एक मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाली और बचपन में कबड्डी के साथ क्रिकेट खेलने का शौक रखने वाली भारत की महिला जूडो खिलाड़ी गरिमा चौधरी अकेली खिलाड़ी थी जिन्होंने देश के लिए साल 2012 के लंदन ओलंपिक में जूडो इवेंट में हिस्सा लिया था। 29 साल की गरिमा चौधरी ने अपने खेल के प्रति हमेशा गंभीर रही हैं और जब 22 साल की उम्र में गरिमा ने मेरठ छोड़ा था उसके बाद वह देश की शानदार जूडो खिलाड़ी बनी। अपने उपर पूरा भरोसा रखने और आक्रमक व्यवहार ने गरिमा को जूडो में आगे बढ़ने में काफी मदद की और इसमें उनकी मां का भी योगदान हैं, जिन्होंने गरिमा को जूडो की ट्रेनिंग लेने के लिए सहयोग दिया।
शुरूआती जीवन
29 साल की गरिमा चौधरी को 2 बातें प्रमुख तौर पर व्याख्या करता हैं, एक निडर और हमेशा निर्भीक रहना। लंदन ओलंपिक के लिए एकलौती भारतीय खिलाड़ी के तौर पर जूडो में हिस्सा लेने वाली गरिमा चौधरी को महाद्वीपीय कोटे के तहत 63 किलोग्राम कैटेगरी में शामिल किया गया था। गरिमा ने जब से जूडो खेलना शुरू किया उसके बाद उनके खेल में लगातार सुधार देखने को मिला है।
जब गरिमा सिर्फ 14 साल की थी, तो उस समय उनका चयन जूनियर एशियन चैंपियनशिप के लिए हुआ था, वहीं गरिमा की मां ने अपने बेटी को 10 की उम्र में ही जूडो के प्रति हौसला बढ़ाने का काम करना शुरू कर दिया था, जिसके बाद गरिमा देश की एक शानदार जूडो खिलाड़ी बनकर उभरी।
निजी जीवन
उत्तर प्रदेश के मेरठ में 2 अप्रैल 1990 को गरिमा चौधरी का जन्म हुआ था। गरिमा के पिता का नाम राजेंदर चौधरी है, तो वहीं मां का नाम साथेस चौधरी है। गरिमा के अंकल जहां एक लोकल स्तर पर हॉकी खिलाड़ी रहे हैं, तो वहीं चचेरे भाई नेशनल लेवल पर बॉक्सर खिलाड़ी हैं। गरिमा इन सभी को खेलते हुए देखते बड़ी हुई हैं और इसके बाद उन्होंने भी जूडो को चुना। वहीं गरिमा के पिता अपनी बेटी की पढ़ाई को लेकर जरूर थोड़ा चिंतित थे, लेकिन उनकी मां ने स्पोर्ट्स में आगे बढ़ने में काफी सपोर्ट किया।
राजेंदर चौधरी जहां एक ट्रांसपोर्टर हैं, तो वहीं गरिमा की मां मेरठ में एक ब्यूटीशियन का काम करती हैं। जब गरिमा 10 साल की थी, उस समय उनकी जूडो की ट्रेनिंग मेरठ के कैलाश प्रकाश स्टेडियम में शुरू हुई। साल 2004 में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया में जीवन शर्मा के अंडर में प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया।
15 साल की उम्र में ही गरिमा ने अपना घर छोड़कर पटियाला में SAI में ट्रेनिंग करना शुरू कर दिया था और एक युवा होने के नाते गरिमा अकेले ही ट्रैवल करके प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए जाती थी। साल 2004 में जब गरिमा का चयन कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप के लिए हुआ तो वह काफी हैरान हो गयी थी,क्योंकि वह पहली बार सीनियर लेवल इंटरनेशनल टूर्नामेंट में हिस्सा लेने जा रही थी।
प्रोफेशनल जीवन
साल 2011 में गरिमा चौधरी ने पेरिस में हुए वर्ल्ड जूडो चैंपियनशिप में हिस्सा लिया, इसके अलावा गरिमा वर्ल्डकप का भी हिस्सा रह चुकी हैं, जिसमें वह साल 2012 के लंदन ओलंपिक के क्वालीफिकेश खेलने के लिए गयी ती। एशियन जूडो चैंपियनशिप में गरिमा ने 63 किलोग्राम कैटेगरी इवेंट में 7 वें स्थान पर खत्म किया था।
समर ओलंपिक के लिए गरिमा ने फ्रांस और जर्मनी में ट्रेनिंग ली और इसके बाद उन्होंने लंदन ओलंपिक में हिस्सा लिया और वहां पर 63 किलोग्राम इवेंट के पहले राउंड में गरिमा को इप्पोन योशी उने से हार का सामना करना पड़ा जिसके बाद ओलंपिक में पदक जीतने का उनका सपना वहीं पर टूट गया था। साल 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गरिमा चौधरी ने क्वाटरफाइनल तक का सफर तय किया था।
अचीवमेंट
निजी जानकारी
विवाद
अपने शानदार प्रदर्शन और अचीवमेंट के अलावा गरिमा चौधरी अभी तक किसी भी तरह के विवाद से दूर ही देखी गयी हैं। गरिमा का पूरा ध्यान अपने खेल की तरफ रहता है, जिससे वह देश का सम्मान बढ़ा सके।
नेटवर्थ
गरिमा चौधरी की नेटवर्थ को लेकर बात करी जाए तो उनकी प्राइमरी इनकर अपने स्पोर्टिंग प्रोफेशन से ही होती है, फिलहाल उनकी नेटवर्थ को लेकर किसी भी तरह की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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