हैं, लेकिन एक बार खेल शुरू हो जाने के बाद पिच पर जो कुछ भी होता है उस पर अंपायर का नियंत्रण होता है। अंपायर इस बात का भी फैसला लेते हैं कि क्या पिच खेल के लिए उपयुक्त है या नहीं और अगर वे इसे अनुपयुक्त समझते हैं तो दोनों कप्तानों की सहमति से पिच को बदल सकते हैं।

नियम 8- विकेट के लिए  विकेट मे लकड़ी के तीन स्टंप होते हैं जिनकी लंबाई 28 इंच (71 सेन्टीमीटर) होती है। स्टंपों को प्रत्येक स्टंप के बीच एक समान दूरी के साथ बल्लेबाजी क्रीज के पास रखा जाता है। उन्हें इस प्रकार रखा जाता है कि वे 9 इंच (23 सेन्टीमीटर) चौड़ा रहें. स्टंपों के ऊपर लकड़ी की दो गिल्लियां रखी जाती हैं। गिल्लियां स्टंप के 0.5 इंच (1.3 सेन्टीमीटर) से अधिक ऊपर नहीं रखी जानी चाहिए और पुरुषों के क्रिकेट के लिए अनिवार्य रूप से 4 5⁄16 इंच (10.95 सेन्टीमीटर) लंबी होनी चाहिए।

नियम 9- बॉलिंग पॉपिंग और रिटर्न क्रीज के लिए

 यह नियम क्रीज के आयामों और स्थानों को निर्धारित करता है। गेंदबाजी क्रीज, जो वह लाइन है जिसके बीच मे स्टंपों को रखा जाता है, यह लाइन पिच के प्रत्येक छोर पर खींची जाती है जिससे कि पिच के उस छोर पर स्टंपों के सेट मे तीन स्टंप उस पर पड़ें (और इसके परिणाम स्वरूप यह दोनों मिडिल स्टंपों के केंद्रों को जोड़ने वाली एक काल्पनिक रेखा के लंबवत होती है). प्रत्येक गेंदबाजी क्रीज लंबाई मे 8 फीट 8 इंच (2.64 मीटर) होना चाहिए जो प्रत्येक छोर पर मिडिल स्टंप पर केंद्रित होना चाहिए और प्रत्येक गेंदबाजी क्रीज दोनों मे से एक रिटर्न क्रीज पर समाप्त होता है। पॉपिंग क्रीज, जो यह निर्धारित करता है कि बल्लेबाज अपने स्थान पर मौजूद है या नहीं और जिसका इस्तेमाल फ्रंट-फुट के नो बॉल को निर्धारित करने के लिए किया जाता है।

नियम 10- खेल क्षेत्र का निर्माण और रखरखाव के लिए

क्रिकेट मे जब कोई गेंद फेंकी जाती है तो यह हमेशा पिच पर बाउंस होता है और गेंद किस तरह का आचरण करेगी यह काफी हद तक पिच की स्थिति पर निर्भर करता है।

नियम 11- पिच को कवर करना

 पिच को कवर करना इस बात को प्रभावित करता है कि इस पर बाउंस करते समय गेंद की प्रतिक्रिया कैसी होगी।

खेल की संरचना

नियम 12- पारी के लिए

हम सभी जानते है कि टेस्ट क्रिकेट के दो पारीयो का खेल होता है और ये नियम इसी के अंतर्गत आता है।

नियम 13-  फॉलो-ऑन के लिए 

हम सभी जानते है कि टेस्ट क्रिकेट के दो पारीयो का खेल होता है और जो टीम ज्यादा रन बनाती है और दूसरी टीम कम स्कोर पर ऑलआउट हो जाती है तो ऐसे मे दूसरी टीम को फॉलो-ऑन खेलना पडता है।

नियम 14- पारी के लिए

कप्तान चाहे तो पारी की घोषणा कर सकता है और दूसरे टीम को बल्लेबाजी अधिकार सौंप सकती है।

नियम 15- अंतराल के लिए

टेस्ट के खेल मे प्रत्येक दिन के खेल के बीच मे अंतराल होते है, पारियों के बीच मे एक दस-मिनट का अंतराल और दोपहर का भोजन, चाय और ड्रिंक्स के अंतराल।

