भारत के लिए लम्बी दूरी की रेस में हिस्सा लेने वाली महिला धावक ललिता बाबर जो 3000 मीटर स्टीपलचेज इवेंट में खेलती हैं। ललिता देश की जानी पहचानी एथलीट हैं, साल 2015 में इंडिया स्पोर्ट्स अवार्ड्स में ललिता बाबर को स्पोर्ट्स पर्सन ऑफ दी इयर का खिताब दिया गया था।
शुरूआती जीवन
ललिता बाबर का जन्म 2 जून 1989 को हुआ था, एक किसान परिवार में जन्म लेनी वाली ललिता महाराष्ट्र के सतारा जिले की रहने वाली हैं। काफी कम उम्र में ही ललिता ने अपने एथलेटिक्स के करियर की शुरूआत कर दी थी। ललिता ने खुद को लम्बी दूरी की धावक के रूप में स्थापित किया। बचपन से ही ललिता का खेलो के प्रति काफी लगाव था।
ललिता को शुरू में आगे बढ़ने के लिए काफी परेशानियों का भी सामना करना पड़ा लेकिन वह सभी पड़ावो को पार करती हुई आगे बढ़ती रही और देश को गर्व करने का मौका दिया। जब उन्होंने गोल्ड मेडल जीता तो वह हर एक उस इंसान के लिए ललिता की कहानी प्रेरणादायक बन गयी जो अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहती हैं। पूणे में खेले गए अंडर20 नेशनल चैंपियनशिप में ललिता ने अपना पहला गोल्ड मेडल जीता था।
पर्सनल लाइफ
ललिता के माता-पिता एक एक किसान हैं, जिस गांव में ललिता रहती हैं, उसे सूखे से काफी गुजरना पड़ता है, जिस कारण उनकी खेती पर भी काफी असर पड़ता है। जिस गांव में ललिता रहती है, उसका नाम मोही है जो एक पिछड़े हुए एरिया में आता है, जिस कारण वहां की लड़कियों को अपने सपने पूरे करने की इजाजत नहीं दी जाती है और जल्द ही उनकी शादी कर दी जाती है।
ललिता की बहन की शादी सिर्फ 18 साल की उम्र में कर दी गयी थी, लेकिन ललिता के माता-पिता ने उन्हें अपने सपनों को पूरा करने की छूट दी जिससे वह एक एथलीट बन सके। उन्होंने अपनी बेटी के सपने और उसकी काबिलियत को समझ लिया था और इसी कारण ललिता ने अपनी माता को प्रॉमिस किया था, कि जब अपने सारे लक्ष्य को हासिल कर लेंगी उसके बाद शादी कर लेंगी।
26 साल की उम्र में ललिता ने अपनी मां से किया हुआ वादा निभाते हुए आईआरएस ऑफीसर संदीप भोसले से शादी कर ली। अपनी शादी के कारण वह साल 2017 में हुई एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं ले सकी। एथलेटिक फील्ड से ललिता ने थोड़ा ब्रेक लेते हुए अपने पति और सास-ससुर के साथ समय बिताया।
अक्टूबर 2017 में ललिता ने एकबार फिर से ट्रैक पर वापसी की जिसमें उनके पति और सास-ससुर ने काफी समर्थन किया जिससे वह ओलंपिक में हिस्सा ले सके। ब्रेक के बाद ललिता के लिए वापसी करना आसान नहीं था और उन्हें अपनी लय पाने के लिए काफी कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है, लेकिन वह लगातार इसके लिए कड़ी मेहनत कर रही है।
प्रोफेशनल लाइफ
ललिता ने अपने एथलेटिक कैरियर की शुरूआत ट्रैक एंड फील्ड लांग डिस्टेंस रनर के तौर पर की थी। मुम्बई मैराथन में बाबर 2014 में जीतने के साथ अपनी हैट्रिक विनर बनी थी। इसके बाद साल 2014 में ही ललिता बाबर ने 3000 मीटर स्टीपलचेज में जाने का विचार किया, इसके बाद साल 2014 में हुए एशियन गेम्स में ललिता बाबर ने 9 मिनट 35 सेकेंड में रेस को पूरा करके कांस्य पदक तो जीता ही साथ में सुधा सिंह के नेशनल रिकॉर्ड को भी तोड़ने का काम किया।
साल 2015 में बाबर ने अपने ही रिकॉर्ड को उस समय तोड़ा जब उन्होंने एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल तो जीता ही साथ ही साल 2016 के समर ओलंपिक के लिए भी क्वॉलीफाइ कर लिया। इसके अलावा ललिता ने समर ओलंपिक 2016 में मैराथन के लिए भी क्वॉलीफाइ किया था। साल 2015 में ललिता ने बिजिंग में फिर से रिकॉर्ड तोड़ने का काम करते हुए भारत की पहली महिला खिलाड़ी बन गई जो स्टीपलचेज के फाइनल में पहुंची थी। ललिता बाबर ने फाइनल में 8 वां स्थान अपने लिए सुरक्षित किया था।
साल 2015 में इंडिया स्पोर्ट्स अवार्ड्स में ललिता को स्पोर्ट्स पर्सन ऑफ दी इयर का खिताब दिया गया जिसको फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर एंड स्पोर्ट्स ऑफ इंडिया ने करवाया था। ललिता ने हर टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और आने वाली प्रतियोगिताओं में उनकी नजर पदक जीतने की तरफ होगी।
अवार्ड्स
अचीवमेंट
निजी जानकारी
विवाद
अभी तक ललिता अपने करियर में किसी भी तरह के विवाद को लेकर सुर्खियों में नहीं देखी गयी हैं। वह अपने शानदार प्रदर्शन की वजह से लगातार सरहाना बटोरती रहती हैं।
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