भारतीय टीम में इंग्लैंड में खेले गए विश्वकप के बाद से लिमिटेड ओवरो में महेंद्र सिंह धोनी के बाहर रहने के बाद रिषभ पंत को टीम लगातार प्रमुख विकेटकीपर बल्लेबाज़ के तौर पर टीम में लगातार मौका मिल रहा है, लेकिन पंत टीम के इस फैसले को सही साबित करने में नाकाम साबित हो रहे थे, जिसमें उनकी बल्लेबाज़ी के साथ विकेटकीपिंग में भी कई खामियां देखने को मिली थी।
लेकिन रिषभ पंत देश के एकलौते ऐसे विकेटकीपर बल्लेबाज़ हैं, जिनके नाम पर टेस्ट क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की सरजमीं पर टेस्ट शतक दर्ज हैं, इसके बावजूद पंत टीम में अपनी जगह को सुनिश्चित नहीं कर पाये हैं और इसी कारण उनकी जगह पर संजू सैमसन को खिलाए जाने की वकालत को लगातार देखा जा रहा है।
22 साल के रिषभ पंत के लिए वेस्टइंडीज़ के खिलाफ हुई 3 मैचो की टी20 सीरीज़ भी बल्ले और विकेटकीपिंग में कुछ खास नहीं बीती थी, लेकिन 15 दिसंबर से शुरु हुई 3 मैचो की वनडे सीरीज़ में पंत ने बल्ले से वापसी करते हुए अपने वनडे करियर का पहला अर्धशतक लगाया और 71 रनों की शानदार पारी खेलकर टीम को एक सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने में अहम योगदान भी दिया।
अपनी इस पारी को लेकर पंत ने मैच के बाद कहा कि, यह पारी मेरे लिए किसी दबाव से कम नहीं थी, लेकिन इस पारी के बाद मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। निजी तौर पर यदि मैं कहूं तो देश के लिए खेली गयी कोई भी पारी मेरे काफी महत्तवपूर्ण रहती है। एक युवा खिलाड़ी होने के नाते मैं लगातार सीखने और सुधार करने की कोशिश करता हूं।
जब मैं और श्रेयस अय्यर एक साथ बल्लेबाज़ी कर रहे थे, तो हमारा इरादा एक साझेदारी बनाने के साथ 40 ओवर तक बल्लेबाज़ी करना था, क्योंकि यह 50 ओवरो का मैच था, जिससेे की अंत में हम तेजी के साथ बल्लेबाज़ी करके रन बना सके।
मेरा ध्यान अपने खेल पर है, ना कि आलोचकों पर
रिषभ पंत स्वाभाव से एक आक्रामक खिलाड़ी हैं, लेकिन रविवार को हुए वेस्टइंडीज़ के खिलाफ पहले वनडे में उनके अंदर एक अलग ही तरह का बल्लेबाज़ देखने को मिला जो परिस्थिती के अनुसार खुद को ढ़ाल कर खेल रहा था। वहीं पंत किसी भी तरह के सामान्य खेल पर विश्वास नहीं करते हैं और इसको लेकर उन्होंने कहा कि, ऐसा कहीं नहीं कहा गया कि यह किसी का सामान्य खेल है, आपको हालात के अनुसार खेलना होता है, जो टीम के लिए बेहतर होता है। अच्छे खिलाड़ी वही होते हैं, जो परिस्थिती को भांपते हुए अपनी टीम के लिए खेलते हैं।
वहीं आलोचको को लेकर पंत ने अपने बयान में कहा कि, एक व्यक्तिगत और खिलाड़ी होने के नाते मेरा पूरा ध्यान अपने खेल पर होता हैं, लोग अच्छी और खराब बातें आपको लेकर बोलते रहते हैं, लेकिन मेरा पूरा ध्यान अपने खेल को लेकर है। टीम मैनेजमैंट ने भी मुझे अपने खेल पर ही ध्यान देने के लिए कहा है।
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