कबड्डी लोकप्रिय खेल: पढोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब ,खेलोगे कूदोगे तो होगे खराब ,इस कहावत को झूठ करते हुए आज खेल कूद जीवन के अभिन्न अंग बन चुके हैं . कबड्डी, कबड्डी, कबड्डी…” पूरे भारत मे ना भी सही कम से कम देश के उत्तरी भागों में तो सबने इन शब्दों को जरूर सुना होगा.जब टीवी, इंटरनेट और मोबाइल फोन ने हमारे जीवन मे दखलअंदाज़ी नहीं की थी तो शायद रात के खाने के बाद घर के पास छोटे से मैदान मे यह कबड्डी खेल का लुत्फ भी उठाया होगा. कबड्डी का खेल भले ही उत्तर भारत मे अधिक खेला जाता हो लेकिन मज़े की बात यह है कि कबड्डी शब्द का जन्म तमिल भाषा के शब्द ‘कई-पीडि’ से हुआ जिसका मतलब होता है चलो हाथ पकड़ें. और कबड्डी में हाथ पकड़ना खेल का मुख्य हिस्सा है।
क्रिकेट, हॉकी ओर बैडमिंटन के बाद अब कबड्डी की लीग का दौर शुरू हुआ है और इसका श्रेय किसी हद तक टीवी को भी जाता है. जब भी हम बच्चों को एक साथ खेलते हुए देखते हैं, तो हम भी अपने बचपन में खो जाते हैं। पर आज कल अक्सर बच्चे वीडियो गेम तथा अन्य फोन से संबंधित खेलों को खेलने में व्यस्त रहते हैं। जबकि दूर दराज के गांवों में आज भी अक्सर बच्चे समूह में खेलते हुए नज़र आ जाएंगे, इनके प्रिय खेलों में खोखो, कबड्डी, गिल्ली-डंडा, चोर सिपाही आदि प्रसिद्ध हैं। भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में जन्मा कबड्डी खेल आज भारत में राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रिय स्तर पर खेला जा रहा है। आज यह भारत ही नहीं वरन् अन्य देशों में जैसे नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, और पाकिस्तान में भी काफी प्रसिद्ध है। यहां तक कि बांग्लादेश का राष्ट्रीय खेल भी यही है।
भारत में क्रिकेट सबसे लोकप्रिय खेल है, इसमें कोई दो राय नहीं। मैदान से लेकर सड़क तक,गलियों से मोहल्लों तक क्रिकेट खेलने और इसके चाहने वालों की कोई कमी नहीं। गेंद और बल्ले के इस खेल के सभी दीवाने हैं। छक्कों और चौकों के रिकॉर्ड वाले इस खेल में पैसों की बरसात भी ख़ूब होती है। बावजूद इसके क्रिकेट को भारत का खेल कहना संभव नहीं। क्योंकि इसका जन्म भारत में नहीं इंग्लैंड में हुआ था। पर कबड्डी भारत के सबसे प्राचीन खेलों में से एक है और भारत इस खेल का सुलतान है, क्योंकि अब तक हुए सभी वर्ल्ड कप जीतने का खिताब भारत के नाम है। इस खेल में भारत का डंका बजता है, आकड़े बताते हैं कि भारत को इस खेल में महारथ हासिल है।
1918 में कबड्डी को भारत में राष्ट्रीय खेल का सम्मान प्राप्त हुआ। ताकि बच्चे इसे प्रमुख खेल के रूप में अपनाएं। इसके नियमों को तैयार करने के पांच वर्ष बाद अर्थात 1923 में बड़ौदा में पहला अखिल भारतीय कबड्डी टूर्नामेंट आयोजित किया गया। हिटलर के शासन काल के दौरान कबड्डी जर्मनी पहुंचा। 