एक होटल में वेटर का काम करने से लेकर साल 2016 में हुए रियो ओलंपिक में भारत का नेतृत्व करने वाले मनीष सिंह रावत की कहानी हर किसी के लिए एक प्रेरणा से कम नहीं है। एक ऐसे राज्य से आने वाले मनीष सिंह रावत जहां पर किसी को रेसवॉकिंग स्पोर्ट के बारे में भी नहीं पता उस खेल में मनीष ने देश का सम्मान बढानेे का काम किया।
मनीष सिंह रावत एक भारतीय रेसवॉकर हैं, जो 20 किलोमीटर और 50 किलोमीटर के इवेंट में हिस्सा लेते हैं। पिछले 3 सालों से मनीष भारतीय रेसवॉकिंग टीम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मनीष सिंह रावत ने रियो ओलंपिक में रेसवॉकिंग इवेंट में 13 वें स्थान पर खत्म किया था। मौजूदा समय में राहुल द्रविड एथलीट मेंटरशिप प्रोग्राम के तत्वाधान चलने वाली गो स्पोर्ट्स फाउंडेशन के अंतर्गत मनीष अपनी तैयारी कर रहे हैं।
शुरूआती जीवन
उत्तराखंड के चमोली गांव में जन्म लेने वाले मनीष सिंह रावत का परिवार काफी गरीब था और मनीष को रोजाना अपने स्कूल तक जाने के लिए 7 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था।
मनीष ने इस बात को लेकर एक इंटरव्यू में कहा था, कि, मैं जब 8 या 9 वीं क्लास में था, तब तक मुझे रेसवॉकिंग के बारे में कुछ भी नहीं पता था और उस समय मैं क्रिकेट खेलता था, लेकिन मुझे अपने स्कूल जाने के लिए 7 किलोमीटर उपर और फिर 7 किलोमीटर नीचे पैदल आना पड़ता था, जिससे मुझे पैदल चलने की एक आदत पड़ गयी थी और मुझे लगता है, इसी कारण मैं इस खेल में आगे बढ़ सका।
एक ऐसे राज्य से आना जहां पर रेसवॉकिंग के लिए किसी को अधिक ना पता होने की वजह से मनीष को शुरूआत में अधिक खिलाड़ियों को सामना नहीं करना पड़ा। मनीष जब 10 वीं क्लास में थे, उस समय उनके पिता का देहांत हो गया और इस कारण उन्हें एक होटल में वेटर के तौर पर काम करना पड़ा जिसमें उन्हें 1500 रूपये महिने मिलते और इससे वह अपने परिवार को संभालते थे।
मनीष ने एक किसान, एक डिशवाशर और खेतो में एक मजदूर के साथ ट्रैक्टर चलाने तक का काम किया। जहां दूसरे एथलीट अच्छे संसाधनो के साथ ट्रैक पर ट्रेनिंग करते थे, तो वहीं मनीष पहाडियों पर पैदल चलकर अभ्यास करते थे।
प्रोफेशनल करियर
ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में रेसवॉकिंग किसी भी तरह से आसान स्पोर्ट नहीं है, क्योंकि आपका एक पैर हमेशा हवा में रहना चाहिए और यदि ऐसा नहीं होता है, तो आप तुरंत अयोग्य साबित हो जायेंगे। स्टैमिना, तकनीक और फिटनेस होने के साथ लम्बी दूरी तक पैदल चलने की भी काबिलियत होनी चाहिए तो आपनी मानसिक क्षमता को भी परखने का काम करती हैं।
साल 2015 में जब चाइना के बिजिंग में हुए वर्ल्ड चैंपियनशिप एथलेटिक्स में जब मनीष ने 50 किलोमीटर इवेंट में हिस्सा लिया जो उस समय वह सभी की नजरो में आयें। इसी साल हुए आईएएफएफ रेस वॉकिंग चैलेंज में मनीष ने 20 किलोमीटर की रेस को 1 घंटे 20 मिनट 50 सेकेंड में पूरा किया था।
पैसे की कमी होने की वजह से मनीष ने एक समय इस खेल को छोड़ने का विचार किया लेकिन उनके कोच उन्हें ऐसा करने से मना करते हुए मनीष का आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ ट्रेनिंग को जारी रखने के लिए कहा, जिससे वह अपने सपने को पूरा कर सके।
इसके कुछ सालों के बाद मनीष ने आईएएफएफ रेसवॉकिंह चैलेंज में 1 घंटा 22 मिनट 50 सेकेंड में रेस को पूरा करके रियो ओलंपिक के लिए क्वॉलीफाइ कर लिया। मनीष इस इवेंट में 9 वें स्थान पर रहे थे।
रियो ओलंपिक में रेस के एक दिन पहले मनीष के घुटने में चोट लग गयी लेकिन इसके बावजूद मनीष में इवेंट में हिस्सा लेते हुए 20 किलोमीटर के इवेंट को 1 घंटे 21 मिनट 21 सेकेंड में पूरा करते हुए 13 वें स्थान पर रहे थे। इस रेस में मनीष को 4 पूर्व वर्ल्ड चैंपियन, 3 एशियन चैंपियन, 2 यूरोपियन चैंपियन और ओलंपिक में पदक जीतने वाले 2 खिलाड़ियों से मात मिली। मनीष ने इस इवेंट में हार मिलने के बाद अपनी निराशा को व्यक्त किया था।
निराशाजनक प्रदर्शन के बाद मनीष ने एक इवेंट में कहा कि, सर जी अब वापस गांव जाकर क्या मुंह दिखाऊंगा, बोला था मेडल लेकर आऊंगा। बस 10 सेकेंड सर बस 10 सेकेंड बेहतर करता तो मेडल जीत सकता था। आपको पता है, इंडिया में इस खेल को कोई नहीं देखता है, यही चांस था, सर अब 4 साल और इंतजार करना पड़ेगा।
उपलब्धियां
निजी जानकारी
नेटवर्थ
ट्रैक एंड फील्ड एथलीट मनीष सिंह रावत की नेटवर्थ को लेकर अभी किसी भी तरह की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
विवाद
मनीष सिंह रावत अभी तक अपने करियर में किसी भी तरह के विवादो से दूर ही रहे हैं।
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