भारतीय क्रिकेट टीम में कभी भी प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कमी को नहीं देखा गया है, फिर चाहे बात जूनियर स्तर के क्रिकेट को लेकर क्यों ना हो और इसी कारण देश ने आईसीसी अंडर 19 विश्वकप को 4 बार अपने नाम पर किया है, जो इस टूर्नामेंट के इतिहास में कोई भी दूसरी टीम अभी तक ऐसा नहीं कर सकी है।
अब टीम अपने 5 वें खिताब को जीतने के लिए साल 2020 में साउथ अफ्रीका में शुरु होने वाले 17 जनवरी से आईसीसी अंडर 19 विश्वकप में एकबार खेलने फिर से मैदान में उतरेगी। अभी तक अंडर 19 टीम में कप्तानी करने वाले खिलाड़ियों ने टीम की जीत और ट्राफी जिताने में अहम रोल अदा किया है और इस बार विश्वकप में टीम की कमान का जिम्मा प्रियम गर्ग के हाथों में होगी।
उत्तर प्रदेश से आने वाले प्रियम गर्ग एक साधारण परिवार से आते हैं और कम उम्र में ही जूनियर लेवल पर शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। 19 साल का दायें हाथ का यह बल्लेबाज़ मध्यम गति की तेज गेंदबाज़ी करता है, जिसमें 12 प्रथम श्रेणी मैचो में गर्ग ने 66.07 के औसत के साथ रन बनाये हैं।
जहां प्रियम गर्ग से उम्मीद है, कि वह गत विजेता टीम का खिताब तो बचायेंगे ही साथी टीम को 5 वीं बार चैंपियन भी बनाकर वापस लौटेंगे। वहीं हम आज आपको बताने जा रहे हैं, इससे पहले भारतीय अंडर 19 टीम को विश्वकप में कप्तानी करते हुए टीम को जीत दिलाने वाले खिलाड़ियों ने आखिर उसके बाद कितनी सफलता हासिल की है।
4 – पृथ्वी शॉ (2018)
पृथ्वी शॉ की कप्तानी में भारतीय अंडर 19 टीम ने न्यूज़ीलैंड में साल 2018 में आईसीसी अंडर 19 विश्वकप में रिकॉर्ड चौथी बार इस कप को अपने नाम पर करके देश का सम्मान बढ़ाया था। पृथ्वी शॉ इस विश्वकप में टॉप 10 रन बनाने वाले बल्लेबाज़ो की लिस्ट में शामिल थे, जिसमें शॉ ने 6 मैचो में 65.25 के औसत के साथ 261 रन बनाये थे।
शॉ के इस प्रदर्शन की वजह से उन्हें सीनियर टीम में शामिल होने में अधिक समय नहीं लगा और साल 2018 की अक्टूबर के महिने में वेस्टइंडीज़ के खिलाफ घरेलू सीरीज़ में शॉ को टेस्ट क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने का मौका मिला और अपनी पहली पारी में शॉ ने शतक लगाकर सभी के फैसले को सही भी ठहराया।
वेस्टइंडीज़ के खिलाफ उस सीरीज़ में शॉ ने कुल 237 रन बनाकर भारतीय टीम में ओपनिंग बल्लेबाज़ के तौर पर अपनी जगह को पूरी तरह से पक्का कर लिया था और उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली अगली सीरीज़ के लिए टीम में शामिल भी किया गया था, लेकिन ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हुए अभ्यास मैच के दौरान शॉ चोटिल हो गए थे, जिस कारण उन्हें उस सीरीज़ से बाहर बैठना पड़ा जिसके बाद डोपिंग के कारण उन्हें साल 2019 में बैन भी झेलना पड़ा।
साल 2019 के अधिकतर समय तक शॉ मैदान से दूर ही रहे जिसमें चोटिल होना और बैन लगना एक बड़ा कारण था, लेकिन कुछ समय पहले पृथ्वी शॉ ने घरेलू सीजन में मुम्बई के लिए वापसी करते हुए सयैद मुश्ताक अली ट्राफी में शानदार प्रदर्शन किया और इस समय 20 साल का यह बल्लेबाज़ अपने स्टेट के लिए रणजी ट्राफी में खेल रहा है।
3 – उनमुक्त चंद (2012)