1936 में बर्लिन में आयोजित ओलंपिक में भारतीय कबड्डी टीम ने मेडल हासिल किया। इसके बाद कबड्डी को बढ़ावा देने के लिए अनेक कदम उठाए गये। कबड्डी के नियमों के औपचारिक गठन और प्रकाशन का ऐतिहासिक क़दम सन् 1923 में भारतीय ओलिंपिक संघ ने उठाया। इस स्वदेशी खेल का पहला अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शन एक खेल संगठन, हनुमान व्यायाम प्रसारक मंडल ने 1936 के बर्लिन ओलिंपिक में किया। में पहली प्रतियोगिता कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) के टाला बगीचे में आयोजित की गई।1938 में कलकत्ता में इंडियन नेशनल गेम्स में कबड्डी शामिल किया गया . पहला एशियन कबड्डी चैम्पियनशिप 1980 में हुआ जिसमें भारत बांग्लादेश को हराकर विजेता बना। वहीं बीजिंग में 1970 के एशियन गेम्स में कबड्डी को शामिल किया गया था। नेशनल लेवल तक अपना डंका बजाने वाले इस खेल कबड्डी ने विश्व-स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू की. नई-नई आजादी पाए बांग्लादेश ने इस खेल को अपना राष्ट्रीय खेल बना लिया. 1978 में एशियन अमेच्योर कबड्डी फेडरेशन बनने के बाद पहला एशियन कबड्डी चैम्पियनशिप 1980 में हुआ. 1982 में दिल्ली में खेले गए एशियन गेम्स में इसे जगह मिली. वहीं बीजिंग में 1990 के एशियन गेम्स में कबड्डी को शामिल किया गया।
कबड्डी के खेल ने विश्वकप में २००४ में भाग लिया . पहला कबड्डी वर्ल्डकप साल 2004 में खेला गया. दूसरा 2007 में और तीसरा साल 2016 में बहुत बड़े स्केल पर खेल को खेला गया और हर बार पहले की तुलना में बेहतर परिणाम सामने आए. इसके बाद २०१४ में हुई प्रो कबड्डी लीग की शुरुआत।
हम में से कई लोग जो कबड्डी के खेल को देखते आए हैं उन्होंने पिछले तीन-चार सालों में इसे बदलते हुए देखा है. हमें एकबारगी याद आता है धूल से भरे जमीन पर खेलते खिलाड़ी और अब स्पोर्ट्स एरिना में चमकदार जर्सी पहने खिलाड़ी और सेलिब्रिटी आंखों के सामने घूमते हैं. कबड्डी को लेकर बदलते खयाल का कारण बेशक “प्रो कबड्डी लीग है. प्रो कबड्डी लीग 2014 में लांच किया गया था. आईपीएल के बाद इसे गढ़ा गया. अब ये सिलसिला सातवें सीजन में पहुंच गया है यह खेल अपने ग्लेमर के कारण भारत में बहुत लोकप्रिय हो रहा है इस खेल को अब टीवी को विज्ञापन के जरिए कार्पेरेट का पैसा मिल रहा है ओर उस पैसे का कुछ हिस्सा खिलाड़ियों को भी मिल रहा है. कभी मिट्टी पर भूखे पेट खेले जाना वाला खेल आज खिलाड़ियों को अच्छी खासी रकम दिला रहा है. यहाँ तक कि 1990 के बीजिंग एशियन गेम्स मे शुरू होकर अब तक छह बार एशियन गेम्स मे लगातार गोल्ड मेडल जीत कर भारतीय खिलाड़ियों को इतना पैसा और पहचान नहीं मिली, जो लीग ने दी है.इस समय देश के अलग-अलग शहरों मे चल रही कबड्डी लीग में ना सिर्फ भारत के टॉप खिलाड़ी बल्कि ईरान, बांग्लादेश, पाकिस्तान और कोरिया के खिलाड़ी भी अलग-अलग टीम से हिस्सा ले रहे हैं।
इस लीग को सफल बनाने के लिए इस खेल में कुछ बदलाव भी किये गए हैं जैसे खुली हवा मे मिट्टी पर खेले जाना वाला खेल अब इनडोर स्टेडियम मे फोम के गद्दों पर हो रहा है।
और टीवी पर देखने वालो के लिहाज से रोचक बनाने के लिए हमला करने का सामय 30 सेकेंड निर्धारित किया गया है. लीग के अभी तक के मुकाबलों मे दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया है।
