भारतीय महिला स्प्रिंटर मचीत्तिर्रा राजू पूवम्मा जो 400 मीटर रेस की विशेषज्ञ मानी जाती हैं। पूवम्मा ने साल 2016 के रियो ओलंपिक में भारतीय 4X400 मीटर रिले टीम के साथ हिस्सा लिया था। एम.आर. पूवम्मा ने साल 2013 और 2017 में हुए एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने के साथ साल 2014 और 2018 में हुए एशियन गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था। वहीं एकल दौड़ में पूवम्मा ने साल 2013 की एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर पदक के साथ 2014 के एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीता था। पूवम्मा की कड़ी मेहनत ने उन्हें ये सब हासिल करने में काफी मदद की है।
शुरूआती जीवन
कर्नाटका से आने वाली ये प्रतिभाली एथलीट ने बचपन से ही खेलों में काफी दिलचस्पी दिखाई है। पूवम्मा के फिजिकल एजुकेशन टीचर ने उनके अंदर काफी पहले ही एक एथलीट की पहचान कर ली थी। पूवम्मा को इस खेल में उनका काफी बड़ा हाथ हैं और जब पूवम्मा ने इस खेल में अपना करियर बनाने का फैसला लिया तो उनके परिवार ने भी पूरा साथ दिया। पूवम्मा काफी कम उम्र में ही स्पोर्ट्स के प्रति काफी पैशनेट थी, जिस कारण वह लगातार अपनी स्किल्स को सुधारने की कोशिशे करने लगी।
निजी जीवन
एम.आर. पूवम्मा का जन्म 5 जून 1990 को कर्नाटका के गोनीकोप्पल में हुआ था। पूवम्मा के पिता का नाम एम.जी. राजू है, जो बाजपे एयरपोर्ट पर नौकरी करते थे वहीं मां का नाम एम.आर. जाजी है। पूवम्मा के माता-पिता ने अपनी बेटी को उसका सपना पूरा करने के लिए शुरू से ही काफी समर्थन दिया। पूवम्मा का एक भाई एम.आर. मंजू है, जो भी एक एथलीट है और मंजू ने स्टेट लेवल पर 400 मीटर हर्डल रेस में गोल्ड मेडल जीता हैं, इसके अलावा बैंगलुरू में कांतीरवा स्टेडियम में 400 मीटर रेस में सिल्वर पदक हासिल किया है। इसके अलावा उसने नेशनल लेवल पर रिले रेस में भी हिस्सा लिया है।
पूवम्मा की प्राइमरी और हायर एजुकेशन मैंगलौर से हुई है। इसके अलावा पूवम्मा ने कर्नाटका के श्री धर्मास्थला मंजूनाथेश्वरा कॉलेज ऑफ बिजनेस मैंनेजमैंट से बिजनेस मैनेजमैंट में बैचलर किया है। अपने प्रोफेशनल करियर के शुरूआती सफर में ही पूवम्मा ने सफलता हासिल कर ली थी, जिससे उनका आत्मविश्वास और अधिक बढ़ गया था।
प्रोफेशन लाइफ
जब पूवम्मा 6 वीं क्लास में थी, तो उस समय उनकी फिजिकल एजुकेशन टीचर ने उनके अंदर एक एथलीट को देख लिया था, जिसके बाद उन्होंने इस जिम्मेदारी को अपने कंधो पर लेते हुए पूवम्मा की प्रतिभा को निखारने का काम किया। वसंथ हेगडे ने पूवम्मा को डिस्ट्रिक लेवल पर होने वाले स्पोर्ट्स इवेंट में हिस्सा लेने के लिए मोटीवेट करने का काम किया। पूवम्मा ने भी शानदार प्रदर्शन किया जिससे दिनेश कुंदर काफी प्रभावित हुए और उन्होंने पूवम्मा को मंगला स्टेडियम में अभ्यास के लिए निमंत्रण दिया।
दिनेश के सपोर्ट से पूवम्मा ने अलग-अलग स्पोर्ट्स में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड, सिल्वर और कांस्य पदक जीते। साल 2008 में 29 साल की इस एथलीट ने कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स में 400 मीटर रेस में सिल्वर पदक और 4X400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल जीता। वहीं साल 2011 में पूवम्मा ने 400 मीटर इवेंट में टाइटल को अपने नाम पर किया।
इसके अलावा साल 2012 में हुए एशियन ग्रांड्स प्रिक्स में पूवम्मा ने 2 गोल्ड मेडल और एक सिल्वर मेडल जीता। मास्को में साल 2012 में हुए वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पूवम्मा भारत का नेतृत्व कर रही थी। वहीं साल 2014 में साउथ कोरिया के इंचोन में हुए एशियन गेम्स में महिलाओं की 4X400 मीटर रिले इवेंट में गोल्ड मेडल जीता। साल 2017 में एम.आर. पूवम्मा ने एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जीत हासिल करने वाली टीम का हिस्सा थी।
अवार्ड
साल 2015 में एम.आर. पूवम्मा को खेलों में महत्तवपूर्ण योगदान देने के लिए भारत सरकार की तरफ से अर्जुन अवार्ड दिया गया था।
अचीवमेंट
एशियन गेम्स
एशियन चैंपियनशिप
निजी जानकारी
विवाद
आर. पूवम्मा हमेशा अपने शानदार प्रदर्शन को लेकर सुर्खियों में रही है, वहीं विवादो की बात करे तो यह एथलीट अभी तक इन सभी चीज़ो से काफी दूर रही है।
नेटवर्थ
पूवम्मा की नेटवर्थ को लेकर बात करी जाए तो इस बारे में किसी तरह की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
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