मोहन कुमार राजा एक भारतीय स्प्रिंटर हैं, जो 6 सदस्यों की 4X400 मीटर रिले टीम का हिस्सा हैं। रियों में हुए साल 2016 के ओलंपिक खेलो में मोहन कुमार टीम का हिस्सा थे। मोहन अभी तक भारत के लिए सबसे युवा एथलीट हैं, जिन्होंने 19 साल की उम्र में ओलंपिक में हिस्सा लिया।
शुरूआती जीवन
मोहन कुमार का जन्म चेन्नई के अमबट्टुर में मंगलापुरम में हुआ था। मोहन 14 दिसम्बर 1994 को पैदा हुए थे और एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं। मोहन माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर थे, क्योंकि उन्हें लगता था, कि इस तरह ही वह अपनी गरीबी को दूर करके एक बेहतर भविष्य बना सकते हैं।
अपने बचपन के दिनों में मोहन का पढ़ाई में काफी मन लगता था, लेकिन 11 साल की उम्र में जब उन्होंने बिजिंग ओलंपिक में उसेन बोल्ट को वर्ल्ड का सबसे तेज़ धावक बनते हुए देखा तो उनकी रुचि भी एथलेटिक्स की तरफ बढ़ने लगी। इस घटना के बाद मोहन ने भी देश के लिए ओलंपिक में पदक जीतने का सपना देखा। 11 साल की उम्र में ही मोहन ने एथलेटिक्स का अभ्यास करना शुरू कर दिया था। अपना अधिकतर समय मोहन घर से बाहर गुजारनेे लगे जिसके बाद उनके परिवार ने भी मोहन की दिलचस्पी को देखते हुए उनका पूरा समर्थन किया।
पर्सनल जीवन
एक गरीब परिवार में जन्म लेने वाले मोहन कुमार राजा के पिता नगर निगम में एक छोटे ठेकादार का काम करते थे। जब मोहन पहली क्लास में थे, तो बीमारी के कारण वह सही से पेपर नहीं दे सके और इस कारण उन्हें एक्जाम में फेल होना पड़ा था और यहीं से उनकी दिलचस्पी पढ़ाई को लेकर थोड़ा कम हो गयी।
मोहन को दौड़ना काफी अच्छा लगता था और इसी कारण स्कूल में उनके ग्रेड में लगातार कमी को देखा जा सकता था, मोहन के माता-पिता इसको लेकर काफी चिंतित हुए जिस कारण मोहन को रोज सुबह 5 बज़े उठकर ट्यूशन जाकर पढ़ना होता था, जिससे वह एक्जाम में बेहतर अंक ला सके।
यह मोहन की इच्छा के खिलाफ था, लेकिन वह अपना मां-बाप के खिलाफ नहीं जा सकते थे। मोहन के पीटी टीचर ने उनके पैशन का समर्थन करते हुए उसकी तरफ बढ़ने के लिए कहा। अंडर14 बॉयज में मोहन ने 400 मीटर की रेस सिर्फ 53 सेकेंड में पूरी कर ली। मोहन के पीटी टीचर लगातार उन्हें ट्रेनिंग देते रहे जब तक वह कॉलेज में जाकर दाखिला नहीं ले लिया। मोहन 9 वीं क्लास के एक्जाम में फेल हो गए थे, जिसके बाद स्कूल ने उन्हें निकालने का फैसला कर लिया था, लेकिन पीटी टीचर ने मोहन का समर्थन करते हुए उन्हें ना निकालने के लिए कहा। स्कूल मैनेजमेंट से पीटी टीचर ने कहा था, कि एक शानदार एथलीट के भविष्य को खराब मत कीजिये। कॉलेज में एडमीशन लेने तक मोहन 400 मीटर की रेस को 49 सेकेंड में पूरा करने लगे थे।
प्रोफेशनल लाइफ
मोहन के परिवार ने जब उनका खेल के प्रति पैशन देखा तो उन्होंने किसी भी तरह की दिक्कत को नहीं आने दिया जिससे उनका बेटा एक शानदार एथलीट बन सके। साल 2014 में चेन्नई में हुए ए.एल. मुदालियर मीट में मोहन ने 200 और 400 मीटर के इवेंट में जीत हासिल की जिसके बाद उन्हें सबसे शानदार पुरुष एथलीट का खिताब दिया। इस टूर्नामेंट में जीत के साथ मोहन को राष्ट्रीय स्तर पर भी खेलने का मौका हासिल हो गया।
केरला में हुए नेशनल गेम्स में भी अच्छा प्रदर्शन करने के बाद मोहन ने दिल्ली में हुए फेडरेशन कप में 400 मीटर इवेंट में टॉप 8 में आने के साथ पोलेंड ट्रेनिंग करने के लिए जाने वाले ग्रुप में खुद का चयन करवा लिया। मोहन ने कॉलेज में काफी सारे पदकों को अपने नाम पर किया हैं। मोहन और उनकी टीम ने नेशनल गेम्स में 4X400 मीटर रिले रेस में गोल्ड मेडल जीतकर रियो में होने वाले ओलंपिक के लिए अपनी जगह को पक्का कर लिया। 19 साल की उम्र में भारत के लिए एथलेटिक्स में भाग लेने वाले सबसे युवा खिलाड़ी देश के लिए बन गए। मोहन के पिता ने अपने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए उनकी मां के गहनों को गिरवी रखकर उनके लिए स्पाइक्स वाले जूते खरीदे थे, जिससे वह रियो ओलंपिक के लिए अपनी तैयारी कर सके।
निजी जानकारी
नेटवर्थ
मोहन की नेटवर्थ को लेकर बात की जाए तो वह मौजूदा समय में 70 लाख के आसपास होने की उम्मीद की जा सकती हैं। साल 2015 में दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता ने उन्हें 1 लाख की मदद दी थी, जिससे उन्होंने अपनी बहन की शादी की थी।
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