भारत की महिला धावक टिंटू लुका जो मिडिल डिस्टेंश रनिंग इवेंट में हिस्सा लेती हैं। नेशनल रिकॉर्ड होल्डर टिंटू लुका 2 बार देश के लिए ओलंपिक में हिस्सा ले चुकी हैं, जिसमें 2012 और 2016 के ओलंपिक में वह हिस्सा रही थी। इसके अलावा टिंटू लुका ने कई अवार्ड भी जीते हैं, जिसमें अर्जुन अवार्ड भी शामिल हैं। टिंटू लुका एक प्रतिभाशाली एथलीट हैं, जो केरला से आती हैं और उन्होंने मेडल जीतकर देश को गर्व करने का मौका दिया है।
शुरूआती जीवन
टिंटू लुका ने अपनी मां की सलाह पर एथलेटिक्स को प्रोफेशनली अपनाने का फैसला लिया था। अपनी मां से प्रेरणा लेकर टिंटू ने इस खेल में आगे बढ़ने का फैसला लिया। टिंटू का स्कूल उनके घर से 5 किलोमीटर दूर था और वह पैदल चलकर अपने स्कूल जाती थी। जिसके बाद उनकी टीचर्स ने सलाह दी कि टिंटू को उशा स्कूल ऑफ एथलेटिक्स में भर्ती कराया जिससे वह ट्रेनिंग ले सके और टिंटू को पीटी ऊषा के अंडर में ट्रेनिंग मिली।
टिंटू लुका ने उस समय सुर्खियां बटोरी जब उन्होंने साल 2008 में जकार्ता में हुए एशियन जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 800 मीटर इवेंट में पदक जीता। टिंटू ने इसके बाद कई पदक जीतने के साथ कई रिकॉर्ड्स को तोड़ते हुए अपने नाम पर भी किया।
पर्सनल जीवन
30 साल की टिंटू लुरा का जन्म केरना के कन्नूर जिले में हुआ था। वह यहां के एक छोटे से गांव वलाथोड़ा की रहने वाली हैं। टिंटू के पिता का नाम लुका और माता का नाम लिस्सी है, जो स्टेट लेवल पर हाई जम्पर खिलाड़ी थी। एंजल लुका उनकी एकलौती बहन हैं। टिंटू ने अपनी पढ़ाई करीकोट्टाकरी के सेंट थॉमस हाई स्कूल से पूरी की है।
टिंटू की एथलीट जर्नी में उनकी मां ने हमेशा उनका समर्थन किया और उन्हें प्रेरणा देने का काम करते हुए एक शानदार एथलीट बनाने में अहम योगदान दिया। टिंटू की स्कूल टीचर्स ने भी उनकी प्रतिभा को देखते हुए आगे बढ़ने में अहम भूमिका अदा करने का किया है। लुका ने पीटी ऊषा स्कूल ऑफ एथलीट में एडिमश लिया जहां पर वह पीटी ऊषा की देखरेख में आगे बढ़ी और उनकी मेहनत ने ही पहले अंतरराष्ट्रीय मैच में सिल्वर पदक दिलाने में अहम भूमिका अदा की।
प्रोफेशनल लाइफ
जकार्ता में अपने पहले अंतरराष्ट्रीय इवेंट में मेडल जीतने के बाद टिंटू लुका ने साल 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया जिसमें उन्होंने 2 घंटे 1 मिनट में 25 सेकेंड में रेस को पूरा करते हुए 6 वें स्थान पर रही थी। लुका के निराशाजनक प्रदर्शन के बावजूद उनके कोच ने समर्थन करते हुए मीडिया से बात करते हुए कहा कि फैंस की संख्या मैदान में अधिक होने के कारण उनकी स्टूडेंट हार गयी।
कॉमनवेल्थ में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद लुका ने साल 2010 में हुए एशियन गेम्स में ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में कांस्य पदक हासिल किया। कॉमनवेल्थ में खराब प्रदर्शन से टिंटू को काफी कुछ सीखने को मिला और इसी कारण वह एशियन गेम्स में पदक हासिल करने में कामयाब रहीं।
अवार्ड्स
साल 2014 में टिंटू लुका को अर्जुना अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
अचीवमेंट
नेशनल गेम्स
एशियन चैंपियनशिप
एशियन गेम्स
ओलंपिक
रियो ओलंपिक में 800 मीटर इवेंट में 29 वें स्थान पर रहीं थी।
निजी जानकारी
विवाद
लुका का परिवार उस समय सुर्खियों में आ गया था, जब उन्होंने एक बयान जारी करते हुए दिग्गज़ एथलीट खिलाड़ी पीटी ऊषा को लेकर कहा था, कि उनका ऊषा स्कूल ऑफ एथलीट एक बिजनेस सेंटर हैं, जिसको लेकर लुका के परिवार ने कई तरह के आरोप लगाए थे, जिसके बाद पीटी ऊषा जो टिंटू की कोच भी थी, उन्होंने आगे आकर लगे सभी आरोपों को लेकर सफाई भी दी।
नेटवर्थ
टिंटू लुका की नेटवर्थ को लेकर बात करी जाए तो वह लगभग 1 मिलियन डॉलर के आसपास होने की उम्मीद की जा रही है।
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