भारत की पूर्व महिला वेटलिफ्टर खिलाड़ी कर्णम मल्लेश्वरी जो ओलंपिक में एथलीट में पदक जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनी थी। साल 2000 में सिडनी में हुए ओलंपिक में कर्णम ने कांस्य पदक जीता था, जिसके बाद उन्हें कई पुरस्कार भी मिले थे, जिनमें राजीव गांधी खेल रत्न और पद्म श्री अवार्ड प्रमुख तौर पर हैं।
शुरूआती जीवन
कर्णम मल्लेश्वरी का जन्म आंध्र प्रदेश के वोसानीपेटा गांव में 1 जून 1975 को हुआ था। कर्णम के माता-पिता की 5 बेटियां हैं, जो सभी वेटलिफ्टिर हैं। कर्णम की मां श्यामला मल्लेश्वरी ने अपनी पांचो बेटियों को वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग दी जिसमें से 4 इस खेल में आगे बढ़ी, यहां तक की कर्णम ने अपने चचेरे भाई को वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग करते हुए देखने के बाद उनकी दिलचस्पी इसमें काफी बढ़ी थी। 12 साल की उम्र में कर्णम ने अपनी ट्रेनिंग के लिए स्कूल छोड़ दिया था।
मल्लेश्वरी की मां ने अपनी सभी बेटियों का पूरा समर्थन दिया जिसमें वह लकड़ी के गठ्ठरों को उठाकर अपनी प्रैक्टिस करती थी। जैसा की कर्णम ने अपना स्कूल छोड़ दिया था और वह अधिकतर समय जिम में बिताने लगी थी। जैसा की कर्णम के नाम का मतलब गर्व करना है और वह काफी कड़ी ट्रेनिंग करने लगी जिससे उनके माता पिता को उनके उपर गर्व कर सके।
निजी जीवन
कर्णम ने अपनी साथी प्रोफेशनल वेटलिफ्टर खिलाड़ी राजेश त्यागी से साल 1997 में शादी की जिसके 4 साल के बाद उन्हें 1 बेटा हुआ। कर्णम जिन्होंने इस खेल से संन्यास ले लिया है वह अपने नाम की एक एकेडमी चलाती हैं, जिसमें युवाओं को ट्रेनिंग की जानकारी दी जाती है। कर्णम के पति फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में चीफ जरनल मैनेजर के पद पर तैनात हैं। वर्तमान में कर्णम अपने परिवार के साथ हरियाणा के यमुना नगर में रहती हैं।
कर्णम मल्लेश्वरी का बेटा शरद चंदर त्यागी भी अपने माता-पिता के कदमों पर चलकर शूटर बनने की ट्रेनिंग ले रहा है, जिससे वह एक दिन देश का नेतृत्व शूटिंग में कर सके। साल 2015 में चंदर ने नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में 10 मीटर राइफल शूटिंग के लिए क्वालीफाई किया था।
प्रोफेशनल जीवन
कर्णम मल्लेश्वरी को अपने माता-पिता से काफी समर्थन मिला। काफी कम उम्र में ही स्कूल छोड़ने के बाद मल्लेश्वरी ने अपनी प्रतिभा से किसी को निराश नहीं किया। वेटलिफ्टिंग में दिलचस्पी होने की वजह से कर्णम के माता-पिता ने उन्हें श्रीकाकुलम के डिस्ट्रिक हेडक्वाटर टाउन में अमी नायडू जिम में ट्रेनिंग के लिए भेज दिया।इसके बाद कर्णम ने इंटर स्टेट और नेशनल लेवल पर वेटलिफ्टिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेना शुरू कर दिया।
जिसमें उन्हें साल 1991 में अंबाला में हुए सीनियर नेशनल गेम्स में 16 साल की उम्र में सिल्वर पदक जीतने में सफलता हासिल हुई लिया, जिसके बाद वह स्पोर्ट्स अथॉरिटी की नजरो में भी आ गयीं। शुरूआती समय में कर्णम को नीलम शेट्टी अपन्ना ने ट्रेनिंग दी थी, लेकिन बाद में मल्लेश्वरी अपनी बहन कृष्णा के साथ दिल्ली स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया में ट्रेनिंग करने के लिए चली गयीं।
साल 1990 में मल्लेश्वरी ने जब राष्ट्रीय कैंप को ज्वाइन किया उसके 4 साल के बाद वह 54 किलोग्राम वर्ग में वर्ल्ड चैंपियन विजेता बन चुकी थी। कर्णम को वेटलिफ्टिंग में कई रिकॉर्ड को बनाने वाले बेलारूस के पूर्व खिलाड़ी लियोनिड टारानिको ने ट्रेनिंग दी। मल्लेश्वरी ने वेटलिफ्टिंग में हर टूर्नामेंट में खिताब जीतने के साथ कई रिकॉर्ड्स बनाने का भी काम किया।
साल 1995 में साउथ कोरिया में हुई एशियन चैंपियनशिप में कर्णम ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए तीन गोल्ड मेडल को अपने नाम पर किया था। इसी के बाद कर्णम ने साल 2000 के सिडनी ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई कर लिया था, जब मल्लेश्वरी ओलंपिक में हिस्सा लेने पहुंची थी, तो उससे पहले वह 29 अंतरराष्ट्रीय पदकों को अपने नाम पर कर चुकी थी।
सिडनी ओलंपिक में मल्लेश्वरी ने कुल 240 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक जीतने के साथ अपना नाम इतिहास के पन्नो में दर्ज करवा लिया था। साल 2001 में बेटे के पैदा होने के बाद कर्णम ने वेटलिफ्टिंग इवेंट में हिस्सा लेना कुछ समय के लिए बंद कर दिया था, जिसके बाद वह 2002 के कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने वाली थी, लेकिन पिता की मृत्यु की वजह से उन्होंने आखिरी समय अपना नाम वापस ले लिया।
मल्लेश्वरी का अगला लक्ष्म साल 2004 के एथेंस ओलंपिक गेम्स था, लेकिन उसमें वह उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर सकी, जिसके बाद उन्होंने अपने संन्यास का ऐलान कर दिया। कर्णम को आंध्र प्रदेश की आयरन लेडी के नाम से भी पहचाना जाता है, वहीं मल्लेश्वरी का सपना है, कि देश से इस खेल में अधिक से अधिक महिला खिलाड़ी भी आगे निकलकर आयें।
निजी जानकारी
शारीरिक माप
अचीवमेंट
विवाद
अपने पूरे करियर में इस शानदार वेटलिफ्टर खिलाड़ी ने किसी और चीज पर ध्यान नहीं दिया जिससे जहां वह देश का सम्मान लगातार बढ़ाती चली गयीं वहीं दूसरी तरफ कर्णम मल्लेश्वरी किसी तरह के विवाद से काफी दूर ही देखी गयी।
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