भारत के प्रतिभावान हैवीवेट बॉक्सर खिलाड़ी सुमित सांगवान जिन्होंने कजाकिस्तान में हुए एशियन ओलंपिक क्वालीफायर में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। इस बॉक्सर खिलाड़ी को यहां तक पहुंचने के लिए काफी बाधाओं को पार करना पड़ा है। इंजरी के साथ भाग्य का पूरा साथ ना मिलने की वजह से सुमित को अपनी जगह बनाने में समय लगा लेकिन वह लगातार कड़ी मेहनत करते रहे जिसके बाद आखिरकार वह सफल हो सके।
किसी भी एथलीट की एक के एक सर्जरी उसे पूरी तरह से शारीरिक और मानसिक तौर पर तोड़ सकती है, लेकिन 26 साल का यह बॉक्सर खिलाड़ी अपने पथ पर उसके बाद भी अग्रसर रहा और एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर पदक जीतकर वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए अपनी जगह को पक्का किया।
शुरूआती जीवन
हरियाणा के करनाल डिस्ट्रिक के शेखपुरा गांव में 1 जनवरी 1993 को सुमित सांगवान का जन्म हुआ था। सुमित ने काफी कम उम्र से बॉक्सिंग करना शुरू कर दिया था। 11 साल की उम्र में सुमित ने बॉक्सिंग गलव्स पहन लिए थे। सुमित ने अपनी बॉक्सिंग की ट्रेनिंग शेखपुरा में अपने अंकल की बॉक्सिंग ट्रेनिंग में शुरू की। 16 साल की उम्र में सुमित ने स्टेट और नेशनल लेवल के खिलाड़ियों के खिलाफ खेलना शुरू कर दिया था।
इस भारतीय बॉक्सर खिलाड़ी को काफी परेशानियों का सामना अपने बॉक्सिंग करियर में करना पड़ा है, जिसमें एक बार वह अकेले कमरे में बैठकर रो भी रहे थे। सुमित के माता-पिता कई अच्छे लोगों के पास गए जिससे उनके जीवन में सब ठीक हो सके यहां तक की सुमित ने बॉक्सिंग को छोड़ने तक का विचार कर लिया था।
साल 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स से ठीक पहले एक दुर्घटना में सुमित अपने बायें हाथ को फ्रैक्चर कर बैठे थे और 10 दिन पहले उनके हाथों में प्लास्टर चढ़ गया था। जिसके बाद उस सूजन वाले हाथ के साथ सुमित ने हिस्सा लिया और क्वाटरफाइनल में हारकर बाहर हुए। साल 2015 में सुमित की एल्बो में तकलीफ होना शुरू हुई और इस कारण वह साल 2016 में हुए वर्ल्ड ओलंपिक क्वालीफायर्स में हारकर बाहर हो गए।
लगातार खराब किस्मत सुमित का साथ नहीं छोड़ रही थी, क्योंकि साल 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स से ठीक पहले इस युवा बाक्सर को टाइफायड हो गया था, लेकिन इसके बावजूद सुमित ने हिस्सा लिया और उन्हें हारकर बाहर होना पड़ा। कठिन समय में सुमित ने खुद को संभाला और कुछ प्रतियोगिताओं में हिस्सा भी नहीं लिया।
2 सर्जरी होने के बावजूद सुमित ने एशियन चैंपियनशिप के फाइनल राउंड में अपनी जगह को पक्का किया साथ ही साल 2016 के वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वाटरफाइनल तक भी पहुंचे थे। सुमित के माता-पिता के लिए यह सब देखना काफी कठिन था, क्योंकि वह मानसिक और शारीरिक तौर पर परेशान था। लेकिन कभी ना रूकने की ललक ने सुमित को एक शानदार बॉक्सर के तौर पर स्थापित किया।
प्रोफेशनल जीवन
नेशनल लेवल पर अपने नाम को 2 गोल्ड मेडल जीतने के साथ स्थापित करने के बाद सुमति ने साल 2012 में काफी सुर्खियां बटोरी। 26 साल के इस बॉक्सर खिलाड़ी ने कजाकिस्तान में हुए एशियन ओलंपिक क्वालीफायर्स में गोल्ड मेडल जीता था। सुमित ने भारतीय चयनकर्ताओं का विश्वास अपने उपर कायम रखते हुए लंदन ओलंपिक के लिए अपनी जगह को पक्का किया।
अचीवमेंट
निजी जीवन
अपने शानदार प्रदर्शन और अचीवमेंट के अलावा यह बॉक्सर खिलाड़ी उस समय सुर्खियों में आया था, जब सुमित ने एक रैफरी के आधिकारिक फैसले को लेकर सवाल खड़ा कर दिया था। यह मामला साल 2012 के ओलंपिक में हुआ था, जब को 81 किलोग्राम वर्ग में हार का सामना करना पड़ा था।
नेटवर्थ
सुमित सांगवान की नेटवर्थ को लेकर बात करी जाए तो फिलहाल अभी उसको लेकर किसी भी तरह की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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