भारतीय महिला एथलेटिक खिलाड़ी ओ.पी. जैशा जो केरला से आती हैं, वह 5000 मीटर की मैराथन दौड़ में हिस्सा लेती हैं। ओ.पी. जैशा ने अभी तक 2 कांस्य पदक के साथ नेशनल रिकॉर्ड को अपने नाम पर किया हुआ है।
शुरूआती जीवन
केरला से आने वाली इस एथलीट की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। 22 साल की उम्र में जैशा ने अपने करियर की शुरूआत की थी, लेकिन उनके लिए यह सफर आसान नहीं था जिसके बाद ओ.पी. जैशा ने हार ना मानते हुए देश के लिए ओलंपिक में हिस्सा लेने में कामयाब रही।
जब जैशा 33 साल की थी, तो उस समय उन्होंने साल 2016 में हुए रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाइ कर लिया, अपने जीवन में हर परेशानी को पीछे छोड़ते हुए जैशा ने एक एथलीट के तौर पर खुद को साबित किया। जैशा का बचपन बेहद गरीबी में बीता है और इसी को दूर करने के लिए उन्होंने एथलेटिक को अपना करियर बनाया।
निजी जीवन
ओ.पी. जैशा का जन्म 23 मई 1983 को केरला में हुआ था। जैशा जब 5 साल की थी, तो उस समय उनके पिता एक बस दुर्घटना का शिकार हो गए जिसके बाद वह बिस्तर पर ही रहे। पिता की इस हालत को देखकर जैशा की मां बेहद परेशान हो गयी क्योंरि परिवार में उनके पिता ही सिर्फ एक कमाते थे और इस वजह से परिवार को गरीबी का सामना करना पड़ा और इसी दौरान घर में पल रहे पशुओं की भी मृत्यु हो गयी जिससे परिवार को कुछ पैसा मिल जाता था, वह भी रास्ता बंद हो गया था।
जैशा उस समय से भी गुजरी हैं, जब उन्हें गीली मिट्टी खाकर गुजारा करना पड़ा और चावल जैसी चीज़े उनके लिए बेहद महंगी थी। जैशा की 3 बहन हैं, इतनी गरीबी में जीने के बावजूद जैशा की मां ने कभी अपने बच्चों से कमाने के लिए नहीं कहा, जिसके बाद उन्होंने अपनी जमीन को गिरवी रखकर लोन लिया और इस पैसे से उन्होंने 2 गायें खरीदी। जैशा अपनी मां की हर तरह से मदद करना चाहती थी, जिसमें वह गाय के दूध को लोगों के घर जाकर देने का काम करने लगीं। लगातार इसी तरह करने से जैशा के अंदर साधारण तौर पर एक एथलेटिक खिलाड़ी को जन्म दे गया।
इस बात को जैशा ने भी स्वीकार किया है, कि उनके बुरे समय ने उन्हें एक एथलीट बनाने में काफी मदद की है। साल 2000 में जैशा ने अपने मां-बाप को इस बात के लिए मजबूर किया कि वह उन्हें कलपेट्टा में होने वाले स्पोर्ट्स फेस्टीवल में भेजे। अपने शुरूआती करियर में जैशा नंगे पॉंव ही दौड़ती थी, लेकिन इसके बावजूद वह जीत हासिल करने में कामयाब रहती थी, जिससे माता-पिता को उनके उपर काफी गर्व हुआ।
अपने प्रोफेशनल जीवन के महत्तवपूर्ण समय में जैशा ने अपनी सभी बहनों की शादी करने के साथ सारे लोन को चुकाने का भी काम किया। कौन यह बात कहता है, कि सही वातावरण में ही एक चैंपियन खिलाड़ी बनकर निकलता हैं, क्योंकि केरला से आने वाली जैशा ने इस बात को पूरी तरह से गलत साबित किया है।
प्रोफेशन लाइफ
एथलेटिक खिलाड़ी ओ.पी. जैशा के करियर में उस समय बड़ा बदलाव आया जब एक लोकल कोच गिरीश ने उन्हें एक इवेंट में दौड़ते हुए देखा और इसमें जैशा ने जीत भी हासिल की थी। इसके बाद कोच गिरीश ने इस बात का आश्वासन दिया कि वह उनका नाम केरला के अजुमशन कॉलेज में शामिल करने के लिए कहेंगे क्योंरि यह केरला में एथलीट तैयारी के लिए सबसे शानदार सुविधा मुहैया कराता है।
