राजस्थान से आने वाली भारतीय महिला ट्रैप शूटर खिलाड़ी शगुन चौधरी पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं, जिन्होंने ओलंपिक में ट्रैप शूटिंग इवेंट में अपनी जगह को पक्का किया है। साल 2012 में हुए लंदन ओलंपिक में शगुन ने ट्रैप शूटिंग इवेंट में 20 वां स्थान हासिल किया था। देश में जहां महिला एथलेटिक खिलाड़ियों को उतना हौसला नहीं मिलता है, तो वहीं शगुन की कहानी सभी के लिए किसी प्रेरणा ससे कम नहीं है।
निजी जीवन
एक बच्चे के तौर पर शगुन चौधरी अपने पिता के साथ शूटिंग रेंज में जाकर खिलौनी वाली गन से शूट करने की एक्टिंग करती थी। वहींं शगुन की मां चाहती थी, कि उनकी बेटी या तो डॉक्टर बने या फिर एमबीए की पढ़ाई करे। स्पोर्ट उस समय शगुन के लिए उस समय तक करियर के तौर पर एक विकल्प नहीं रहा जब तक उन्होंने साल 2003 में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक नहीं जीत लिया।
शूटिंग के अलावा शगुन स्टेट लेवल की स्वीमिंग चैंपियन भी रह चुकी हैं। शगुन अपनी क्लास बीच में छोड़कर अपने पिता के साथ तुगलकाबाद शूटिंग रेंज जाकर वहां पर प्रैक्टिस करती थी। शगुन को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा जब उन्होंने एमबीए ना करके शूटिंग को एक करियर के तौर पर चुना जिसमें उस समय सिर्फ उनके पिता ने अपनी बेटी के फैसले का समर्थन दिया।
निजी जीवन
शगुन चौधरी का जन्म 26 जून 1983 को राजस्थान के जयपुर में हुआ था। साल 1986 में जब शगुन 3 साल की थी, तो उस समय वह अपने पिता को शूटिंग करते हुए देखने के बाद काफी प्रभावित हुई थी। इसके बाद शगुन ने अपने पिता के साथ शूटिंग रेंज में जाना लगातार जारी रखा और इस दौरान वह अपने खिलौने वाली गन से पापा की नकल उतारने का काम करती थी।
एक ऐसे पिता की संतान जो स्पोर्ट्स में काफी एक्टिव थे, तो इस कारण शगुन भी स्कूल की पढ़ाई के दौरान स्टेट लेवल तक स्वीमिंग में पहुंच गयी थी। जब शगुन ने जीसस एंड मैरी कॉलेज में एडमीशन लिया तो उसके बाद वह दिल्ली में आकर रहने लगी जिसके बाद उनके पिता ने उन्हें तुगलकाबाद रेंज में जाकर शूटिंग करने की सलाह दी।
प्रोफेशनल जीवन
साल 2001 तक शगुन ने शॉटगन के साथ अभ्यास नहीं किया था और इसी साल शगुन ने थंडरबोल्ट रेंज में नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप को जीता जहां पर वह अपने पिता को शूटिंग करते हुए देखने जाती थी। अपने जीवन के शुरूआती समय में शगुन ने शॉटगन से बिल्कुल भी प्रैक्टिस नहीं किया था, क्योंकि वह काफी महंगी थी। शगुन कार्टेज उधार पर लेकर अपनी शूटिंग की स्किल्स को निखारने का काम करती थी।
इसके बाद साल 2004 में शगुन भारतीय शूटिंग टीम का हिस्सा बन गयी, लेकिन उसी समय इंटरनेशनल बॉडी फॉर शूटिंह ने ओलंपिक से महिला डबल्स ट्रैप इवेंट को हटा दिया जो शगुन के लिए एक बड़ा झटका था। खासकरके उस समय जब शगुन ने साल 2003 में हुए एशियन क्ले चैंपियनशिप में इस स्पोर्ट में कांस्य पदक जीता हो।
जिसके बाद साल 2005 में शगुन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए खुद को ट्रैप स्पोर्ट में लेकर गयी जो डबल ट्रैप से काफी तेज होता है। शगुन ने बिना किसी कोच की सहायता से ट्रेनिंग करना शुरू कर दिया जो एक तरीके से सही नहीं था, जिसके बाद शगुन ने मार्केलो डार्डी केे अंडर में ट्रेनिंग की जिन्होंने शगुन का आत्तविश्वास भी काफी बढ़ाने का काम किया।
वर्ल्डकप साल 2011 में शगुन को हार का सामना करना पड़ा जिससे वह ओलंपिक में भी अपनी जगह को पक्का नहीं कर सकी। इसके बाद शगुन को अगला मौका वर्ल्ड चैंपियनशिप में मिला जिसमें उन्होंने चौथा स्थान हासिल करने के साथ ओलंपिक में अपनी जगह को भी पक्का कर लिया।
अचीवमेंट
निजी जानकारी
नेटवर्थ
अभी शगुन चौधरी की नेटवर्थ को लेकर किसी भी तरह की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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