साल 2016 में रियो ओलम्पिक में भारत की तरफ से तीरंदाजी का नेतृत्व लक्ष्मीरानी माझी के कंधो पर थी। झारखंड के एक छोटे से गांव से आने वाली लक्ष्मीरानी माझी ने साल 2015 के आर्चरी वर्ल्डकप चैंपियनशिप जो डेनमार्क में हुआ था, उसमें टीम रिकुर्व इवेंट में अपनी टीम को सिल्वर पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।
एक मध्यवर्गीय परिवार से आने वाली लक्ष्मीरानी माझी ने सभी परेशानियों का सामना करते हुए देश की एक महान तीरंदाज खिलाड़ी बनकर अब उभर चुकी हैं।
लक्ष्मीरानी माझी शुरूआती जीवन
भारतीय महिला तीरंदाजी खिलाड़ी लक्ष्मीरानी का जन्म झारखंड के इस्ट सिंघभूम जिले के बेगुआ गांव में हुआ था। लक्ष्मीरानी ने अपनी पढ़ाई सरकारी स्कूल से की है। एक आर्चरी खिलाड़ी बनने की तरफ लक्ष्मीरानी ने अपने कदम स्कूल के दिनों से ही शुरू कर दिया था। लक्ष्मीरानी की आर्चरी में प्रतिभा को देखने के बाद आर्चरी के चयनकर्ताओं ने उन्हें इस खेल को प्रोफेशनली खेलने का अवसर दिया।
लक्ष्मीरानी ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था, कि, एजुकेशन की वजह से आज मैं यहां तक पहुंची हूं, क्योंकि स्कूल में जाने के बाद ही मुझे आर्चरी खेलने का मौका मिल सका और अब मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे खेलते हुए कई जगहों पर जा चुकी हूं। स्कूल ने ही मुझे ये सबकुछ दिया जिस कारण मैं अपने माता-पिता का धन्यवाद देना चाहूंगी कि उन्होंने मुझे ऐसे स्कूल में भेजा।
माझी के पित एक कोयले की खद्दान में काम करते थे। माझी को आर्चरी के खेल के बारे में कुछ भी नहीं पता था, लेकिन उन्होंने अपने गांव में कई लोगों को इसके जरिए अपनी जीविका चलाते हुए जरूर देखा। लक्ष्मीरानी इस समय भारतीय रेलवे में नौकरी भी कर रही हैं।
लक्ष्मीरानी माझी प्रोफेशनल जीवन
साल 2015 के वर्ल्ड आर्चरी चैंपियनशिप में लक्ष्मीरानी माझी ने हिस्सा लिया था, जिसमें उन्होंने सिंगल इवेंट में चौथे स्थान पर रहते हुए खत्म किया था, लेकिन रिकुर्व महिला टीम इवेंट में उन्होंने अपनी टीम को सिल्वर पदक जरूर दिलवाया था। लक्ष्मीरानी ने लगातार दबाव को सहते हुए 10 अंक बटोरती चली गयी जिससे टीम को सफलता हासिल हुई।
रियो में हुए साल 2016 के ओलम्पिक में लक्ष्मीरानी पहली बार हिस्सा ले रही थी और महिला रिकुर्व टीम में उनके साथ बोमबायला देवी लेशराम और दीपिका कुमारी थी, जिसमें टीम ने 7 वें स्थान पर खत्म किया था। राउंड ऑफ 16 में टीम ने कोलंबिया के खिलाफ जीत दर्ज करके क्वॉटर फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन यहां पर उन्हें रूस से हार का सामना करना पड़ा।
मौजूदा समय में लक्ष्मीरानी को ओलंपिक गोल्ड कोस्ट से काफी मदद मिल रही है, जो एक नॉन प्रॉफिट संगठन हैं और वह प्रतिभाली एथलीटों को जरूरी चीजें मुहैया कराने का काम करता है।
लक्ष्मीरानी माझी पर्सनल जीवन
लक्ष्मीरानी के पिता एक कोल माइन में काम करते थे और लक्ष्मीरानी को यहां तक पहुंचने के लिए काफी कड़ी मेहनत करी पड़ी जिसके लिए उन्होंने बचपन से ही इसका सपना देखना शुरू कर दिया था। आर्चरी को अपना प्रोफेशन बनाने के पीछे सबसे बड़ा कारण परिवार की गरीबी को भी मिटाना था।
एक इंटरव्यू के दौरान लक्ष्मीरानी ने कहा था, कि, मेरे पिता का काम काफी खतरनाक था और मैं उन्हें ऐसा नहीं करने देना चाहती थी, जिसके बाद मैने आर्चरी को अपना प्रोफेशन बनाया ताकि वह वह इससे रिटायर हो सके।
उपलब्धियां
वर्ल्ड चैंपियनशिप साल 2015 जो कोपहेगन में हुई थी, उसमें अपनी टीम को सिल्वर मेडल दिलाने में अहम योगदान दिया।
लक्ष्मीरानी माझी निजी जानकारी
लक्ष्मीरानी माझी नेटवर्थ
लक्ष्मीरानी माझी की मौजूदा समय में नेटवर्थ पर एक नजर डाली जाए तो वह 6 लाख डॉलर के आसपास हैं।
सोशल मीडिया प्रोफाइल
विवाद
अभी तक लक्ष्मीरानी अपने आर्चरी के करियर में विवादो से काफी दूर रही हैं।
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