साल 2016 में रियो में हुए ओलंपिक खेलो में भारत की तरफ से जिन 3 एथलेटिक्स खिलाड़ियों ने क्वॉलीफाइ किया था, उसमें एक नाम नितेंद्र सिंह रावत का भी था। नितेंद्र एक भारतीय मैराथन धावक हैं, जो 5000 और 10000 मीटर की होने वाली मैराथन इवेंट में हिस्सा लेते हैं।
शुरूआती जीवन
नितेंद्र सिंह रावत का जन्म उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के गरूर गांव में हुआ था। नितेंद्र का बचपन से देश के लिए आर्मी में जाने का सपना था और इसके अलावा वह फिटनेस को लेकर भी काफी सजग थे, जिसके लिए वह रोज 5 किलोमीटर पैदल चलकर अपने स्कूल पहुंचते थे और इस कारण उनकी रूची लम्बी दूरी की रेस में होने लगी।
पर्सनल लाइफ
साल 2006 में नितेंद्र भारतीय आर्मी में भर्ती हो गए, क्योंकि वह अपने परिवार की आर्थिक हालात में सुधार भी करना चाहते थे, आर्मी में नितेंद्र को हवलदार की पोस्ट मिली। नितेंद्र को कश्मीर में पोस्टिंग मिली जिसमें वह 6 कुमाऊं रेजीमेंट का हिस्सा थे, इसके बाद उन्होंने 42 किलोमीटर सिर्फ 2 घंटे 19 मिनट में पूरे करके रियो ओलंपिक के क्वॉलीफाइ किया।
आर्मी मे जाने के कुछ साल बाद नितेंद्र ने एथलेटिक्स का अभ्यास शुरू कर दिया था, जिसमें वह आर्मी कैंप में ही अपना अभ्यास करते हुए रोज 5000 मीटर की रनिंग करते थे। मीडिया में नितेंद्र को स्टाइलिश के तौर पर देखा जाता हैं, क्योंकि वह एक चोटी रखने के साथ मैराथन रेस के लिए मंहगे जूते पहनते थे।
प्रोफेशनल लाइफ
कुमाऊं रेजीमेंट का हिस्सा हवलदार नितेंद्र सिंह रावत ने अपने गांव में काफी युवाओं के लिए एक प्रेरणा का काम करते हैं, जिससे वह एथलेटिक्स की तरफ बढ़ सके। साल 1960 में हुए ओलंपिक के बाद 3 भारतीय खिलाड़ियों ने 2016 रियो ओलंपिक में मैराथन इवेंट के लिए क्वॉलीफाइ किया था। रियो ओलंपिक में रेस के दौरान हैम्सट्रिंग की समस्या की वजह से नितेंद्र ने अपनी 2 घंटे 22 मिनट में अपनी रेस को पूरा करते हुए 84 वें स्थान पर रहे थे।
इसके बाद 3 महिने तक धर्मशाला में ट्रेनिंग करने के बाद और 5 महिने ऊंटी में हुए नेशनल कैंप ट्रेनिंग करने से नितेंद्र मुम्बई मैराथन में हिस्सा ले सके। नितेंद्र ने एक बयान में कहा था, कि पूणे स्थित आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग करने से उन्हें काफी लाभ मिला और वह अपने गेम को अलग स्तर पर लेकर जाने में कामयाब हो सके हैं।
मुम्बई मैराथन में जब नितेंद्र ने अपने प्रेरणास्त्रोत राम सिंह के 2 घंटे 16 मिनट के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए रेस को 2 घंटे 15 मिनट में पूरा किया तो उन्हें काफी खुशी मिली थी और यह प्रदर्शन उनके जीवन में अभी तक के सबसे यादगार पलों में से एक है। साउथ एशियन गेम्स में नितेंद्र ने 2 घंटे 15 मिनट में रेस को पूरा करके गोल्ड मेडल जीता था। नितेंद्र के साथ थोनाकल गोपी, खेता राम कोच सुरिंदर सिंह भंडारी के अंडर में ट्रेनिंग करते हैं। लोकल मैराथन में नितेंद्र हिस्सा लेकर खुद को आर्थिक तौर पर सुदृढ़ करने के साथ खुद को सीजन के लिए फिट भी रखते हैं।
निजी जानकारी
शारीरिक माप
अचीवमेंट
विवाद
रियो ओलंपिक में खराब प्रदर्शन करने के बाद भी नितेंद्र के 84 वें स्थान पर आने की सबसे बड़ी वजह उन्हें तैयारी के लिए सही संसाधन ना मुहैया कराना था। रियो ओलंपिक में क्वॉलीफाइ करने के बाद भी नितेंद्र को ट्रेनिंग के लिए सही स्थान नहीं दिया गया जिसके बाद 32 साल के इस खिलाड़ी को मजबूरी में उत्तराखंड के रानीखेत जाकर ट्रेनिंग करनी पड़ी। दूसरे एथलेटिक्स पटियाला स्थित नेशनल बेस में तैयारी कर रहे है, लेकिन रियो में चोटिल होने के बाद उन्हें फिर देश के लिए खेलने का मौका नहीं मिला जबकि वह मुम्बई मैराथन में दूसरे सबसे शानदार एथलेटिक्स थे, इसके बावजूद नितेंद्र को साल 2018 के कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में नजरअंदाज किया गया। रियो ओलंपिक में खराब प्रदर्शन के बाद नितेंद्र काफी आलोचना का भी शिकार होना पड़ा था।
नेटवर्थ
नितेंद्र सिंह रावत की नेटवर्थ को लेकर बात की जाए तो आर्मी में होने की वजह से उन्हें सरकार की तरफ से वेतन मिलता हैं। इसके अलावा नितेंद्र लोकल स्तर पर होने वाली मैराथन में भी हिस्सा लेते रहते हैं, लेकिन नितेंद्र की नेटवर्थ को लेकर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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