भारतीय शूटर खिलाड़ी प्रकाश नंजप्पा ने रियो ओलंपिक में तब हिस्सा लिया था, जब उन्हें डॉक्टरो ने खेलने की मंजूरी दे दी थी, क्योंकि एक समय सभी को लगा था, यह शूटर खिलाड़ी किसी इवेंट में हिस्सा नहीं ले सकेगा। प्रकाश ने देश के लिए काफी सारे पदक जीते हैं और उन्हें इसी कारण अर्जुन पुरस्कार भी मिल चुका है।
शुरूआती जीवन
प्रकाश नंजप्पा ने उस समय शूटिंग को अपना करियर बनाने का फैसला लिया जब उनके पिता ने उन्हें खुद को साबित करने का चैलेंज दिया। प्रकाश को एक प्रोफेशनल शूटर बनने के लिए काफी कड़ा संघर्ष करना पड़ा लेकिन उनकी इसी मेहनत का फल कई प्रतियोगिताओं में जीत के तौर पर मिला। प्रकाश नंजप्पा ने साल 2019 में ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने जीवन का ख्याल ना रखते हुए हिस्सा लिया और सिल्वर पदक जीतने में कामयाब रहे।
निजी जीवन
प्रकाश नंजप्पा का जन्म 29 फरवरी 1976 को बैंगलुरू में हुआ था और उनके पिता पी.एन. पनप्पा एक नेशनल लेवल के शूटर खिलाड़ी थे। साल 1999 में प्रकाश ने उस समय शूटिंग की शुरूआत की जब उनके पिता ने उन्हें चैलेंज किया किया कि लेकिन प्रकाश का पहले शूटिंग की जगह पर मोटर बाइक रैली में अधिक दिलचस्पी थी।
नंजप्पा को अपनी शूटिंग को आर्थिक हालात के कारण छोड़कर कनाडा जाना पड़ा जहां पर वह उन्होंने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम किया। साल 2009 में प्रकाश के पिता ने उन्हें शूटिंग करने के लिए फिर से कहा क्योंकि उस समय तक प्रकाश अपने लिए काफी पैसा जमा कर चुके थे और वह इस खेल की तैयारी बिना किसी परेशानी के कर सकते थे।
एक रिपोर्ट के अनुसार प्रकाश के चेहरे में दाहिने तरफ पैरालिसिस के लक्षण देखे जा सकते थे, लेकिन प्रकाश ने 6 हफ्तों का बेड रेस्ट करके अपनी इस बीमारी को पूरी तरह से दूर करते हुए फिर से शूटिंग में वापस लौट आये। अपने पूरे करियर के दौरान प्रकाश को लगातार बीमारियों और इंजरी सामना करना पड़ा है। साल 2013 के ISSF वर्ल्डकप में कलाई में तकलीफ होने की वजह से उन्हें कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा था, लेकिन वह इस टूर्नामेंट में पदक हासिल करने वाले एकलौते भारतीय खिलाड़ी थे। प्रकाश की करियर की सबसे बड़ी उपलब्धी उनका साल 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में दूसरे स्थान पर रहना।
प्रोफेशनल जीवन
एक एथलीट के तौर पर प्रकाश नंजप्पा खुद को कभी धीमा नहीं पड़ने दे सकते थे और इसी कारण वह पूरी तरह से उसके उपर ध्यान देते रहे। शूटिंग के प्रति उनके पैशन ने उन्हें कनाडा से वापस भारत में ला दिया। साल 2013 में साउथ कोरिया में हुए ISSF वर्ल्ड कप में प्रकाश ने 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में 182.2 का स्कोर करके कांस्य पदक जीता था।
इसके बाद साल 2013 में हुए वर्ल्डकप में प्रकाश को पैरालिसिस अटैक का सामना करना पड़ा लेकिन वह इससे जल्द ही उबरकर बाहर आ गये। बीमारी से पूरी तरह ठीक होने के बाद प्रकाश ने एशियन एयर गन चैंपियनशिप में 50 मीटर पिस्टल इवेंट में सिल्वर पदक जीता। प्रकाश नंजप्पा अपने करियर में कभी आगे बढ़ने से रूके नहीं। कॉमनवेल्थ गेम्स साल 2014 के क्वालिफिकेशन राउंड में प्रकाश ने 580 का स्कोर करके टॉप किया था। इसके बाद प्रकाश ने 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में 198.2 का स्कोर करके सिल्वर पदक जीता।
अवार्ड
साल 2017 में प्रकाश को अर्जुन पुरस्कार मिला था।
अचीवमेंट
निजी जानकारी
विवाद
प्रकाश नंजप्पा ने अपनी सफलताओं और प्रदर्शन को लेकर ही सुर्खियां बटोरी हैं। इसके अलावा 43 साल के इस शूटर खिलाड़ी ने जिस तरीके से वापसी करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार खेला उससे भी सभी लोग काफी प्रभावित हुए थे।
नेटवर्थ
प्रकाश नंजप्पा की नेटवर्थ को लेकर किसी भी तरह की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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