नियम 16- खेल की शुरुआत और खेल की समाप्ति

अंपायर तय करते है कि खेल कि शुरुआत कब होगी और खेल कब खत्म होगा क्योकि टेस्ट के पांचवे दिन खेल को खत्म किया जाता है।

नियम 17- मैदान पर अभ्यास

खेल के शुरु होने के बाद उस मैदान पर कोई भी खिलाडी अभ्यास नही कर सकता है।

स्कोरिंग और जीत

नियम 18- रन बनाने के लिए

रन तब बनते है जब दो बल्लेबाज पिच पर एक दूसरे के छोर तक दौड़ लगाते है। एक गेंद से कई रन बनाए जा सकते है, आप दौड कर 4 से 5 रन भी ले सकते है।

नियम 19- बाउंड्री के लिए

बाउंड्री मैदान के किनारे चारो ओर चिह्नित की जाती है या बनायी जाती है। अगर कोई बल्लेबाज गेंद को बांउड्री के पार हवा मे मारता है तो 6 रन होता है और अगर बडल जमीन से जुडी बांउड्री के पार जाता है तो चौका होता है।

नियम 20- लॉस्ट बॉल के लिए

नाम के ही अनुसार अगर खेल के बिच मे गेंद खो जाता है तो गेंदबाजी कर रहा टीम लॉस्ट बॉल का मांग कर सकता है और बल्लेबाजी कर रहा टीम पैनील्टी रन का मांग कर सकता है, जो कि 6 रन होता है और ये रन दौड कर ले सकता है या लिया जाता है।

नियम 21- परिणाम के लिए

ये आम नियम है जो हम सभी को मालुम होगा कि जो टीम अधिक रन बनाती है वही मैच का विजेता बनती है। अगर दोनों टीमे एक बराबर संख्या मे रन बनाती है तो मैच टाई हो जाता है। हालांकि मैच समय सीमा के बाहर जा सकता है इससे पहले कि सभी पारियां पूरी हो सके। अगर मैच मे बारीश हो जाता है तो ऐसे मैच को रद्द कर दिया जाता है।

नियम 22- ओवर के लिए

ये आम नियम है जो हम सभी को मालुम होगा कि एक ओवर मे वाइड और नो-बॉल को छोड़ दें तो एक ओवर मे छह गेंदों की गेंदबाजी होती है। पिच के विपरीत छोरों से लगातार ओवर डाले जाते हैं। एक गेंदबाज लगातार दो ओवर की गेंदबाजी नहीं भी कर सकता है।

नियम 23- डेड बॉल के लिए

ये आम नियम है जो हम सभी को मालुम होगा कि गेंद खेल मे उस समय आता है जब गेंदबाज अपनी दौड़ शुरू करता है और यह उस समय बेकार हो जाता है जब उस गेंद से सभी तरह की गतिविधि खत्म हो जाती है। हालांकी अगर गेंदबाज गेंद करता है और गेंद 3 टप्पो मे बल्लेबाज तक पहुंचता है तो भी गेंद डेड बॉल ही कहलाता है।

नियम 24- नो-बॉल के लिए

ये आम नियम है जो हम सभी को मालुम होगा कि कोई गेंद कई कारणों से नो बॉल हो सकता है।

नॉ-बॉल कई सारे कारणो से हो सकता है , पहला कारण है गेंद अगर विकेट के उपर से चला जाता है तो भी बॉल नॉ-बॉल होता है। गेंदबाज अगर क्रिज के पार होकर गेंद फेकता है तबभी गेंद नॉ-बॉल होता है। अगर फिल्डिंग मे लेग साइड मे 6 फिल्डर है तबभी गेंद नॉ-बॉल होता है और भी कई ऐसे नियम है जिससे नॉ-बॉल होता है।

नियम 25- वाइड बॉल के लिए

ये आम नियम है जो हम सभी को मालुम होगा कि वाइड बॉस किसे कहते है। अगर कोई बाउंसर बॉल बल्लेबाज के सर ज्यादा उपर से निकलता है या फिर कोई गेंद विकेट से करीब वाइड लाइन से गेंद बाहर होती है तो तब भी गेंद को वाइड करार दिया जाता है और बल्लेबाजी कर रहे टीम को 1 रन अतिरिक्त के तौर पर दिया जाता है।

