भारत के फ्रीस्टाइल रेसलर खिलाड़ी दीपक पूनिया जो 86 किलोग्राम इवेंट में हिस्सा लेते हैं। दीपक ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में 86 किलोग्राम इवेंट में हिस्सा लेते हुए सिल्वर पदक को अपने नाम पर किया था। दीपक को देश का आने वाले समय के शानदार रेसलर खिलाड़ी में से एक माना जाता है।
86 किलोग्राम कैटेगरी रैकिंग में कुछ समय पहले दीपक टॉप पर पहुंचे थे, इस समय दीपक के 82 अंक हैं और वह पिछले टॉप रैंक खिलाड़ी इरान के हसन याजदानी से 4 अंक अधिक हैं। दीपक पूनिया उन 4 रेसलरो में से एक हैं, जिन्होंने साल 2020 के टोक्यो ओलंपिक के लिए अपनी जगह को पक्का कर लिया है।
शुरूआती जीवन
दीपक पूनिया ने रेसलर बनने का सपना इसलिए देखा था, क्योंकि वह इसके जरिए अच्छी नौकरी हासिल करके अपने परिवार को आर्थिक मजबूती दे सके। दीपक भारतीय आर्मी सिपाही के पद पर तैनात हैं। जिसके बाद सुशील कुमार ने दीपक को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें कुछ बड़ा करना चाहिए और रेसलिंग को उन्हें खुद को लेकर बड़े प्रारूप में देखने की जरूरत है।
पूनिया ने सुशील की बात को समझते हुए एक बार फिर से रेसलिंग की ट्रेनिंग करना शुरू कर दी, जिसके बाद 3 साल के अंदर ही दीपक एक सफल कुश्ती खिलाड़ी बनकर उभरे, जिसमें उन्होंने कई खिताबों को अपने नाम पर किये।
निजी जीवन
हरियाणा के झज्जर डिस्ट्रिक में दीपक पूनिया का जन्म हुआ था और इस इलाके में रेसलिंग को लेकर एक अलग जूनुन देखने को मिलता है। दीपक के पिता सुभाष पूनिया एक डेयरी किसान हैं जो अपने बेटे को दंगल दिखाने साथ में लेकर जाया करते थे। 5 साल की उम्र में ही दीपक ने अपने गांव में मौजूद आखाडा जो अर्जुन अवार्ड पुरस्कार पाने वाले वीरेंद्र सिंह चलाते हैं, वहां जाकर ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया था।
सुभाष पूनिया अपने बेटे को रेसलर बनाने में लगातार उसका समर्थन करते रहे और साल 2015 से दीपक के पिता हर दिन 60 किलोमीटर की यात्रा करके अपने बेटे को दूध और फल देने जाने लगे। दीपक एक अनुशासन प्रिय खिलाड़ी थे जो उन्हें उनके पिता ने सिखाया था। पिता ने भी उनकी इस सफलता में लगातार काफी कड़ी मेहनत की है, जिससे दीपक इस मुकाम पर पहुंच सके हैं।
प्रोफेशनल जीवन
बचपन से ही दीपक ने अपने गांव में काफी रेसलरो को देखा हैं, और वह दंगल में भी काफी एक्टिव रहते थे। जब दीपक सिर्फ 4 साल के थे, तो वह पहली बार कुश्ती के अखाड़े में उतरे थे। दीपक के चचेरे भाई सुशील कुमार रेसलिंग की दुनियां में एक जाना-पहचाना नाम हैं और वही दीपक को कई अलग-अलग अखाडो में लेकर जाया करते थे।
जल्द ही दीपक ने अपने गांव के आसपास होने वाले दंगलो में हिस्सा लेना शुरू कर दिया और उसमें उन्हें सफलता भी मिली जिससे मिले नकद पुरस्कार को वह अपनी डाइट के साथ परिवार की मदद में भी देने लगे। सुशील ने जल्द ही समझ लिया कि दीपक का दंगल में हिस्सा लेने से बात नहीं बनेगी और इससे वह एक प्रोफेशनल रेसलर नहीं बन पायेंगे।
साल 2015 में दीपक दिल्ली में आकर छत्रसाल स्टेडियम में आकर अभ्यास करने लगे, जिसके बाद अगले ही साल हुई कैडेट वर्ल्ड चैंपियनशिप में दीपक ने गोल्ड मेडल जीता। अब दीपक की नजर 2020 टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने पर है।
अचीवमेंट
निजी जानकारी
विवाद
रेसलर दीपक पूनिया अभी तक किसी भी विवाद में पड़ते हुए नहीं दिखे हैं। दीपक ने जिस समय साल 2020 के टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाइ किया था, उस समय वह काफी सुर्खियों में रहे थे।
नेटवर्थ
कुश्ती खिलाड़ी दीपक पूनिया की नेटवर्थ को लेकर किसी भी तरह की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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