भारत की महिला वेटलिफ्टिंग खिलाड़ी साईखोम मीराबाई चानू जो 48 किलोग्राम वर्ग के इवेंट में हिस्सा लेती हैं। मीराबाई चानू ने वर्ल्ड चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीते हैं। खेल में महत्तवपूर्ण योगदान के लिए मीराबाई चानू को भारत सरकार की तरफ से पद्म श्री पुरस्कार भी दिया जा चुका है।
शुरूआती जीवन
साईखोम मीराबाई चानू का जन्म 8 अगस्त 1994 को मणिपुर के इम्फाल में नांगोपक काकचिंग में हुआ था। अपना बचपन मीराबाई चानू ने इम्फाल में बिताया जो देश का काफी कम आबादी वाला शहर है। मीराबाई के माता-पिता के 5 बच्चे और थे। बचपन से ही मीराबाई अपने कंधो पर लकड़ियों का गठ्ठर उठाकर लाती थी, जिससे घर पर खाना पकाया जा सके। मीराबाई जिस आसानी से लकड़ियों को उठा लेती थी, वह उनके घर के लोगों ने पहले ध्यान नहीं दिया। जिसके बाद 11 साल की उम्र में मीराबाई ने जब वेटलिफ्टिंग का अभ्यास करना शुरू किया तो उसके बाद परिवार की ध्यान उनकी इस प्रतिभा की तरफ गया।
निजी जीवन
मीराबाई चानू अपने 6 भाई-बहनों में सबसे छोटी थी। चानू के पिता का नाम साईखोम कीर्ती मेताई है, जो एक गवर्नमेंट इम्पलाई हैं। वहीं उनकी मां साईखोम ओंगबी टोमंबी लेइमा एक शॉपकीपर हैं, जिससे पूरा परिवार उसको चलाने में मदद करता है। मीराबाई चानू ने अपनी पढ़ाई इम्फाल में ही पूरी की क्योंकि वह वेटलिफ्टिंग में करियर बनाने में अपना पूरा ध्यान लगाना चाहती थी।
प्रोफेशनल जीवन
जब मीराबाई चानू 11 साल की थी, तो उस समय उन्होंने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरूआत की और अपना पहला गोल्ड मेडल उन्होंने अंडर 15 नेशनल चैंपियनशिप में जीता। साल 2007 से मीराबाई इम्फाल के खुमान लाम्पक स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग कर रही हैं। 17 साल की उम्र में मीराबाई चानू ने इंटरनेशनल यूथ चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता जिसके बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम से बुलावा आ गया।
इसके बाद मीराबाई चानू को अपनी आदर्श कुंजारानी देवी के अंडर में ट्रेनिंग मिली। ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स में जब मीराबाई चानू ने 48 किलोग्राम वर्ग इवेंट में कांस्य पदक जीता था, तो उस समय उनकी काफी तारीफ हुई थे, क्योंकि वह इससे साल 2016 के रियो ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाइ कर गयी थी। ओलंपिक की तैयारी के लिए मीराबाई को विजय शर्मा ने ट्रेनिंग दी जिससे वह अपनी क्षमता में सुधार कर सके।
रियो ओलंपिक के लिए जब मीराबाई चानू ने क्वालीफाइ किया तो सभी को उम्मीद थी, वह पदक जीतकर ही वापस लौटेंगी लेकिन दबाव में चानू अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। मीराबाई ने ओलंपिक में खराब प्रदर्शन से वापसी करते हुए साल 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में 201 किलो वजन उठाकर इतिहास रचते हुए गोल्ड मेडल को अपने नाम पर किया। थाइलैंड के पटाया में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में मीराबाई पदक जीतने में कामयाब नहीं हो सकी लेकिन उन्होंने अपने वजन से 4 गुना अधिक वजन उठाया था।
खेल में शानदार योगदान देने के लिए मीराबाई चानू को इस्टर्न रेलवे में सीनियर टिकट कलेक्टर की नौकरी मिलने के साथ उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न और पद्म श्री अवार्ड भी दिया जा चुका है।
अचीवमेंट
निजी जानकारी
विवाद
मीराबाई चानू ने अभी तक अपने प्रदर्शन के दम पर सबसे अधिक सुर्खियां बटोरी हैं, जिस कारण यह युवा महिला वेटलिफ्टर खिलाड़ी किसी भी तरह के विवाद से पूरी तरह दूर ही दिखती है और उनका पूरा ध्यान अपने खेल को लेकर रहता है।
नेटवर्थ
मीराबाई चानू एक सरकार कर्मचारी हैं और वह भारतीय इस्टर्न रेलवे में सीनियर टिकट कलेक्टर के पद पर तैनात हैं। मीराबाई चानू को मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरन सिंह से नकद पुरस्कार भी मिल चुका हैं। वहीं उनकी नेटवर्थ को लेकर बात करी जाए तो वह 2 से 3 मिलियन डॉलर के आसपास होने की उम्मीद की जा सकती है।
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