नियम 26- बाय और लेग बाय के लिए

ये आम नियम है जो हम सभी को मालुम होगा कि अगर बल्लेबाज गेंद को खेलने का कोशीश करता है और गेंद बल्ले कि जगह किसी चिज से लग कर दुर जाती है तो उसे बाय के रुप मे दिया जाता है, जिसमे बल्लेबाजी कर रहे टीम को 1 रन अतिरिक्त को तौर पर दिया जाता है। इसमे बल्लेबाज के खाते मे गेंद जुड जाती है लेकिन रन नही जुडता है।

ये आम नियम है जो हम सभी को मालुम होगा कि अगर बल्लेबाज गेंद को खेलने का कोशीश करता है और गेंद बल्ले कि जगह पैर से लगकर दुर जाती है तो उसे लेग बाय के रुप मे दिया जाता है, जिसमे बल्लेबाजी कर रहे टीम को 1 रन अतिरिक्त को तौर पर दिया जाता है। इसमे बल्लेबाज के खाते मे गेंद जुड जाती है लेकिन रन नही जुडता है।

आउट करने की प्रक्रियाएं

नियम 27- अपील के लिए

ये आम नियम है जो हम सभी को मालुम होगा कि अगर बल्लेबाज गेंद को खेलने का कोशीश करता है और गेंद को नही खेल पाता है, ऐसे मे अगर फिल्डरो का मानना है कि बल्लेबाज आउट है तो वे अंपायर से पूछ सकते है हाऊ इज दैट। इसे ऐसे भी समझ सकते है कि गेंदबाज को जब ये लगता है कि बल्लेबाज आउट है तो  वो अंपायर से बल्लेबाज के आउट का अपील करता है।

नियम 28- विकेट का नीचे होना

ये आम नियम है जो हम सभी को मालुम होगा कि अगर बल्लेबाज गेंद को खेलने का कोशीश करता है और खेलने मे असमर्थ होता है, ऐसे मे बॉल विकेट से जाकर लगती है और विकेट गिर जाता है। हालंकी विकेट सिर्फ गेंदबाजो से ही नही बल्लेबाजो से भी गिर जाती है तो बल्लेबाज को आउट करार दिया जाता है।

नियम 29- बल्लेबाज क्रिज से बाहर हो

ये आम नियम है जो हम सभी को मालुम होगा कि अगर बल्लेबाज गेंद को खेलने का कोशीश करता है और गेंद को खेलने मे क्रिज से बाहर चला जाता है तो स्टंप आउट हो सकता है। बल्लेबाज ने गेंद को खेलकर रन चुराना चाहता है और इस रन लेने के क्रम मे बल्लेबाज क्रिज तक नही पहुंचता है और फिल्डर गेंद से विकेट को गिरा देते है तो तबभी बल्लेबाज को आउट करार दिया जाता है।

आउट होने के तरीके

नियम 30 से 39 तक उन अलग-अलग तरीकों पर बात करेंगे, जिसके जरिये किसी बल्लेबाज को आउट किया जा सकता है या फिर इन तरीको से बल्लेबाज को आउट किया जाता है। इन तरीकों के अलावा बल्लेबाज अपने मन से रिटायर होकर पवेलियन जा सकता है, यह प्रावधान नियम 2 के तहत आती है।

नियम 30- बोल्ड के लिए

ये आम नियम है जो हम सभी को मालुम होगा कि अगर बल्लेबाज गेंद को खेलने का कोशीश करता है और गेंद को खेलने मे नाकाम होता है, ऐसे मे गेंद सिधे विकेट से जाकर लगती है तो बल्लेबाज को बोल्ड आउट दिया जाता है।  

नियम 31- टाइम्ड टाइम के लिए

ये आम नियम है जो हम सभी मे से कुछ ही लोगो को मालुम होगा कि अगर बल्लेबाज आउट हो गया है और दूसरे बल्लेबाज को कमैदान पर आने मे 3 मिनट से ज्यादा का वक्त लग जाता है तो अगर विपक्षी टीम चाहे तो बल्लेबाज के आउट का अपील कर सकता है और बल्लेबाज को आउट करार दिया जाता है। हांलाकी ये चिज क्रिकेट मे एक अरसो से देखने को नही मिली है।

