देश का जाने पहचाने रोवर खिलाड़ी स्वर्ण सिंह सिंगल स्कल डिसीप्लिन में विशेषज्ञ माने जाते हैं। इस रोवर खिलाड़ी की जर्नी सभी के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है, क्योंकि अपने जीवन में काफी सारी बाधाओं को पार करते हुए स्वर्ण ने अपना मुकाम पाया हैं। साल 2014 के एशियन गेम्स में स्वर्ण सिंह ने पुरूष सिंगल स्कल डिसीप्लिन में कांस्य पदक जीता था। वहीं साल 2013 में हुए एशियन सीनियर रोविंग चैंपियनशिप में स्वर्ण सिंह ने गोल्ड मेडल जीता था। इस खेल में शानदार योगदान देने के लिए उन्हेें साल 2015 में अर्जुन पुरस्कार भी मिला था।
शुरूआती जीवन
पंजाब के पिछड़े हुए गांव से आने वाले स्वर्ण सिंह को इस खेल में आगे बढ़ने के लिए काफी परेशानियों को पार करते हुए आगे बढ़े हैं। स्वर्ण सिंह के यदि शानदार प्रदर्शन को लेकर बात करी जाए तो उन्होंने बड़े इवेंट जैसे कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक में बेहतरीन खेल दिखाया है, जिससे उनके गांव का नाम भी रौशन हुआ है। जब वह इस खेल के नाम को भी सही नहीं बोल पाते थे, उसके बाद उन्होंने इसी में अपना करियर बनाया।
निजी जीवन
स्वर्ण सिंह का जन्म पंजाब के दलेलवाला मंसा गांव में 20 फरवरी 1990 को हुआ था। स्वर्ण सिंह के पिता का नाम गुरमुख सिंह हैं, जो एक किसान हैं और गांव में उनके पास 8 एकड़ जमीन हैं, वहीं मां का नाम कुलविंदर कौर हैं। स्वर्ण ने 18 साल की उम्र में रोविंग करना शुरू किया था। बचपन से ही स्वर्ण का सपना देश के लिए खेलना था, लेकिन उन्हें उस समय इस बात का पता नहीं था, कि वह इतने महान खिलाड़ी एक दिन बन जायेंगे। स्वर्ण सिंह के लिए बजरंग लाल ठाकर और फौजा सिंह एक प्रेरणास्त्रोत के तौर पर थे।
साल 2008 में स्वर्ण सिंह भारतीय आर्मी में भर्ती हो गए जिससे वह अपने परिवार की आर्थिक तौर पर मदद कर सके, उस समय स्वर्ण को रोविंग के बारे में कुछ भी नहीं पता था। स्वर्ण को स्वीमिंग के बारे में पता था, जो उन्होंने अपने गांव में सीखी थी, जिसके बाद वह 10 सिख रेजीमेंट रोविंग टीम का हिस्सा बन गए।
जिसके बाद साल 2012 में स्वर्ण सिंह ने जहां लंदन ओलंपिक में हिस्सा लिया तो वहीं साल 2014 के एशियन गेम्स में उन्होंने कांस्य पदक जीता। साल 2009 में रोविंग के बारे गंभीर होने वाले स्वर्ण सिंह साल 2011 आने तक देश के सबसे शानदार रोवर खिलाड़ी बन चुके थे, क्योंकि उन्होंने नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल को अपने नाम पर किया था।
प्रोफेशनल जीवन
एशियन रोविंग चैंपियनशिप साल 2011 में कांस्य पदक जीतने के बाद साल 2012 के लंदन ओलंपिक में पुरूष सिंगल स्कल डिसीप्लिन में हिस्सा लिया जिसमें उन्होंने 16 वें स्थान पर खत्म किया था। साल 2013 में स्वर्ण सिंह ने एशियन चैंपियनशिप को जीतने के साथ साल 2014 के एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीता। वहीं साल 2018 में स्वर्ण सिंह ने एशियन गेम्स में क्वाड्रपल स्कल्स में गोल्ड मेडल जीता।
अवार्ड
रोविंग में शानदार योगदान देने के लिए अर्जुन अवार्ड दिया गया
अचीवमेंट
| इवेंट | जगह | पोजीशन |
| वर्ल्ड रोविंग चैंपियनशिप | सोलवेनिया, 2011 | 17 |
| एशियन रोविंग चैंपियनशिप | कोरिया, 2011 | 3 |
| समर ओलंपिक | लंदन, 2012 | 16 |
| 15 वीं एशियन सीनियर चैंपियनशिप | चाइना, 2013 | 1 |
| एशियन गेम्स | साउथ कोरिया, 2014 | 3 |
| एशियन गेम्स | इंडोनेशिया, 2018 | 1 |
| गेम | शहर | अचीवमेंट |
| 34 वें नेशनल गेम्स | झारखंड | गोल्ड |
| वर्ल्ड रोविंग चैंपियनशिप | स्लोवेनिया | 17 वां स्थान |
| एशियन ओलंपिक क्वालीफिकेशन रेगटा | साउथ कोरिया | गोल्ड |
| 30 वें ओलंपिक गेम्स | लंदन | 16 वां स्थान |
| वर्ल्ड रोविंग चैंपियनशिप | साउथ कोरिया | 12 वां स्थान |
| पोलैंड अलोजा इंटरनेशनल रैगटा | इटली | 5 वां स्थान |
निजी जानकारी
विवाद
अपने खेल के अलावा स्वर्ण सिंह किसी भी तरह के विवादों में अभी तक पड़ते हुए नहीं देखे गए हैं।
नेटवर्थ
अभी फिलहाल स्वर्ण सिंह की नेटवर्थ को लेकर किसी भी तरह की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन वह भारतीय आर्मी में सर्विस करने के साथ अपने रोविंग के प्रोफेशन से कमाते हैं।
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