भारतीय डबल ट्रैप शूटर खिलाड़ी रंजन सोढ़ी ने शूटिंग में पूरे विश्व में शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन वह ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीतने में कामयाब नहीं हो सके हैं। इसके अलावा रंजन ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता है, जो रंजन के अलावा सिर्फ 2 भारतीय शूटर खिलाड़ी ही व्यक्तिगत तौर पर जीत सके जिसमें रंणधीर सिंह और जसपाल राणा ने ऐसा किया था।
शुरूआती जीवन
21 साल पहले गांव में अच्छी शिक्षा की व्यवस्था मौजूद ना होने की वजह से रंजन सोढ़ी के माता-पिता ने उन्हें दिल्ली में पढ़ाई के लिए भेजा और इसी के बाद रंजन की शूटिंग के प्रति दिलचस्पी भी शुरू हुई। परिवार ने रंजन को हर समय अपना समर्थन दिया। वर्ल्डकप के फाइनल में 2 बार गोल्ड मेडल जीतने वाले रंजन सोढ़ी एकलौते भारतीय शूटर खिलाड़ी हैं।
लंदन ओलंपिक में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद रंजन ने वर्ल्डकप के फाइनल में सिल्वर पदक जीतकर अपने आत्विश्वास को वापस पाया था और आलोचको को इस बात का जवाब भी दिया था, कि उनके अंदर अभी भी काफी खेल बाकी है।
निजी जीवन
पंजाब के फिरोजपुर मेें 23 अक्टूबर 1979 को रंजन सोढ़ी का जन्म हुआ था। रंजन का छोटा भाई बिरंनदीप सोढ़ी भी एक ट्रैप शूटर खिलाड़ी हैं। रंजन के पिता मलविंदर सिंह सोढ़ी ने उन्हें सलाह देते हुए कहा था, कि वह ट्रैप से डबल ट्रैप में अपने हाथ आजमायें। जब रंजन 10 वीं क्लास में थे, तो उस समय उनके पिता उन्हें करणी सिंह के पास पहली बार लेकर गए थे।
मलविंदर सिंह भी एक पहले शूटर थे, लेकिन वह इस खेल में अधिक संसाधन ना मौजूद होने की वजह से प्रोफेशनल तौर पर नहीं खेल सके थे, लेकिन वह रंजन को अपने साथ खेतो में लेकर जाते थे, जहां पर रंजन खेल के तौर पर शूटिंग करते थे। जब दिल्ली में आकर रंजन आकर रहने लगे तब उन्होंने शूटिंग रेंज में दाखिला लिया जिससे अच्छी ट्रेनिंग की जा सके।
एमबीए पूरा करने के बाद रंजन ने शूटिंग में करियर बनाने का फैसला किया, लेकिन यह फैसला रंजन के लिए आसान नहीं था, क्योंकि वह जानते थे इस खेल में अधिक पैसे नहीं हैं, जिसके बाद रंजन के पिता ने अपने बेटे का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें इसमें करियर बनाने की सलाह दी।
जिसके बाद रंजन को अपने फैसले का बड़ा इनाम साल 2007 में उस समय मिला जब उन्होंनें अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीता। रंजन ने ISSF सेंट डोमिंगो वर्ल्डकप में कांस्य पदक को अपने नाम पर किया था। साल 2008 में रंजन ने रिकॉर्ड स्कोर करने का काम किया जिसमें उन्होंने बेलग्रेड में हुए पहले वर्ल्डकप में शानदार खेल दिखाया। रंजन ने साल 2005 में रुचिका सोढ़ी से शादी कर ली थी और इस समय दोनों का 10 साल का बेटा सूर्यावीर हैं।
प्रोफेशनल जीवन
साल 2010 में लोनाटो में हुए ISSF वर्ल्डकप में रंजन ने 50 शॉट में से सभी 50 क्ले पर मारकर एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था और इसमें उनका स्कोर 195 का था, जिसके बाद उन्होंने डबल ट्रैप के इस इवेंट में गोल्ड मेडल को अपने नाम पर किया था। इसके बाद साल 2010 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में रंजन ने पुरूष डबल ट्रैप सिंगल्स में प्लेटिनम पदक जीता।
पेरिस में रंजन ने अशर नोरिया के साथ मिलकर पुरू डबल ट्रैप इवेंट में सिल्वर पदक जीता। साल 2010 में हुए एशियन गेम्स में रंजन ने पुरूष डबल ट्रैप इवेंट में 186 का स्कोर करके गोल्ड मेडल को अपने नाम पर किया था, इसके अलावा उन्होंने इसी इवेंट में कांस्य पदक भी जीता था।
बिजिंग में हुए साल 2011 के ISSF वर्ल्डकप में रंजन ने सिल्वर पदक जीतने के साथ ओलंपिक के लिए अपनी जगह को भी पक्का कर लिया था। लंदन ओलंपिक में अच्छी शुरूआत करने के बावजूद रंजन फाइनल में अपनी जगह को पक्का नहीं कर सके थे और उन्हें निराश होकर बाहर होना पड़ा था।
अवार्ड्स
अचीवमेंट
निजी जानकारी
विवाद
वर्ल्ड चैंपियन शूटर खिलाड़ी रंजन सोढ़ी का नाम जब साल 2013 में खेल रत्न के लिए नॉमीनेट किया गया था, तो उस इसकी प्रक्रिया को लेकर कुछ सदस्यों ने पैनल पर सवाल खड़े कर दिये थे। इसके अलावा रंजन ने हमेशा अपने खेल को लेकर ही सुर्खियां बटोरने का काम किया है।
नेटवर्थ
रंजन सोढ़ी मौजूदा समय में पुलिस विभाग में नौकरी कर रहे हैं, इसके अलावा उन्होंने अपने स्पोर्टिंग प्रोफेशन से भी उनकी कमाई होती है। फिलहाल अभी रंजन के नेटवर्थ को लेकर किसी भी तरह की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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