उनमुक्त चंद इस लिस्ट में शामिल एकलौते भारतीय अंडर 19 विश्वकप विनिंग कैप्टन हैं, जिनको सीनियर भारतीय टीम में अभी तक खेलने का मौका नहीं मिल सका है। उनमुक्त ने साल 2012 में हुए आईसीसी अंडर 19 विश्वकप के फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुए फाइनल में मैच विनिंग पारी खेलकर टीम को विजेता बनाया था।
फाइनल मैच में भारतीय टीम को जीत के लिए 225 रनों के लक्ष्य का पीछा करना था, जिसके बाद चंद ने अकेले दम पर टीम को जिताने का काम करते हुए 130 गेंदो में 111 रनों की पारी खेली जिसके बाद भारतीय टीम ने 47.4 ओवरो में जीत हासिल करते हुए तीसरी बार खिताब पर कब्जा किया था।
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनमुक्त चंद के प्रदर्शन को लेकर बात करी जाए तो अभी तक 62 फर्स्ट क्लास मैचो में 33.35 के औसत के 3235 रन बना चुके हैं, जिसमें 8 शतक भी शामिल हैं, लेकिन चंद को एकबार भी सीनियर टीम में शामिल होने का मौका नहीं मिल सका। चंद पहले दिल्ली के घरेलू क्रिकेट में खेलते थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने पड़ोसी राज्य उत्तराखंड से रणजी में खेलने का फैसला किया जिसमें वह कप्तान के तौर पर खेल रहे हैं।
2 विराट कोहली (2008)
साल 2008 में पूरा विश्व क्रिकेट उस समय मलेशिया में हो रहे आईसीसी अंडर 19 विश्वकप को काफी करीब से फालो कर रहा था, क्योंकि फाइनल मैच में जिस तरीके से विराट कोहली ने टीम का नेतृत्व किया था, उसने सभी का दिल जीत लिया था।
कोहली ने सिर्फ अपनी कप्तानी से ही नहीं बल्कि अपनी बल्लेबाज़ी से भी सभी को काफी प्रभावित किया था। कोहली उस टूर्नामेंट में भारतीय टीम की तरफ से दूसरे सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी थे। कोहली ने 6 मैचो में 47 के औसत से 235 रन बनाये थे, जिसमें उनका स्ट्राइक रेट 94.75 का था।
विराट कोहली के इस शानदार प्रदर्शन का इनाम उन्हें उसी साल मिला और सीनियर टीम से डेब्यू करने का मौका मिला जिसके बाद 11 साल बीत जाने के बाद वह वर्तमान में विश्व क्रिकेट सबसे शानदार बल्लेबाज़ बिना किसी संदेह के बने हुए हैं। कोहली ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अभी तक 21 हजार से अधिक रन बनाने के साथ 70 अंतरराष्ट्रीय शतक अपने नाम पर कर चुके हैं।
1 – मोहम्मद कैफ (2000)
पहली बार भारतीय टीम ने साल 2000 में श्रीलंका में हुए आईसीसी अंडर 19 विश्वकप में मोहम्मद कैफ की कप्तानी में जीत हासिल की थी। जिसके बाद कैफ को जल्द ही सीनियर टीम से खेलने का मौका मिला लेकिन उनका टेस्ट करियर उतना शानदार नहीं रहा जिस कारण कैफ सिर्फ 2002 से 2006 के बीच ही टेस्ट टीम का हिस्सा रहे थे।
मोहम्मद कैफ ने भारतीय टीम को साल 2002 की नेटवेस्ट ट्राफी के फाइनल में 87 रनों की मैच विनिंग पारी खेलते हुए टीम को इंग्लैंड में उसी के खिलाफ एक ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। दबाव के क्षण में कैफ काफी शानदार खेलते थे, जिस कारण टीम को निचले क्रम में उनके रुप में एक मैच विनर खिलाड़ी मिला था और फैंस भी कैफ की उस पारी को उनके वनडे करियर की सबसे यादगार पारियों में से एक मानते हैं।
कैफ ने 125 वनडे मैचो में 32.01 के औसत के साथ 2753 रन बनाये हैं और 39 साल की उम्र में कैफ जहां आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स टीम के लिए सहायक कोच की भूमिका को निभाते हैं, तो वहीं टीवी कांमेंट्री में भी उन्हें देखा जा सकता है।
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