इस खेल को लोकप्रिय बनाने के और भी कई कारण है जैसे यह चुस्त और दुरुस्त का खेल है कबड्डी के खेल में वही खिलाड़ी जगह बना पाते हैं जो कि मैदान पर तेज़ होने के साथ-साथ सबसे फिट भी हैं। इस खेल में अच्छा स्टैमिना होने के साथ बॉडी में लचीलापन का होना बेहद आवश्यक है। ऐसा इसलिए क्योंकि खिलाड़ियों को मैदान पर डटे रहने के अलावा लंबी समय तक अपनी सांस को भी रोक कर रखना होता है। इस खेल में ताकत के अलावा दिमाग का संतुलित होना भी जरुरी होता है। ऊँची और लंबी छलांग,फुर्तीलापन,तकनीकी रूप से मज़बूत होना एक कबड्डी खेलने वाले एथलिट की सबसे बड़ी पहचान है।
कम समय में ज्यादा मनोरंजन करने के कारण भी यह खेल बहुत लोकप्रिय हो रहा है . कबड्डी के खेल की सबसे रोचक बात यह है कि इस खेल में कम समय में ज्यादा मनोरंजन देखने को मिलता है। कई बार तो खिलाड़ी के एक ही एक्शन को देख दर्शकों में खुशी की लहर दौड़ जाती है। बेहतरीन स्टंट और शानदार रेड से भरे इस खेल में एक भी पल ऐसा नहीं बीतता जहां बोरियत का एहसास हो। कबड्डी का एक मैच अधिकतम 60 मिनट का होता है, जबकि क्रिकेट के खेल में न्यूनतम अवधि तीन घंटा होती है।
यह कबड्डी खेल विवादों से दूर है अभी तक इसलिए भी यह आगे बढ़ रहा है भारत का सबसे प्रचलित खेल क्रिकेट हाल ही में काफी विवादों से घिरा रहा है। इस खेल में मैच-फिक्सिंग, स्पॉट-फिक्सिंग, डोपिंग और भी कई विवाद रहे है। खेल के दिग्गज़ खिलाड़ियों से लेकर कई युवा खिलाड़ी भी मैच फिक्सिंग का शिकार बन चुकें है। जबकि कई खिलाड़ी डोपिंग में लिप्त होकर कलंकित हुए। कबड्डी इन सबके परे साफ सुथरे खेलों में से एक है। इसीलिए दर्शकों की आस्था भी इस खेल के साथ बनी हुई हैं।
अब आज का वक़्त बदलाव का वक़्त है . लोग सिर्फ एक ही खेल से मनोरंजन नहीं करते .वह रोज़ नए मनोरंजन के साधन चाहते हैं इसलिए भी अब दूसरे खेलों की तरफ खिंचाव बढ़ा है .और कुछ विवादों के चलते क्रिकेट प्रेमियों का झुकाव दूसरे खेलों की तरफ भी बढ़ा है,ऐसे में कबड्डी का भविष्य भारत में उज्जवल नज़र आ रहा। सबसे अहम बात यह है कि सभी वर्ल्ड कप, एशियन गेम्स और दूसरे अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में टॉप पर रहना। ऐसे में पदको के साथ भारत कबड्डी का शंहशाह है।
कबड्डी का शंहशाह है भारत – कबड्डी भारत के सबसे प्राचीन खेलों में से एक है और भारत इस खेल का सुलतान है, क्योंकि अब तक हुए सभी वर्ल्ड कप जीतने का खिताब भारत के नाम है। वहीं सभी 7एशियन गेम्स में भारत गोल्ड मेडल के साथ टॉप पर है। जबकि भारत ने क्रिकेट में केवल दो ही वर्ल्ड कप जीते हैं। ऐसे में कबड्डी के सामने क्रिकेट की उपलब्धियां बहुत फीकी नज़र आती है।