नियम 32- कैच आउट के लिए

ये आम नियम है जो हम सभी को मालुम होगा कि अगर बल्लेबाज गेंद को खेलने का कोशीश करता है और अगर कोई गेंद बल्ले या बल्ले को पकड़ने वाले हाथ को लगती है और उसके बाद गेंद के हवा मे रहते ही फिल्डर गेंद को पकड ले तो बल्लेबाज को आउट करार दिया जाता है और हम सू ने मैचो मे देखा ही होगा कई ऐसे करीश्माई कैच को।  

नियम 33- गेंद को हैंडल किया जाना

ये आम नियम है जो हम सभी मे से कुछ ही लोगो को मालुम होगा अगर कोई बल्लेबाज विपक्षी टीम की सहमति के बिना जान-बूझकर एक ऐसे बॉल को हाथ से हैंडल करता है जो बल्ले को नहीं छूती है तो बल्लेबाज को आउट करार दिया जाता है।

नियम 34- गेंद को दो बार मारना

ये आम नियम है जो हम सभी मे से कुछ ही लोगो को मालुम होगा अगर कोई बल्लेबाज सिर्फ आपके विकेट को बचाने के मकसद से या विपक्षी टीम की सहमति के अलावा गेंद को बल्ले से दो बार मारता है तो बल्लेबाज को आउट करार दिया जाता है।

नियम 35- हिट विकेट के लिए

ये आम नियम है जो हम सभी को मालुम होगा कि अगर बल्लेबाज गेंद को खेलने का कोशीश करता है और बल्लेबाज गेंद को हिट करने के बदले विकेट को हिट करदे या गलती से ही बल्लेबाज से बल्ला विकेट को लग जाये तो बल्लेबाज को हिट विकेट आउट दिया जाता है। हांलाकि सिर्फ बल्ला ही नही बल्लेबाज का हेल्मेट या टोपी कुछ भी विकेट के उपर गिरता है तो तबभी बल्लेबाज को हिट विकेट आउट दिया जाता है।

नियम 36- लेग बिफोर विकेट (एलबीडब्ल्यू) के लिए

ये आम नियम है जो हम सभी को मालुम होगा कि अगर बल्लेबाज गेंद को खेलने का कोशीश करता है और गेंद बल्ले कि जगह पैर से लगती है और बल्लेबाज का पैर विकेट के सामने होता है तो बल्लेबाज को आउट करार दिया जाता है। हालांकी आउट देने से पहले अंपायर इस बात का पुरा ध्यान देते है कि गेंद लेग साइड मे पिच ना कर रही हो, अगर गेंद लेग साइड मे पिच करती है लेग बिफोर विकेट का सवाल ही नही होता है।

नियम 37- फील्ड को बाधित करना

ये आम नियम है जो हम सभी मे से कुछ ही लोगो को मालुम होगा अगर कोई बल्लेबाज जानबूझकर कोई ऐसा काम करता है जिससे फिल्डर बाधित हो तो बल्लेबाज को बल्लेबाज को आउट करार दिया जाता है।

नियम 38- रन आउट के लिए और नियम 39- स्टम्प्ड के लिए

ये आम नियम है जो हम सभी को मालुम होगा कि अगर बल्लेबाज गेंद को खेलने का कोशीश करता है और खेलने मे असमर्थ होता है, ऐसे मे बॉल विकेट से जाकर लगती है और विकेट गिर जाता है। हालंकी विकेट सिर्फ गेंदबाजो से ही नही बल्लेबाजो से भी गिर जाती है तो बल्लेबाज को आउट करार दिया जाता है।

नियम 40- विकेट-कीपर के लिए

विकेट-कीपर गेंदबाजी करने वाली टीम की ओर से वह नामित खिलाड़ी है जो बल्लेबाज के स्टंपों के पीछे खड़े रहने के लिए अधिकृत है। वह अपनी टीम का एक मात्र खिलाड़ी है जिसे दस्ताने और बाहरी लेग गार्ड पहनने की अनुमति दी गयी है।

नियम 41- क्षेत्ररक्षक के लिए

गेंदबाजी पक्ष के सभी ग्यारह क्रिकेटर क्षेत्ररक्षक होते हैं। क्षेत्ररक्षकों को गेंद पकड़ने के लिए, रनों और चौकों को रोकने के लिए और गेंद को कैच कर या रन आउट के रूप मे बल्लेबाज को आउट करने के लिए मैदान पर लगाया जाता है।

 

  

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