भारत और वेस्टइंडीज़ के बीच 3 मैचो की टी20 सीरीज़ खत्म होने के बाद दोनों ही टीमों के बीच में 3 मैचो की वनडे सीरीज़ का पहला मैच 15 दिसंबर को चेन्नई के चेपक स्टेडियम में खेला गया जिसमें विंडीज़ टीम ने 8 विकेट से जीत दर्ज करते हुए सीरीज़ में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है। भारतीय टीम ने अपने शुरुआती 3 विकेट जल्दी खो दिए थे,
जिसके बाद रिषभ पंत और श्रेयस अय्यर की 71 और 70 रनों की पारी के बाद टीम इंडिया ने 50 ओवरो में 8 विकेट के नुकसान पर 287 रन बनाये जिसके जवाब में विंडीज़ टीम ने 47.5 ओवरो में 2 विकेट के नुकसान पर इस लक्ष्य को हासिल कर लिया। कैरेबियन टीम की तरफ से शिमरन हेटमायर ने 106 गेंदो में 139 रनों की पारी खेली तो वहीं पारी की शुरुआत करने के लिए आये साई होप ने 151 गेंदो में 102 रनों की नाबाद पारी खेलकर टीम को जीत दिलाकर वापस लौटे।
आइये एक नजर डालते हैं, पहले वनडे में बने रिकॉर्ड्स पर
साल 2005 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, कि भारतीय टीम को घर पर लगातार 4 वनडे मैचों में हार का सामना करना पड़ा है। इससे पहले साल 2005 में पाकिस्तान के खिलाफ हुई 6 वनडे मैचो की सीरीज़ में टीम को हार का सामना करना पड़ा था। वहीं इस साल मार्च में हुई ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 5 मैचो की वनडे सीरीज़ के आखिरी 3 मैचो में भारतीय टीम को सामना करना पड़ा था, जिसके बाद इस वनडे सीरीज़ के पहले मैच में। पिछले 30 सालों में यह दूसरी बार है, जब भारतीय टीम को घर पर लगातार 4 वनडे मैचो में हार का सामना करना पड़ा है।
विंडीज़ ने आखिरी बार 4 लगातार वनडे मैच में साल 2014 में जीत हासिल की थी, जब उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ घर पर 3-0 से वनडे सीरीज़ में जीत दर्ज करने के बाद भारत के खिलाफ साल 2014 के दौरे पर हुई वनडे सीरीज़ का पहला मैच जीता था।
शिमरन हेटमायर और साई होप पहली ऐसी जोड़ी बन गयी है, जिन्होंने भारत के खिलाफ भारत में लक्ष्य का पीछा करते हुए शतकीय पारियां खेली हैं। वैसे क्रिकेट इतिहास में ऐसा तीसरी बार हुआ है, जब किसी टीम के 2 खिलाड़ियों ने भारत के खिलाफ लक्ष्य का पीछा करते हुए एक ही मैच में शतक लगाया है। जिसमें साल 2004 में एडिलेड वनडे मैच में जिम्बाब्वे के खिलाफ और साल 2016 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पर्थ वनडे मैच में इससे पहले ऐसा हो चुका है।
साई होप और शिमरन हेटमायर के बीच पहले वनडे में दूसरे विकेट के लिए हुई 218 रनों की साझेदारी भारत में भारतीय टीम के खिलाफ लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे बड़ी साझेदारी हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड न्यूज़ीलैंड के टॉम लैथम और रॉस टेलर की जोड़ी के नाम पर था, जिन्होंने साल 2017 में मुम्बई वनडे मैच में चौथे विकेट के लिए 200 रनों की साझेदारी की थी।
हेटमायर और साई होप के बीच हुई दूसरे विकेट के लिए 218 रनों की साझेदारी वैसे भारतीय टीम के खिलाफ किसी भी टीम का लक्ष्य का पीछा करते हुए दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी हैं। पहले स्थान पर साल 2016 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पर्थ वनडे मैच में स्टीव स्मिथ और जॉर्ज बेली के बीच तीसरे विकेट के लिए हुई 242 रनों की साझेदारी हैं।
दूसरे विकेट के लिए शिमरन हेटमायर और साई होप के बीच हुई 218 रनों की साझेदारी भारत के खिलाफ वेस्टइंडीज़ की तरफ से दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी हैं, इससे पहले साल 1983 में जमशेदपुर में खेले गए वनडे मैच में गॉर्डन ग्रिनिज और सर विवियन रिचर्ड्स के बीच दूसरे विकेट के लिए 221 रनों की साझेदारी हुई थी।
विंडीज़ टीम के लिए लक्ष्य का पीछा करते हुए किसी भी विकेट के लिए हेटमायर और होप के बीच हुई 218 रनों की साझेदारी अभी तक सबसे अधिक रनों की रही है। इससे पहले यह रिकॉर्ड शिवनारायण चंद्रपॉल और स्टुअर्ट विलियम्स के नाम पर था, जिन्होंने भारत के ही खिलाफ साल 1997 में ब्रिजटाउन वनडे में लक्ष्य का पीछा करते हुए 200 रनों की साझेदारी की थी।
चेन्नई वनडे मैच में साई होप ने अपना शतक पूरा करने के लिए 149 गेंदे खेली, जिसमें वह विंडीज़ टीम की तरफ से वनडे में दूसरा सबसे धीमा शतक बनाने वाले बल्लेबाज़ बन गए हैं। इससे पहले गॉर्डन ग्रिनिज ने वनडे में अपना शतक पूरा करने के लिए 150 से अधिक गेंदे खेली थी।
साल 2011 की शुरुआत के बाद से साई होप का वनडे में सबसे धीमा शतक रहा है। वहीं साल 2010 में नीदरलैंड के टॉम कूपर ने अफगानिस्तान के खिलाफ अपना शतक पूरा करने के लिए 151 गेंदे खेली थी।
स्पिन गेंदबाज़ो ने इस मैच में 33 ओवरो की गेंदबाज़ी की जिसमें उन्हें कोई भी विकेट हासिल नहीं हुआ। यह पहला ऐसा मौका है, जब भारतीय सरजमीं पर किसी वनडे मैच में स्पिन गेंदबाज़ो ने इतने ओवर डालने के बाद एक भी सफलता ना हासिल की है। इससे पहले साल 2001 में पुणे में खेले गए भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वनडे मैच में 29.1 ओवरो की स्पिन गेंदबाज़ी में एक भी विकेट हासिल नहीं हुआ था।
भारतीय स्पिनरो ने इस मैच में कुल 21 ओवरो की गेंदबाज़ी की लेकिन उन्हें एक भी विकेट हासिल नहीं हो सका। यह घरेलू जमीन पर भारती. स्पिन गेंदबाज़ो का किसी वनडे मैच में इतने ओवर गेंदबाज़ी करने के बाद एक भी विकेट हासिल ना करने के मामले में सबसे बड़ा रिकॉर्ड हैं। साल 2007 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोच्ची वनडे मैच में भी स्पिन गेंदबाज़ो ने 21 ओवरो की गेंदबाज़ी करने के बाद एक भी विकेट हासिल नहीं कर सके थे।
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