लेकिन जैशा की उन्हें दूर नहीं जाने दे सकती हैं, लेकिन वह जैशा को रोकना आसान नहीं था, जिसके बाद किस्मत साथ होने की वजह सेे जैशा को मेनन और नियाम्मा के तौर पर 2 कोच मिल गए जिन्होंने जैशा को अपनी बेटी की तरह पाला। उन्होंने जैशा के लिए वह सारी चीज़े उपलब्ध करायी जो एक एथलेटिक खिलाड़ी के पास होने चाहिए और इससे जैशा को मानसिक और शारीरिक तौर पर एक विश्वास मिला।
2 साल की कड़ी मेहनत ने जैशा को साल 2005 के यूनिवर्सिटी गेम्स में 2 गोल्ड मेडल जितवा दिए, जिसके बाद जैशा चंगाचेरी से सीधे नेशनल कैंप में पहुंच गयी और यहां पर उन्हें नए कोच शनेशरव के अंडर में ट्रेनिंग करनी थी और फिर उसके बाद साल 2006 में जैशा ने एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीता। इसके बाद चोट की वजह से जैशा के प्रदर्शन पर असर पड़ा और इस कारण वह कॉमनवेल्थ गेम्स में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी। इसी बीच जैशा के लिए जीवन का एक और सबसे खराब समय आया जब उन्हें नेशनल कैंप से बाहर निकाल दिया गया कांस्य पदक जीतने के बावजूद।
इसके बाद ओ.पी. जैशा की प्रोफेशनल लाइफ ने उस समय यू-टर्न लिया जब उनकी मुलाकात अपने पति गुरमीत सिंह से हुए जो एक एथलेटिक के कोच हैं। दोनों की मुलाकात पंजाब के लुधियाना में खालसा कॉलेज में हुयी। इसके बाद गुरमीत ने कॉलेज को छोड़ते हुए जैशा के साथ धर्मशाला स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ट्रेनिंग सेंटर में लेकर गए। जैशा ने 9 महिने तक धर्मशाला में ट्रेनिंग की और गुरमीत भी उनके साथ लगातार रहे।
अपनी स्ट्रेंथ को वापस पाने के बाद जैशा एकबार फिर से साल 2014 में नेशनल कैंप में वापस आ गयी, जिसके बाद साल 2014 के एशियन गेम्स में ओ.पी. जैशा ने एकबार फिर से 1500 मीटर इवेंट में कांस्य पदक को अपने नाम पर किया।
अवार्ड्स
केरला के मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने पुरस्कार स्वरूप 7.5 लाख का नकद इनाम दिया।
अचीवमेंट
एशियन इंडोर गेम्स
एशियन इंडोर चैंपियनशिप
एशियन गेम्स
निजी जानकारी
विवाद
ओ.पी. जैशा उस समय खबरो में आयी थी, जब उन्होंने रियो ओलंपिक के दौरान भारतीय ऑफीशियल पर इस बात का आरोप लगाया था, कि वह रनिंग के दौरान उन्हें किसी भी तरह का रिफरेशमेंट नहीं दिया गया यहां तक की पानी भी नहीं। इसके बाद जैशा ने 89 वां स्थान हासिल किया था और इस इवेंट के बाद उन्होंने कहा था, कि उनकी मृत्यु भी हो सकती थी। जैशा को इस इवेंट के बाद अस्पताल भी लेकर जाया गया था।
एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने उनके सारे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एथलीट और उनके कोच ने इस तरह की मांग पहले नहीं रखी थी, लेकिन जैशा के आरोपों के बात एएफआई और भारतीय ऑफीशियल्स को सोशल मीडिया पर काफी आलोचना का शिकार होना पड़ा था। वहीं जैशा उस समय भी खबरो में आयी थी, जब उन्होंने इस बात की शिकायत करी थी, कि उन्हें सरकार की तरफ से किसी भी तरह की नौकरी का कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है।
नेटवर्थ
ओ.पी. जैशा की नेटवर्थ को लेकर किसी भी तरह की कोई जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
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