वास्तव में लोकप्रिय होने के लिए एक खेल के अंत में – न केवल सभी उपरोक्त गेमिंग तत्वों की आवश्यकता होती है बल्कि पर्याप्त टेलीविजन और मीडिया का ध्यान भी प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। स्टार स्पोर्ट्स कबड्डी कर रही हैं और खुद प्रोकबड्डी लीग का समर्थन करने वाली एक बड़ा पक्ष है। दर्शकों की संख्या पिछले 3 सालों में काफी बढ़ी है और आखिरकार खिलाड़ियों को उनके कारण से मान्यता मिल रही है। स्टार स्पोर्ट्स 8 चैनलों और 2 ऑनलाइन चैनलों पर लीग का प्रसारण कर रही है। अगले सत्र में विज्ञापन राजस्व लगातार 0 से बढ़कर 440, 550 और 700 मिलियन डॉलर हो गया है। एयरटेल, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और एडिडास जैसे बड़े प्रायोजक पहले से ही इस खेल से जुड़े हुए हैं। प्रो कबड्डी लीग के सीज़न 4 में, आयोजकों ने एक और परीक्षण किया महिला कबड्डी लीग का यह देखने के लिए कि क्या महिला कबड्डी समान दर्शकता खींच सकती है। पहले दो मैचों में 35 मिलियन से अधिक की दर्शकता थी, जो भारत से यूरो 2016 दर्शकों की तुलना में बहुत अधिक थी। पुरुष कबड्डी खेल के साथ महिला कबड्डी टीम को भी उचित स्थान मिल रहा है . कबड्डी में भी प्रो-कबड्डी लीग शुरू होने के बाद खिलाड़ियों के स्तर में काफी सुधार आया है। इस लीग में कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी आकर खेल रहे हैं जिससे इस खेल को वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने में काफी मदद मिल रही है। टीवी पर खेल दिखाए जाने से लोगों को इससे जुड़ने में मदद मिल रही है और वह इस खेल की बारीकियां भी सीख रहे हैं। कबड्डी अब भारतीय उपमहाद्वीप और एशिया के कुछ देशों से बाहर जा रही है। कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अब लीग में खेल रहे हैं। वर्ल्ड कप और एशिया कप में दुनिया के कई देश भाग लेते हैं।
भारत में भी कबड्डी के खिलाड़ियों को अब पहले से अधिक पहचान मिलने लगी है। आर्थिक रूप से भी खिलाड़ियों को पहले के मुकाबले अधिक फायदा हो रहा है। ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों के इससे जुड़ने से माना जा रहा है कि इस खेल को भविष्य में ओलिंपिक में जगह मिल सकती है। भारत में इस बार इस लीग का सातवां सीजन जुलाई २०१९ में शुरू होगा . एक समय ऐसा भी था जब यह खेल बहुत कम लोकप्रिय था। प्रो कबड्डी लीग आने से इसकी लोकप्रियता में इजाफा हुआ और ख़ास बात यह रही कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली प्रतिभाओं को भी इससे लाभ हुआ। आज भारत में इस खेल के करोड़ों फैन्स हैं और प्रो कबड्डी लीग की वजह से ऐसा हुआ है। प्रो कबड्डी के सातवें सीजन के लिए खिलाड़ियों को नीलामी में सबसे अधिक राशि देकर खरीदा गया। प्रो कबड्डी में जाने का सपना हर एक युवा का है और उसे पूरा करने की जुगत में भी खिलाड़ी जुटे रहते हैं। यह खेल अब मिटटी से निकल कर ड्राइंग रूम तक पहुँच गया है . उचित पब्लिसिटी और सोशल नेटवर्क ने इस खेल और इसके खिलाड़ियों को बहुत ही फेमस कर दिया है . पहले लोग इसके खिलाडी के नाम भी नहीं जानते थे ,पर अब बड़े बड़े प्रयोजकों के साथ जुड़ने से लोग यह खेल समझने लगे हैं जानने लगें हैं अगर कबड्डी टीवी और मीडिया के प्रिय हो सकती है, तो भविष्य उज्ज्वल दिखता है।
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