भारतीय टीम के लिए साल 2019 में टेस्ट क्रिकेट में सफल होने का सबसे बड़ा कारण टीम के तेज गेंदबाज़ो का शानदार प्रदर्शन करना था, जो सिर्फ विदेशी जमीन पर ही नहीं बल्कि घरेलू जमीन पर भी देखने को मिला। साल 2018 में जसप्रीत बुमराह को टेस्ट टीम में शामिल करने के फैसले ने पूरी तस्वीर को ही बदलकर रख दिया।
साल 2019 की शुरुआत में भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज़ को अपने नाम पर किया, जिसमें बुमराह ने सीरीज़ में टीम के लिए सबसे अधिक विकेट हासिल किए। यह साल मोहम्मद शमी के नाम पर भी कहा जा सकता है, जिन्होंने बुमराह के घायल होने के बाद तेज गेंदबाज़ी अटैक को अपने कंधो पर लेकर चले थे।
वहीं इशांत शर्मा ने एक सीनियर गेंदबाज़ की भूमिका को पूरी तरह से निभाते हुए दिखे, इसके अलावा जब साल की शुरुआत हुई थी, तो उस समय उमेश यादव के बारे में कोई अधिक चर्चा नहीं हो रही थी, लेकिन साल का अंत होते-होते और बुमराह के घायल होने के बाद टीम में जगह मिलने से उमेश ने मौके को पूरी तरह से भुनाते हुए टेस्ट क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया।
1 – मोहम्मद शमी
मोहम्मद शमी के लिए एक गेंदबाज़ के तौर पर साल 2019 काफी शानदार बीता है, जहां पिछले साल शमी को फिटनेस की समस्या से जूझना पड़ा था, लेकिन इस साल उन्होंने फिट होकर शानदार वापसी करते हुए बल्लेबाज़ो के लिए लगातार सिरदर्द बने रहे और इसी कारण दिग्गज तेज गेंदबाज डेल स्टेन ने शमी को लेकर कहा कि वह वर्ल्ड क्रिकेट में वर्तमान में सबसे शानदार तेज गेंदबाज हैं।
शमी ने इस साल 8 टेस्ट मैच में खेलते हुए 16.66 के औसत के साथ 33 विकेट अपने नाम पर किये, जिसमें साउथ अफ्रीका के खिलाफ विशाखापट्टनम टेस्ट मैच की चौथी पारी में शमी ने 35 रन देकर 5 विकेट हासिल करते हुए साल में अपनी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ी की। इसके अलावा अफ्रीका के खिलाफ रांची टेस्ट में भी शमी ने 5 विकेट हासिल करने के साथ बांग्लादेश के खिलाफ इंदौर टेस्ट मैच में शमी ने 7 विकेट अपने नाम पर किए थे।
2 – इशांत शर्मा
इस साल इशांत शर्मा ने टेस्ट क्रिकेट में टीम के लिए गेंदबाज़ी में एक सीनियर खिलाड़ी की भूमिका निभाते हुए दूसरे गेंदबाज़ो के लिए लगातार एक छोर से मदद का काम करते रहे। वहीं इशांत ने टीम के लिए दबाव में विकेट निकालकर अपने अनुभव के बारे में भी सभी को परिचित कराने का काम किया।
इशांत ने इस साल 6 टेस्ट मैच में खेलते हुए 15.56 के औसत के साथ 25 विकेट अपने नाम पर किये जिसमें एक पारी में 2 बार 5 विकेट लेने का कारनामा भी दर्ज हैं। शर्मा ने वेस्टइंडीज़ के दौरे पर खेले गए पहले टेस्ट मैच में पहली पारी में 43 रन देकर 5 विकेट अपने नाम पर किये थे, जिसके बाद बांग्लादेश के खिलाफ कोलकाता में खेले गए पहले डे-नाइट टेस्ट मैच की पहली पारी में 22 रन देकर 5 विकेट अपने नाम पर किए थे। इशांत अपने टेस्ट करियर में 300 विकेट हासिल करने से सिर्फ 8 विकेट दूर हैं।
3 – उमेश यादव
उमेश यादव को इस साल टेस्ट टीम में थोड़ा देर से खेलने का मौका मिला लेकिन यादव ने शानदार वापसी की। बुमराह के चोटिल होने के बाद और भुनवेश्वर कुमार के अनफिट होने की वजह से उमेश यादव को टीम में वापसी करने का मौका मिला जिसका लाभ उन्होंने पूरी तरह से उठाया।
उमेश यादव ने इस साल 4 टेस्ट मैच खेले जिसमें उन्होंने 13.65 के औसत के साथ 23 विकेट अपने नाम पर किए। यादव ने इस साल टेस्ट क्रिकेट में वापसी अफ्रीका के खिलाफ पुणे टेस्ट में करते हुए पहली पहली पारी में जहां 37 रन देकर 3 विकेट हासिल किए तो वहीं दूसरी पारी में 22 रन देकर 3 विकेट अपने नाम पर किए।
यादव ने अपने इस शानदार फार्म को जारी रखते हुए साल का अंत बांग्लादेश के खिलाफ कोलकाता में खेले गए पहले डे-नाइट टेस्ट मैच की दूसरी पारी में 53 रन देकर 5 विकेट हासिल करते हुए की। यह साल भारतीय तेज गेंदबाज़ी के इतिहास का सबसे सुनहरा साल कहा जा सकता है, क्योंकि स्पिनरो से अधिक टीम अब अपने तेज गेंदबाज़ो पर अधिक निर्भर दिखने लगी है।
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